नए साल में हम सभी देशवासियों को अर्थव्यवस्था पर और भी ज्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि जल्दी ही बहुत सारे ऑप्टिक्स के साथ अनार व फुलझड़ियां छूटनेवाली हैं। कल सरकार की तरफ से पेश पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक मार्च 2025 तक हमारी अर्थव्यवस्था का आकार सतही या नॉमिनल स्तर पर ₹3,24,11,406 करोड़ का हो सकता है जो प्रति डॉलर 85.76 रुपए की मौजूदा विनिमय दर से करीब 3.78 ट्रिलियन डॉलर बनता है। विश्व बैंकऔरऔर भी

इस समय देश की मुख्यधारा कहा जाने वाला मीडिया जो भी दिखाता है, वो या सनसनी है या तो झूठ और नहीं तो विशुद्ध सरकारी प्रचार। आरटीआई से सूचनाएं मांगो तो उसे राष्ट्रहित व राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला बताकर छिपा लिया जाता है। सोशल मीडिया पर लिखने या यूट्यूब चैनल चलानेवालों के पास बेहद सीमित संसाधन हैं। वे खोजकर कुछ लाते भी हैं तो सरकारी धन पर पल रही ट्रोल लॉबी उसे झूठ-झूठ का हल्ला मचाकर दबानेऔरऔर भी

बड़े खतरनाक दौर से गुजर रहा है भारत और हम भारत के लोग। ऐसे में यकीन उसी पर करें, जिसे साफ-साफ देख सकें, छूकर पुष्टि कर सकें। अनदेखे के चक्कर में पड़े, tangible को दरकिनार करके intangible के झांसे में आए तो कहीं के नहीं रहेंगे। न बचेगा देश, न हमारा भविष्य। किसी ज़माने में ठगों का गिरोह गाय के बछड़े को कुत्ता बताकर लूट लेता था। फिर पटना रेलवे स्टेशन को निजी संपत्ति बताकर ठग बैंकोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार धन के लिए मारा-मारी कर रहे सतत युद्ध का मैदान है। इसमें घुसते वक्त हमें छोटे सामान्य रिटेल निवेशक व ट्रेडर होने की अपनी हैसियत याद रखनी चाहिए। याद रखना चाहिए कि इसमें हम जैसे कम पूंजी व पहुंच वाले लोग ही नहीं, एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) या बेहद धनवान लोग और देशी-विदेशी सस्थाएं, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड व बैंक जैसे दिग्गज तक दांव लगाते हैं। ट्रेडिंग में तो हम यकीनन ऐसे बड़ों की राहऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के बिजनेस की लागत है स्टॉप-लॉस। यह छोटे-बड़े हर ट्रेडर को उठानी ही होती है। थोक के भाव का मतलब है उस भाव पर खरीदना जिस पर अभी तक बैंक, संस्थाएं व बड़े निवेशक खरीदते रहे हैं और आगे खरीद सकते हैं। रिटेल के भाव का मतलब है उस भाव पर बेचना जिस पर बैंक, संस्थाएं व बड़े निवेशक अभी तक बेचते रहे हैं या बेच सकते हैं। भावों के इन स्तरों काऔरऔर भी

अपने यहां जो जितना कमाता है, उस पर और ज्यादा कमाने की हवस चढ़ी है। दुनिया भर में मॉल कम से कम डेढ़ दिन बंद रहते हैं, जबकि अपने यहां सातों दिन खुले रहते हैं। कल साल के पहले दिन अमेरिका, यूरोप व ऑस्ट्रेलिया से लेकर सिंगापुर, हांगकांग, चीन, जापान व कोरिया जैसे एशिया के तमाम शेयर बाज़ार बंद रहे। लेकिन अपने यहां एनएसई व बीएसई खुले रहे क्योंकि जितने भी निवेशक या ट्रेडर आ जाएं, कुछऔरऔर भी

यह हमारे ही दौर में होना था। एक तरफ शेयर बाज़ार में अल्गो ट्रेडिंग के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई की धमक। दूसरी तरफ ट्रेडिंग व निवेश सिखानेवाला कोई शख्स कह रहा है, “कर्ता कृष्ण और दाता राम हैं। हम तो निमित्र मात्र हैं।” यह कैसा विरोधाभास है? लेकिन यह विचित्र, किंतु सत्य है। ऊपर से भोले-भाले व लालच में फंसे लोगों के लिए डिफाइन येज और नॉयज़लेस चार्ट के प्वॉइंट्स एंड फिगर्स जैसे धांसू जुमले। इनकेऔरऔर भी

आज के दौर में शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग से कमाने की सोचनेवालों को बेहद सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि झूठ, छद्म व फ्रॉड का दौर चल रहा है, जिसका सच अमृतकाल का नाम देकर छिपाने का अभियान चलाया जा रहा है। जब गुजरात का किरन पटेल कश्मीर जैसे संदेशनशील राज्य में महीनों तक सरकार को चरका पढ़ाता रहा, पीएमओ से ही गहरे ताल्लुकात रखने का दावा करनेवाले संजय शेरपुरिया को करोड़ों की ठगी करनेऔरऔर भी

आजकल सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक और यू-ट्यूब पर शेयर बाज़ार से कमाने के गुर सिखानेवाले संतन की भीड़ लगी हुई है। चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसैं तिलक देत रघुवीर – जैसा माहौल है। गजब श्रद्धा और विश्वास नज़र आता है। ऐसे संतगण तमाम चार्ट और फॉर्मूले चस्पा कर बताते रहते हैं कि उनके पास ऐसी विद्या है जिससे शेयरों में ट्रेडिंग से लेकर निवेश तक से जमकर कमाई की जा सकतीऔरऔर भी

जब हर तरफ सोशल मीडिया पर निवेश के गुर सिखानेवाले घंटालों की बाढ़ आई हो, तब हमेशा एक बात याद रखनी चाहिए कि अपना अनुभव ही हमारा सबसे बड़ा शिक्षक या गुरु होता है। यही प्रज्ञा या प्रत्यक्ष ज्ञान है। हर साल हमें कुछ न कुछ प्रज्ञा देकर जाता है। वित्तीय बाज़ार पर आई हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में म्यूचुअल फंडों की एसआईपी स्कीम निवेशकों की पहली पसंद रही है। इस दौरान 62%औरऔर भी