देश में बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के दिसंबर तिमाही के नतीजों का अंदाज लगाने में विश्लेषकों व बाजार ने कोई गच्चा नहीं खाया। बल्कि, शुद्ध लाभ उनके अनुमान से भी बदतर रहा है। अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान था कि कंपनी का शुद्ध लाभ 4500 से 4800 करोड़ रुपए रहेगा। लेकिन हकीकत में कंपनी का शुद्ध लाभ 4440 करोड़ रुपए रहा है। यह साल भर पहले की दिसंबर तिमाही में हुएऔरऔर भी

इंड-स्विफ्ट लिमिटेड और इंड-स्विफ्ट लैबोरेटरीज दोनों ही एक समूह से वास्ता रखती हैं। चंडीगढ़ इनका मुख्यालय है। दवाएं बनाती हैं। लेकिन अलग-अलग लिस्टेड हैं। इंड-स्विफ्ट 1986 में बनी तो इंड-स्विफ्ट लैब्स 1995 में। धंधा दोनों का दुरुस्त चल रहा है। इंड-स्विफ्ट लिमिटेड ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में 894.16 करोड़ रुपए की आय पर 43.45 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। वहीं इंड-स्विफ्ट लैब्स ने इस दौरान 1031.21 करोड़ रुपए की आय पर 87.62 करोड़ रुपएऔरऔर भी

भयंकर आंधी खर-पतवार से लेकर बड़े-बड़े पेड़ों तक को उड़ा ले जाती है। लेकिन वह उस सरपत का कुछ नहीं कर पाती जो नदी के किनारे गहरे धंसे मस्त भाव से लहराते रहते हैं। शेयर बाजार की बात करें तो जब दुनिया में हर तरफ संकट दिख रहा हो, तब उन कंपनियों का रुख करना चाहिए जो घरेलू खपत पर फलती-फूलती हों। जब सारे स्टॉक्स डूब रहे हों, तब उन स्टॉक्स का रुख करना चाहिए जो हताशाऔरऔर भी

भले ही दो दिन बाद शुक्रवार को रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी में बैठा हो, लेकिन खुद उसका मानना है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में कंपनियों का पूंजी निवेश उम्मीद से कम रह सकता है। इसकी खास वजह लागत सामग्रियों के महंगा होने के साथ-साथ पूंजी का महंगा होना या दूसरे शब्दों में ब्याज दरों का ज्यादा होना है। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को जारी सितंबर महीने की अपनी बुलेटिन में साफ-साफ कहा हैऔरऔर भी