शेयर बाजार से कमाने का क्या है मध्यमार्ग? बाज़ार की ज़मीनी हकीकत से जुड़े लोग बताते हैं कि यहां से वही कमाता है, जो नियमित बेचता रहता है। ज्यादा से ज्यादा 90 दिन में बेचकर निकल लो और फायदा कमा लो। कोई निवेश 20% से ज्यादा गिर जाए तो उसके पलटकर बढ़ने का इंतज़ार न करो। इतना घाटा पचा लो, नहीं तो वो निवेश गले की हड्डी बन जाएगा। मान लें कि कोई स्टॉक 90 दिन केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के व्यवहार से जुड़े लोग बताते हैं कि यहां से लम्बे समय के निवेशक दरअसल कुछ खास नही कमाते। वे केवल मुद्रास्फीति के असर को सोख पाते हैं। लम्बा निवेश, चाहे वो किसी स्टॉक में हो या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में, अच्छी से अच्छी स्थिति में अमूमन उसका सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 12-14% से ज्यादा नहीं होता। धन के समय मूल्य को न देखें और बीच के समय को काटकर सीधे-सीधे आज की तुलनाऔरऔर भी

बाज़ार को समझना है तो उससे जुड़े इंसान को समझना होगा, बाज़ार से कमाना है तो उससे जुड़े उन इंसानों को समझना होगा जो यहां से बराबर कमाते रहते हैं। यहां से दो तरह के लोग कमाते हैं। एक लम्बे समय के निवेशक और दूसरे छोटी अवधि के ट्रेडर। यह भी कहा जाता है कि शेयर बाज़ार में 95% ट्रेडर गंवाते और केवल 5% ट्रेडर ही कमाते हैं। लेकिन सच्चाई को अपने आसपास के व्यवहार से समझनेऔरऔर भी

शेयर बाज़ार कोई सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यवहार की चीज़ है। जो भी यहां ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं, उन्हें इसके व्यावहारिक पहलुओं से ज्यादा मतलब होना चाहिए। हालांकि ट्रेडिंग सीखनी है तो सैद्धांतिक पहलुओं को भी थोड़ा-थोड़ा समझकर ही आगे बढ़ सकते हैं। सैद्धांतिक पहलुओं पर भरपूर सामग्री इंटरनेट पर मिल जाती है जिसे गाहे-बगाहे पढ़ते रहना चाहिए। लेकिन असली पहलू है व्यावहारिक जिसे हम केवल और केवल अपने अभ्यास से ही साध सकते हैं। एक बातऔरऔर भी

शेयर बाज़ार किसी गूढ़ मंत्र से बंधा नहीं, न ही इसे सीखना कोई रॉकेट साइंस है। फाइनेंस न जाननेवाला शख्स भी इसमें पारंगत हो सकता है। लेकिन इसकी दो मूलभूत शर्तें हैं। एक, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण और दो, जो जैसा है उसे वैसा देखने की खुली बुद्धि। ये दोनों ही शर्तें नियमित अभ्यास से पूरी की जा सकती है जिसे हम साधना भी कह सकते हैं। अपने यहां जिस तरह बेरोगगारी की समस्या बेलगाम होती जाऔरऔर भी

लैरी विलियम्स ने बेटी मिशेल को ज़ीरो से सिखाना शुरू किया। तब तक साहित्य व थियेयर की पृष्ठभूमि वाली मिशेल को फाइनेंस का क-ख-ग-घ भी नहीं आता था। फाइनेंशियल कैलकुलस, टेक्निकल एनालिसिस और ट्रेडिंग टर्मिनल उसके लिए अजूबी चीज़ें थी। लेकिन पिता के निर्देशन में बेटी धीरे-धीरे भावों के चार्ट और ट्रेडिंग स्क्रीन की बारीकियां समझने लगी। यहीं से उसके महारथी बनने की यात्रा शुरू हो गई। पिता लैरी विलियम्स ने 1987 में ट्रेडिंग की रॉबिन्स कपऔरऔर भी

लैरी विलियम्स ने अपनी बेटी मिशेल को वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग सिखाने की पेशकश की तो थिएटर व साहित्य की पृष्ठभूमि वाली उनकी बेटी ने शर्त रख दी कि वह एक बार ही ऐसा करेगी, उसके बाद कतई नहीं। पिता ने कहा कि एक बार पूरे मनोयोग से सीखकर तो देखो। बेटी ने मान लिया। लेकिन काम बेहद कठिन था। लगातार 365 दिनों तक बेरोकटोक ट्रेडिंग के विश्वस्तरीय महारथियों से होड़ लेना कतई आसान नहीं था। मिशेलऔरऔर भी

दीपावली के बाद लैरी विलियम्स का प्रसंग फिर से। लैरी ऐसे विद्यार्थी की तलाश में थे, जो फाइनेंस की पृष्ठभूमि का न हो, जिसे वे अपनी तरह ट्रेडिंग का विश्व चैम्पियन बनने का गुर सिखा सकें। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने अपनी ही बेटी मिशेल विलियम्स को चुना। मिशेल तब किशोरी थीं। हॉलीवुड व ब्रॉडवे नाट्य फोरम की प्रतिभाशाली नई अभिनेत्री व लेखिका। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ड्रामा और साहित्य की थी। फाइनेंस और अर्थशास्त्र की दुनिया सेऔरऔर भी

इस बार हफ्ते की शुरुआत दिवाली से। और, दिवाली पर रात को दीपों की माला सजाने से पहले शाम को होनी है बीएसई व एनएसई में एक घंटे की मुहूर्त ट्रेडिंग शाम 6.15 बजे से शाम 7.15 बजे तक। यह आगाज़ होगा नए सम्वत 2079 का। ब्लॉक डील का सत्र 5.45 बजे से 6 बजे तक चलेगा, जबकि प्री-ओपन सत्र 6 बजे से 6.08 बजे तक आठ मिनट का होगा। आपर जानते ही है कि मुहूर्त ट्रेडिंगऔरऔर भी

अस्सी साल के हो चुके लैरी विलियम्स बार-बार कहते आए हैं कि वे आज जो कुछ भी हैं, वो केवल और केवल वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग की बदौलत। उनका यह भी भरोसा है कि जो कोई भी दिल से ट्रेडिंग सीखना चाहता है, उसे ट्रेडिंग सिखाई जा सकती है। भारत में भी ट्रेडिंग सिखाने के कई नामी-गिरामी संस्थान और व्यक्ति हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि उनकी मंशा व मूल मकसद आम लोगों को ट्रेडिंग सिखाना नहीं,औरऔर भी