केजरीवाल का तीर अब इंडिया बुल्स पर, दस जनपथ से रिश्तों का इशारा

इस महीने की शुरुआत से इंडिया बुल्स समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में बढ़त का रुख अब डीएलएफ की राह पकड़ सकता है क्योंकि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नेता अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को हुई प्रेस क्रांफेंस में सोनिया गांधी परिवार के भ्रष्टाचार के सिलसिले में इंडिया बुल्स का भी नाम ले लिया। उन्होंने तमाम टीवी चैनलों से यह बात जरूर टिकर के रूप में चलाने का आग्रह किया और कहा कि वे इस बारे में तथ्यों को खोजबीन कर उजागर करें। हालांकि, न तो किसी चैनल और न ही मीडिया के किसी अन्य हिस्से ने केजरीवाल के इस आग्रह पर गौर किया है। कारण, सीधे दस जनपथ से ताल्लुक रखनेवाले किसी औद्योगिक समूह से पंगा लेने की हिम्मत किसी में नहीं है।

शेयर बाजार में सक्रिय तमाम लोग जानते हैं कि इंडिया बुल्स के तीनों युवा प्रवर्तक – समीर गहलौत, सौरभ मित्तल और राजीव रत्तन कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के काफी करीब है और इंडिया बुल्स समूह की तमाम कंपनियों में सोनिया गांधी परिवार का धन घुमा-फिराकर लगाया गया है। लेकिन ये सारा निवेश बेनामी है जिसे गहरी छानबीन के बाद ही उजागर किया जा सकता है और यह छानबीन सरकारी सहयोग के बिना की नहीं जा सकती। हां, प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी चाहे तो ऐसा कर सकता है। लेकिन ‘जियो और जीने दो’ के अघोषित समझौते के तहत कांग्रेस और बीजेपी में रजामंदी हो चुकी है कि एक-दूसरे के नेताओं के परिवारों पर वे कोई हमला नहीं करेंगे। यह अलग बात है कि केजरीवाल ने ऐसी किरकिरी कर दी है कि बीजेपी को यह समझौता तोड़ना पड़ सकता है। वैसे, बड़े मजेदार बात यह है कि कल तक कांग्रेस केजरीवाल को बीजेपी का एजेंट कह रही थी और अब बीजेपी के नेता विजय गोयल ने केजरीवाल को कांग्रेस का एजेंट घोषित कर दिया है।

केजरीवाल ने मंगलवार की प्रेस कांफ्रेंस में हरियाणा के कुछ किसानों को भी पेश किया, जिन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कैसे उनके साथ धोखाघड़ी की है। पहले सरकारी नोटिस जारी कर किसानों से 12 लाख रुपए प्रति एकड़ के भाव से जमीन खरीदने का आदेश जारी किया। इस बीच डीएलएफ के लोग किसानों को 20 लाख रुपए प्रति एकड़ की पेशकश करने लगे। किसान दुविधा में थे। इस बीच सरकार ने ऐसा माहौल बनाया कि उन्हें जमीन तो बेचनी ही पड़ेगी। इस दबाव में किसानों को डीएलएफ को जमीन बेचना ज्यादा फायदे का सौदा लगा। लेकिन जब किसानों ने अपनी जमीन डीएलएफ को बेच दी, तब सरकार ने जमीन खरीदने का आदेश ही रद्द कर दिया। घेरकर किसी को फंसाने की ऐसी जघन्य ठगी हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने की है।

केजरीवाल ने बड़े तफ्सील से दस्तावेजी सबूतों के साथ बताया कि कैसे सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को फायदा पहुंचाकर डीएलएल ने हरियाणा सरकार ने अपना काम कराया है। अस्तपाल की जमीन एसईजेड के लिए हासिल कर ली। हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम की भी जमीन काफी सस्ते में हथिया ली। अभी हाल में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी एक फैसले में डीएलएफ के साथ हरियाणा सरकार की दुरभिसंधि या नेक्सस की बात कही है।

खैर, अरविंद केजरीवाल ने इंडियाबुल्स के साथ ही एक और कंपनी का नाम लेकर नया पटाखा छोड़ दिया है। दूसरी कंपनी का तो नाम ठीक से सुनाई नहीं पड़ा। लेकिन इंडियाबुल्स का नाम ही अपने में चौंकानेवाला है। अगस्त महीने में कनाडा की रिसर्च फर्म वेरिटास की नकारात्मक रिपोर्ट के सदमे से उबरी इंडिया बुल्स समूह की चार लिस्टेड कंपनियों पर अब नई तलवार लटक गई है। पुख्ता सबूतों के साथ दस जनपथ से समूह के संबंधों का खुलासा हो गया तो इन कंपनियों के शेयर बढ़ने के बजाय तेज झटके का शिकार हो सकते हैं। वैसे भी, समूह की प्रमुख कंपनी इंडिया बुल्स फाइनेंस की शेयरधारिता पर नजर दौड़ाने से काफी गड़बड़झाला नजर आता है। तीनों प्रमुख प्रवर्तकों के अलावा न जाने किस-किस नाम की प्रा. लिमिटेड कंपनियां उसके प्रवर्तकों में शामिल हैं।

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