थोक के भाव खरीदना और रिटेल के भाव बेचना। इनवेंट्री कम से कम रखना। वॉलमार्ट से लेकर आम व्यापारी के मुनाफे का यही सलीका है। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने का भी यही सूत्र है। लेकिन हम करते हैं इसका उल्टा। यहां-वहां की एनालिसिस छलावा है। कुछ कौड़ियां पकड़ाकर वो महज भटकाती है। असल मुद्दा यह है कि शेयरों के थोक भाव और रिटेल भाव को पकड़ा कैसे जाए? बताएंगे आपको। पहले आज का बाज़ार।औरऔर भी

हाल में मिडकैप व स्मॉलकैप स्टॉक्स जमकर धुने गए हैं। इस साल बीएसई मिडकैप सूचकांक अब तक 14% गिरा है, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 21% टूटा है। बहुत सारी बातों के अलावा इसकी एक खास वजह यह डर था कि पूंजी बाजार नियामक, सेबी ब्रोकरों व प्रवर्तकों की मिलीभगत की जांच कर रही है। असल में शेयर बाज़ार है तो बुद्धि का खेल, पर चलता है डर व लालच की भावना से। आज क्या रहेगा बाज़ार का हाल?औरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी

आज मार्च के डेरिवेटिव सौदों के सेटलमेंट का दिन है। यानी, जबरदस्त उठापटक का दिन। आज आम ट्रेडरों या निवेशकों की नहीं, ऑपरेटरों की मर्जी चलती है। जो जितना बलवान, वो उतना धनवान। जानकार बताते हैं कि निफ्टी में सेटलमेंट 5665 के आसपास हो सकता है, जबकि नीचे में यह 5610 के ऊपर टिके रखने की हरचंद कोशिश करेगा। इस बीच विदेशी निवेशक संस्थाओं की खरीद और घरेलू निवेशक संस्थाओं की बिक्री का सिलसिला जारी है। मंगलऔरऔर भी

हफ्ते के पहले दिन निफ्टी 5690 का स्तर तोड़कर ऊपर में 5718 तक चला गया। लेकिन बंद हुआ पहले से नीचे 5634 अंक पर। आगे का हाल यह है कि दोपहर दो बजे तक चढ़ा रहा बाज़ार जिस तरह बाद में बिकवाली के दबाव में गिरा है, उससे नहीं लगता कि आज होली के एक दिन पहले कोई खास रंगत आएगी। वो केंद्र सरकार के टिके रहने और जल्दी चुनावों को लेकर डर रहा है। लेकिन यूरोपीयऔरऔर भी

लगातार दो हफ्ते की गिरावट के बाद यह हफ्ता थोड़ा तेज़ी का हो सकता है। निफ्टी शुक्रवार को 5651 पर बंद हुआ था। जानकार बताते हैं कि अगर निफ्टी आज 5690 के ऊपर बंद होता है तो वह जल्दी ही 5825 की मंजिल तक पहुंच सकता है। वैसे, इस हफ्ते बुधवार को होली और शुक्रवार को गुड फ्राइडे के चलते बाज़ार बंद है। इसलिए केवल तीन दिन ही ट्रेडिंग होनी है। इसमें भी गुरुवार को इस महीनेऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुनिया के हाल का कितना असर पड़ता है, यह भले ही बहस का मुद्दा हो। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय शेयर बाज़ार पर दुनिया के हाल का सीधा असर पड़ता है। साइप्रस और यूरो ज़ोन के झटके से भारतीय शेयर बाज़ार दोपहर दो बजे के बाद पस्त होने लगा। लेकिन कमाल की बात यह है कि विदेशी घटनाक्रमों से विदेशी निवेशक (एफआईआई) ज्यादा प्रभावित नहीं होते। इसका सबूत है कि कलऔरऔर भी

केंद्र सरकार के वजूद पर सच में कहें तो कोई तलवार नहीं लटकी है। फिर भी बाज़ार है कि गिरता ही जा रहा है। बड़े-बड़े निवेशक राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर घबरा गए हैं। ऊपर से कॉरपोरेट क्षेत्र भी निराशा जता रहा है। बहुत ही कम मौके ऐसे होते हैं जब एफआईआई (विदेशी निवेशक संस्थाएं) और डीआईआई (घरेलू निवेशक सस्थाएं) एक जैसा बर्ताव करें। लेकिन कल ऐसा ही हुआ। एफआईआई और डीआईआई दोनों ही बिक्री पर उतारू रहे।औरऔर भी

बाज़ार जो चाहता था, रिजर्व बैंक ने उसे दे दिया। ब्याज दर चौथाई फीसदी घटा दी। कच्चे तेल के दाम भी नीचे हैं। फिर भी वह डेढ़ फीसदी का गोता लगा गया। कारण, मनचाहे आर्थिक फैसले पर अनचाही राजनीति हावी हो गई। केंद्र सरकार से डीएमके की समर्थन वापसी की बात बाज़ार को जमी नहीं।  खैर, इससे शायद सरकार के टिके रहने पर कोई फर्क न पड़े क्योंकि समाजवादी पार्टी और बीएसपी का बाहरी समर्थन उसे बचाऔरऔर भी

आज सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते वक्त ब्याज दरें घटा सकता है। ज्यादातर लोगों का यही मानना है। हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी रिजर्व बैंक से यही अपील की है। लेकिन यह महज एक आशावाद है। रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव वही करते हैं जो उनकी समझ और विवेक कहता है। वे तो मौद्रिक नीति पर सलाह देने के लिए बनी समिति के बहुमत को भी ठुकरा कर फैसला करतेऔरऔर भी