आम व खास के खेल में पिट रहा है देश

भारतीय शेयर बाज़ार में पंजीकृत निवेशकों की संख्या 25 करोड़ के पार जा चुकी है। इनमें से अलग-अलग पैन नंबर वाले निवेशकों की संख्या 13.1 करोड़ के आसपास है। इनमें से कम से कम 12 करोड़ निवेशक आम और 1.1 करोड़ निवेशक खास होने चाहिए। जब आम निवेशक आईपीओ या सीधे बाज़ार से शेयर खरीदते हैं तो सामने से ज्यादातर खास निवेशक बेचते हैं। खास निवेशकों में तमाम विदेशी निवेशक होते हैं जो वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी फर्मों से जुड़े हो सकते हैं। वे बहुत सारी घाटे में चल रही स्टार्ट-अप कंपनियों में सस्ते में निवेश करके बैठे रहते हैं और आईपीओ आने या लिस्टिंग होने पर शानदार भावों पर अपनी होल्डिंग बेचकर जबरदस्त मुनाफा कमाते हैं। यह मुनाफा डॉलर में निकालते हैं जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमज़ोर होने लगता है। निर्यात ठहरा पड़ा है तो डॉलर आते नहीं। आयात के लिए ज्यादा डॉलर लगते हैं। इससे देश का भुगतान संतुलन गड़बड़ा जाता है। अगर आम निवेशक खरीदें ही नहीं तो विदेशी निवेशक बेचेंगे किसे? आम निवेशक एसआईपी में धन न लगाएं तो म्यूचुअल फंड भी विदेशी निवेशकों की काउंटर पार्टी नहीं बन पाएंगे। क्या यह देशहित में नहीं होगा? अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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