gold investments

सोने पर हम हिंदुस्तानी आज से नहीं, सदियों से फिदा हैं। पाते ही बौरा जाते हैं। उसकी मादकता हम पर छाई है। जुग-जमाना बदल गया। लेकिन यह उतरने का नाम ही नहीं ले रही। इसीलिए भारत अब भी दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार है। चीन तेजी से बढ़ रहा है, फिर भी नंबर दो पर हैं। भारत में सोने की औसत सालाना खपत 800 टन (8 लाख किलो!!!) है। चीन में यह 600 टन केऔरऔर भी

चौदह-पंद्रह साल पहले तक देश में सोने की तस्करी का बोलबाला था। लेकिन भारत सरकार ने 1997 में सोने के बाजार को खोल दिया तो अब इसका कोई नामलेवा नहीं बचा। सरकार ने निश्चित शर्तों को पूरा करनेवाले बैंकों और एमएमटीसी जैसी सरकारी संस्थाओं को विदेश से सीधे सोना आयात करने की इजाजत दे रखी है। इस समय कुल 31 बैंक सोना आयात कर सकते हैं। वे इन्हें सिक्कों या छड़ों के रूप में बेचते हैं। शुद्धताऔरऔर भी

बाजार के हालात सचमुच खराब हों या न हों, लेकिन भाई लोगों ने अफवाहों का चक्रवात चलाकर पूरे माहौल को बहुत भयावह बना दिया है। वे बता रहे हैं कि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 3 अक्टूबर 2008 को क्या आंकड़े पेश किए थे और अब उसी ने 3 अक्टूबर 2011 को क्या आंकड़े पेश किए हैं। संयोग से दोनों आंकड़े कमोबेश एक जैसे हैं और लेहमान संकट के समय आए ध्वंस की याद दिला रहे हैं। एकऔरऔर भी

यूरो ज़ोन में चल रहे संकट, खासकर ग्रीस सरकार द्वारा ऋण लौटाने में चूक के घहराते खतरे के चलते दुनिया के निवेशक कैश समेटने के चक्कर में पड़ गए है। वे कमोडिटी बाजार से खटाखट निकल रहे हैं। इसी का असर है कि सोना सोमवार को मिलाकर लगातार तीन दिन ऐसा गिरा है जितना वो पिछले 28 सालों में कभी नहीं गिरा था। बीते तीन दिनों में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुकाऔरऔर भी

थाईलैंड का शेयर बाजार 8 फीसदी लुढ़क गया। यह दिखाता है कि एशिया में किस कदर घबराहट फैली हुई है। लेकिन भारत में कमजोर रोलओवर के कारण एक बार फिर थोड़ा सुधार होता दिखा। इस बीच वायदा कारोबार में चांदी गिरकर 47,000 रुपए प्रति किलो तक जा पहुंची जो हमारे 49,000 रुपए के अनुमान से भी नीचे है। लेकिन कैश बाजार में 3000 रुपए का प्रीमियम है जिससे हाजिर चांदी 50,000 रुपए के भाव में मिल रहीऔरऔर भी

बीते हफ्ते बाजार, बीएसई सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूट गया। हालांकि हमारा मानना है कि ऐसा होना लाजिमी नहीं था। यह कुछ फंडों द्वारा घबराहट में निकलने के लिए की गई बिकवाली का नतीजा था। वैसे भी इन फंडों मे हफ्ते भर पहले ही घोषत कर दिया था कि उन्हें अपनी कुछ स्कीमों को समेटना है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने वही किया, जिसकी उम्मीद थी। लेकिन उसके इस संकेत ने अमेरिकी बाजारों परऔरऔर भी

पैसे का कोई पेड़ नहीं लगता कि गए और तोड़कर आ गए। यह किसी भी दौर के व्यापकतम सामाजिक अंतर्संबंधों में व्याप्त विनियम मूल्य का मूर्त स्वरूप है। यह सोमनाथ के ऐतिहासिक मंदिर में शिव की मूर्ति की तरह हवा में लटका हुआ दिख सकता है। लेकिन इसका पोर-पोर किसी न किसी ने दांतों से दबा रखा है। अंग्रेजी में कहावत है कि कहीं कोई फ्री लंच नहीं होता। इसलिए शेयर बाजार को पैसा बनाने का आसानऔरऔर भी

इक्विटी शेयर एकमात्र आस्ति है जिसका मूल्य मूलतः कंपनी द्वारा निरंतर बनाए जाते मूल्य को दर्शाते हुए बढ़ता जाता है। बाकी दूसरी आस्तियां या माध्यम या तो शेयर बाजार से ही कमाई करते हैं या ताश के पत्तों की तरह नोट को इस हाथ से उस हाथ तक पहुंचाते रहते हैं। इक्विटी पूंजी कमाती है तो शेयर का भाव बढ़ता है। इसी अनुपात को दर्शाता है मूल्य/अर्जन या पी/ई अनुपात। लेकिन जहां अर्जन शून्य है, वहां मूल्यऔरऔर भी

नौकरियां बढ़ाने के लिए ओबामा का 447 अरब डॉलर का पैकेज दुनिया के बाजारों में चहक नहीं ला सका क्योंकि समयसिद्ध नियम है कि जब भी कोई अच्छी खबर आती है, निवेशक हमेशा बेचते हैं। यह भी कि यह पैकेज रातोंरात असर नहीं दिखा सकता। लेकिन इसने इतना तो साबित कर दिया कि व्हाइट हाउस मानता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है। इन हालात में दोतरफा बिकवाली होनी ही थी। जिन्होंने सुधार की उम्मीदऔरऔर भी

अमेरिका में पिछले तीन दिनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इससे भारतीय बाजारों में लगातार बढ़त जारी है और वो खुद को जमाने में लग गया है। उम्मीद के अनुरूप निफ्टी 5120 से 5200 की तरफ बढ़ता जा रहा है। वहां पहुंचने के बाद ही हम समीक्षा करेंगे कि आगे की दशा-दिशा और हमारी रणनीति क्या होगी। फिलहाल आज यह ऊपर में 5113.70 तक जा चुका है। सेंसेक्स भी 16,989.86 तक जाने के बाद लौटाऔरऔर भी