बाज़ार खुद बोलता, खोलता है अपने राज़
शेयर बाज़ार ट्रेडिंग के हर दिन, हर पल बराबर बोलता है, बात करता है। क्या आप उसे सुनते हैं या सुन पाते हैं? अगर नहीं तो दोषी आप हैं, कोई दूसरा नहीं। हां, बाज़ार साफ-साफ खुलकर नहीं बोलता। लेकिन वो हिन्ट ज़रूर देता है, संकेतों की भाषा में बात करता है। फिर भी वो इतने निशान छोड़ जाता है कि आप उसके पीछे-पीछे चलकर उसकी थाह ले सकते हैं, सफलता की मंज़िल तक पहुंच सकते हैं। जिसऔरऔर भी
भावनाएं संभालें, रिस्क बने भीगी बिल्ली!
कस्तूरी कुंडली बसे, मृग ढूंढय वन मांहि। यही हाल ट्रेडिंग में कामयाबी का है। शेयर बाज़ारों से कमाने का सूत्र पकड़ने के लिए लाखों लोग टिप्स के चक्कर में कहां-कहां नहीं फिरते। टीवी चैनल देखते हैं। ऑनलाइन गुरुओं की सलाह, वॉट्स-ऐप्प ग्रुप्स की सदस्यता और ट्रेडिंग टिप्स पर महीनों के हज़ारों लुटा देते हैं। फिर भी ठन-ठन गोपाल। इसलिए, क्योंकि ट्रेडिंग से कमाई का सूत्र कहीं बाहर नहीं, बल्कि खुद अपने पास है और वो है रिस्कऔरऔर भी
सफल ट्रेडिंग के मंत्र मिलें बुद्ध की राह!
अगर आप शेयर बाज़ार में अच्छी तरह ट्रेड करना चाहते हैं तो आपको मानव मन को अच्छी तरह समझना पड़ेगा। आखिर बाज़ार में लोग ही तो हैं जो आशा-निराशा और लालच व भय जैसी तमाम मानवीय दुर्बलताओं के पुतले हैं। ये दुर्बलताएं ही किसी ट्रेडर के लिए अच्छे शिकार का जानदार मौका पेश करती हैं। निवेश व ट्रेडिंग के मनोविज्ञान पर यूं तो तमाम किताबें लिखी गई हैं। लेकिन उनके चक्कर में पड़ने के बजाय यही पर्याप्तऔरऔर भी
ट्रेडिंग धंधा शांति का, हड़बड़ी का नहीं!
धन देशी-विदेशी हो या काला सफेद, उसका प्रवाह ही शेयरों के भाव तय करता है। इस प्रवाह की वजह कुछ हो सकती है, कोई अच्छी खबर, भावी संभावना या ऑपरेटरों का मैन्यूपुलेशन। रिटेल ट्रेडर को इसका पता तो ज़रूर होना चाहिए। लेकिन यह उसकी ट्रेडिंग रणनीति का हिस्सा नहीं हो सकता, क्योंकि उसके पास यह जानकारी तभी आती है जब बाज़ार और शेयरों के भाव इसे सोख चुके हैं। इसलिए उसे मानकर चलना चाहिए कि स्टॉक ट्रेडिंगऔरऔर भी






