दुनिया में इस समय 500 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर हैं, जबकि इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 180 करोड़ से ज्यादा है। इंटरनेशनल टेलिकम्युनिकेशंस यूनियन (आईटीयू) का आकलन है कि 2015 तक दुनिया की आधी आबादी तक ब्रॉडबैंड की पहुंच होगी। चीन में अभी 36.40 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं, जबकि भारत में इनकी संख्या केवल 90 लाख है। इंटरनेट भाषाओं के बंधन भी तोड़ रहा है। 1996 में इंटरनेट इस्तेमाल करनेवाले 80 फीसदी लोग अंग्रेजी भाषी थे। 2007 तक यहऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि उनका देश अपना प्रतिस्पर्धी स्थान खो रहा है और भविष्य की नौकरियां भारत जैसे देशों के युवाओं के हाथ में होंगी, जहां शिक्षा क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के लोवा शबर में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में कहा, ‘‘आप देखिए चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश शिक्षा प्रणाली और बुनियादी ढांचे में जमकर निवेश कर रहे हैं। कहां हम अव्वल होते थे, मसलन कॉलेजऔरऔर भी

चीन और भारत के बीच अभी तक टेलिकॉम के तार समुद्र में बिछी केबलों के जरिए जुड़े हैं। लेकिन भूकंप वगैरह के चलते इनके नष्ट हो जाने का खतरा है। इसलिए दोनों देशों को जमीन के भीतर केबल से जोड़ने की योजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इस विशाल परियोजना के लिए चीन की सबसे बड़ी फिक्स्ड लाइन टेलिफोन कंपनी चाइना टेलिकॉम भारत के तमाम टेलिकॉम ऑपरेटरों से बातचीत कर रही है। इस प्रस्तावित केबलऔरऔर भी

चीन में ब्लॉगरों की अनुमानित संख्या सात करोड़ पर पहुंच गई है। चीन की आबादी अभी करीब 135 करोड़ है। इसमें से 20 फीसदी 14 साल से नीचे के बच्चे हैं। इस तरह 15 साल या इससे ऊपर के चीनियों की संख्या 108 करोड़ है। इसका मतलब हुआ कि चीन में समझदार हो चुके हर पंद्रह लोगों में से एक शख्स ब्लॉगिंग कर रहा है। असल में चीन के पारंपरिक मीडिया में केवल रसूख वाले लोगों केऔरऔर भी

भारत में 577 विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईज़ेड) को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 114 में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इनमें से 90 फीसदी का आकार 3 वर्ग किलोमीटर से कम है। दूसरी तरफ चीन में केवल पांच एसईज़ेड हैं। इसमें से अकेले शेनझेन एसईज़ेड ही 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत ने 1965 में ही एशिया का पहला निर्यात संवर्धन ज़ोन कांडला (गुजरात) में बना लिया था। चीन ने हमसे सीखकर 1980 मेंऔरऔर भी

चीन अब जापान को पछाड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और विश्व बैंक, गोल्डमैन सैक्स व दूसरी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के आकलन पर यकीन करें तो वह 2025 तक अमेरिका को नंबर-1 के पायदान से हटा देगा। इससे पहले चीन साल 2005 में ब्रिटेन व फ्रांस और 2007 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बना था। चीन इस समय दुनिया के समृद्ध व उभरते देशों के समूह जी-20औरऔर भी

ऑनलाइन समुदाय देश और राज्य की पारंपरिक सीमाएं तोड़ते जा रहे हैं। गूगल ‘गणराज्य’ के बाद अब सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक बहुत तेजी उभर रही है। इसे इस्तेमाल करनेवालों की संख्या 50 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह संख्या ब्राजील (19.5 करोड़), इंडोनेशिया (23.2 करोड़) और अमेरिका (31 करोड़) की आबादी से ज्यादा है। अगर फेसबुक को आभासी देश मान लें तो यह दुनिया में चीन व भारत के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनऔरऔर भी

चीन में दुनिया का सबसे बड़ा टेलीफोन नेटवर्क है। यहां कुल फोनधारकों की संख्या 110 करोड़ के पार चली गई है। इनमें से 80 करोड़ मोबाइल फोनधारक हैं, जबकि बाकी 30 करोड़ फिक्स्ड लाइन टेलिफोन हैं। चीन में 3जी सेवाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। वहां इस साल जून के अंत तक 3जी मोबाइल फोनधारकों की संख्या 40% बढ़कर 2.52 करोड़ हो गई है। इस साल चीन 3जी सेवाओं पर 12,000 करोड़ युआन (17.73औरऔर भी

दूरसंचार मंत्री ए राजा ने शुक्रवार को भरोसा दिलाया कि दूरसंचार उपकरणों के आयात का मसला कुछ सप्ताह में सुलझ जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी इस बारे में गृह मंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात हुई है जिसमें उपकरण आयात, विशेषकर चीन से आयात पर चर्चा हुई। राजा ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा – हमें उम्मीद है कि गृह मंत्रालय के साथ यह मसला कुछ सप्ताह मेंऔरऔर भी

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के मूल में होने के बावूजद अमेरिका के बैंक दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में जगह बनाए हुए हैं। बैंकर पत्रिका की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक टियर-1 पूंजी के मामले में दुनिया के दस बड़े बैंकों में अमेरिका के चार बैंक शामिल हैं।  इनमें टॉप पर है बैंक ऑफ अमेरिका, जिसने वित्तीय संकट के दौरान मेरिल लिंच को खरीदा था। इससे पहले नंबर-1 पर रहनेवाला अमेरिकी बैंक जेपी मॉरगन चेज अबऔरऔर भी