बंद है मुठ्ठी तो लाख की, खुल गई तो फिर खाक की। उंगली पर जब तक काली स्याही का निशान न लगे, तब तक सरकार में बैठी और उससे बाहर की पार्टियां उसकी कीमत लगा रही हैं। एक बार निशान लग गया, फिर पांच साल तक कौन पूछनेवाला! अभी गिनने को है कि 90 करोड़ मतदाता, जिसमें से 50 करोड़ युवा मतदाता और उसमें से भी 15 करोड़ ऐसे जिन्होंने पिछले पांच सालों में मतदाता बनने काऔरऔर भी

देश के ग्रामीण अंचलों में सूद पर सूद लेने का महाजनी चलन अब भी जारी है। कई जगह तो इस काम में कांग्रेस और बीजेपी जैसी स्थापित पार्टियों के सांसद व विधायक तक लगे हुए हैं। लेकिन शहरी इलाकों में बैंक भी इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। वे इसके लिए सूद पर सूद नहीं, चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के अंतर का फायदा उठाकर ग्राहकों की जेब ढीली कर रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहलेऔरऔर भी

ऐसा मत समझिएगा कि खाद्य सुरक्षा बिल पास होने के बाद हम अंगुली पकड़ने के बाद पहुंचा पकड़ने लगे हैं। ये खाद्य सुरक्षा से भी ज्यादा वाजिब सवाल और मांग है जो खैरात नहीं है। खाद्य बिल भले ही हमे अहसास कराए कि सरकार हम पर अहसान कर रही है, बिना इस अहसास के साथ कि आज़ादी के 66 साल जिसमे 55 साल कांग्रेस का शासन था, कांग्रेस को आज भी लगता है कि 84 प्रतिशत नागरिकोंऔरऔर भी

अपने यहां 20,000 रुपए की सीमा बड़ी चमत्कारिक है। उसे छूते ही कालाधन सफेद हो जाता है। अभी तक राजनीतिक पार्टियां चंदे की ज्यादातर रकम को इससे कम बताकर काले को सफेद करती रही हैं। अब सहाराश्री ने भी यही रास्ता अपना लिया है। सहारा समूह की दो कंपनियों की तरफ से जुटाए गए 24,000 करोड़ रुपए को लौटाने के बारे में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा ने अविश्वास जताया तो सहाराऔरऔर भी

देश की राजनीति में सेवा भाव कब का खत्म हो चुका है। वो विशुद्ध रूप से धंधा बन चुकी है, वह भी जनधन की लूट का। इसे एक बार फिर साबित किया है गुजरात विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों ने। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की तरफ से सजाए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य की नई विधानसभा में 99 विधायक ऐसे हैं जो 2007 में भी विधायक थे। इनकी औसत संपत्ति बीते पांच सालों में 2.20 करोड़औरऔर भी

गुजरात में कुल मतदाताओं की संख्या 3.78 करोड़ है। वहां अकेले गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन या अमूल के नाम से लोकप्रिय सहकारी संस्था से जुड़े दुग्ध उत्पादक सदस्यों की संख्या 31.8 लाख है। ये 8.41 फीसदी मतदाता राज्य के 24 जिलों के 16,117 गांवों में फैले हैं। बीते साल 2011-12 में अमूल का सालाना कारोबार 11,668 करोड़ रुपए रहा है। इतनी भौगोलिक पहुंच और आर्थिक ताकत के बावजूद अमूल का कोई संगठित राजनीतिक प्रभाव नहीं है।औरऔर भी

इस महीने की शुरुआत से इंडिया बुल्स समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में बढ़त का रुख अब डीएलएफ की राह पकड़ सकता है क्योंकि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नेता अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को हुई प्रेस क्रांफेंस में सोनिया गांधी परिवार के भ्रष्टाचार के सिलसिले में इंडिया बुल्स का भी नाम ले लिया। उन्होंने तमाम टीवी चैनलों से यह बात जरूर टिकर के रूप में चलाने का आग्रह किया और कहा कि वे इस बारे मेंऔरऔर भी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के खत्म होते ही टीम अण्णा ने कांग्रेस के खिलाफ फिर आक्रामक रुख अपना लिया है। टीम के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस से मांग की है कि वह चुनावी खर्चों का ब्यौरा सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस साफ करे कि हेलिकॉप्टरों और चुनावी रैलियों पर कितना ख़र्च हुआ है और यह जानकारी कांग्रेस अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए। असल में कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह नेऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाने की याचिका पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दी। यह याचिका जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी। स्वामी ने कोर्ट के इस फैसले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उनके पास 2008 में वित्त मंत्री रहे चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुख्ता सबूत हैं और वे ट्रायल कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। लेकिन फिलहालऔरऔर भी

प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि एनडीए शासन के दौरान विपक्ष में रहते यही पार्टी खुदरा व्यापार में एफडीआई को राष्ट्र-विरोधी बताकर उसका विरोध करती थी। उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्य सचेतक प्रियरंजन दास मुंशी ने 2002 में संसद के शीतकालीन सत्र मेंऔरऔर भी