बाजार में एक उन्माद-सा छाया हुआ है। लोग खरीदने का फैसला कर चुके हैं। बस, वजह की तलाश है। सेंसेक्स साल के पहले छह महीने में 20.21% बढ़ गया, जबकि इस दौरान अमेरिका का बाज़ार 6.1% और जर्मनी का बाज़ार 2.8% ही बढ़ा है। विदेशी निवेशक भारत में 1000 करोड़ डॉलर से ज्यादा झोंक चुके हैं। बीएसई-500 के करीब 100 मिड व स्मॉलकैप स्टॉक्स पिछले छह महीने में दोगुने हो चुके हैं। ऐसे में बढ़ें ज़रा संभलकर…औरऔर भी

ट्रेडिंग एक हुनर है, जो जन्मजात नहीं, बल्कि सीखा जाता है। हरेक कामयाब ट्रेडर को निरपवाद रूप से सीखने के दौर से गुजरना पड़ता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस धंधे में कोई एंट्री-बैरियर नहीं। आपकी पृष्ठभूमि क्या है, उम्र क्या है, अनुभव है कि नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता। कोई भी शख्स अध्ययन, मनन व अभ्यास से कामयाब ट्रेडर बन सकता है, बशर्ते सही सोच और पूरा समर्पण हो। चलिए, बढ़ें सोमवार की ओर…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में गिनती के दो-चार लाख लोग ही होंगे जो लगाकर लंबे समय के लिए भूल जाते हैं और कंपनी के साथ निवेश का खिलना देखते हैं। बाकी तो झट लगाया और कमाया की नीति अपनाते हैं। अभी यही रुख हावी है। मजबूत व सुरक्षित कंपनियों से निकाल कर रिस्की मिड कैप व स्मॉल कैप या कमज़ोर कंपनियों में लगाया और उठाया। मुनाफावसूली की और फिर सुरक्षित स्टॉक्स खरीद लिए। अब हफ्ते का अंतिम ट्रेड…औरऔर भी

हम शेयर बाज़ार को ललचाई नज़रों से देखते हैं। हमें लगता है, वहां खटाखट नोट बनाए जा सकते हैं। लेकिन सोचिए! ये नोट छापता कौन है? रिजर्व बैंक। ज्यादा नोट जब कम स्टॉक्स का पीछा करते हैं तो बाज़ार चढ़ जाता है। इसी तरह के चक्र में अमेरिका में जनवरी 2013 से अब तक S&P-500 सूचकांक 30% बढ़ा है। न कमाया, न बचाया। 4% ब्याज पर कर्ज उठाकर लगाया और शुद्ध 26% बनाया। अब गुरुवार का मर्म…औरऔर भी

यह सच है कि शेयर बाज़ार के 95% ट्रेडर नुकसान उठाते हैं। लेकिन यह भी सच है कि बाकी 5% जमकर कमाते हैं। दरअसल, ट्रेडिंग में ढेर सारी कमाई की संभावना है। मगर, इसके लिए सही नज़रिए और सही रणनीति की ज़रूरत है। इसके कुछ आम तरीके हैं। लेकिन ट्रेडर जब इन्हें अपने व्यक्तित्व के हिसाब से खास बना लेता है तो कामयाबी उसके कदम चूमने लगती है। इस खास तत्व की दिशा में अभ्यास बुधवार का…औरऔर भी

कुछ दिनों से बाज़ार में गिरावट का जो सिलसिला चला है, उसमें तमाम लोगों के दिमाग में स्वाभाविक-सी शंका उभरी है कि कहीं तेज़ी का मौजूदा दौर निपट तो नहीं गया! अतीत का अनुभव ऐसा नहीं कहता। जनवरी 1991 से नवंबर 2010 के दरमियान तेज़ी के चार दौर तभी टूटे थे, जब सेंसेक्स 24 से ज्यादा पी/ई पर ट्रेड हो रहा था। अभी सेंसेक्स का पी/ई अनुपात 18.44 चल रहा है। घबराहट को समेटकर वार मंगलवार का…औरऔर भी

बाज़ार की सायास नहीं, अनायास गति को पकड़ना आसान है। लेकिन कैसे? कुछ लोग इसे अल्गोरिदम ट्रेडिंग से पकड़ते हैं। यह कुछ नियमों का समुच्चय होती है। जैसे, पांच दिन का सिम्पल मूविंग औसत (एसएएमए) 20 दिन के एसएमए के बराबर या उससे ज्यादा हो तो खरीदो। वहीं पांच दिन का एसएएमए 20 दिन के एसएमए से कम हो तो शॉर्ट करो। ऐसे तमाम नियमों के अनुशासन में ट्रेडर को बंधना पड़ता है। अब सोमवार का सूत्र…औरऔर भी

अल्पकालिक ट्रेडिंग से कमाई और दीर्घकालिक निवेश से दौलत। यही सूत्र लेकर करीब सवा साल पहले हमने यह पेड-सेवा शुरू की थी। दीर्घकालिक निवेश की सेवा, तथास्तु को लेकर हम डंके की चोट पर कह सकते हैं कि हमसे बेहतर कोई नहीं। सूझबूझ की कृपा से इसमें सुझाए कई शेयर साल भर में चार गुना तक बढ़ चुके हैं। ट्रेडिंग में भी हम रिसर्च से आपकी रणनीति विकसित करने में लगे हैं। करें अब शुक्रवार का प्रस्थान…औरऔर भी

बाज़ार में मूलतः दो तरह की गतियां होती हैं। पहली, जिनके पीछे कोई न कोई घटनाक्रम, कोई खबर होती है। इनको पकड़ना आसान लगता है। लेकिन है बहुत कठिन। फिर खबर हमारे पास पहुंचे, इससे पहले ऊंची पहुंच वाले उसे पकड़कर बाज़ार में खेल कर चुके होते हैं। दूसरी गति अनायास होती है। उसके पीछे कोई प्रत्यक्ष वजह नहीं होती। कमाल की बात है कि अनायास होनेवाली इस गति को पकड़ना आसान है। अब आज का व्यवहार…औरऔर भी

उन्नत बाज़ार में एक-एक हरकत को पकड़ने की व्यवस्था होती है। जो अनजान हैं, वे हवा में तीर चलाते हैं। जो जानते हैं, वे पक्की गणना के आधार पर फैसला करते हैं। जैसे, अपने यहां एक सूचकांक हैं इंडिया वीआईएक्स। यह निफ्टी के आउट ऑफ द मनी (ओटीएम) ऑप्शन के भाव पर आधारित होता है। इसे डर का सूचकांक माना जाता है। यह हमेशा निफ्टी से उल्टी दिशा में चलता है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दिशा…औरऔर भी