शेयर बाज़ार के डेरिवेटिव सेगमेंट का निर्मम सच यही है कि इसमें सबसे ज्यादा कारोबार निफ्टी ऑप्शंस में होता है जिसमें ज्यादातर आम ट्रेडर आप्शंस बेचते नहीं, खरीदते हैं। लेकिन दो-तिहाई से लेकर तीन-चौथाई से ज्यादा मामलों (मोटे तौर पर दस में से आठ) में आप्शंस खरीदने नहीं, बल्कि बेचने वालों को फायदा होता है। कमाल की बात यह है कि यह किसी साजिश या समझ के चलते नहीं, बल्कि ऑप्शंस के भाव निर्धारण के तरीके मेंऔरऔर भी

ऑप्शंस के भाव कभी शेयरों की तरह नहीं चलते कि मांग सप्लाई से ज्यादा हुई तो बढ़ गए और मांग सप्लाई से कम हुई तो घट गए। ये तो महज छाया हैं कैश-सेगमेंट में शेयरों की चाल की। वह भी महीने भर या सप्ताह का चक्र है। जिस तरह दिख रहे चंद्रमा का आकार अमावस्या और पूर्णिमा के बीच बदलता रहता है, कुछ-कुछ वैसी ही गति ऑप्शंस भावों की होती है। हमें कैश-सेगमेंट में शेयरों और डेरिवेटिव्सऔरऔर भी

ऑप्शंस में कॉल व पुट से आगे बढ़ते हुए हम यहां तक पहुंच गए हैं कि दोनों ही तरह के ऑप्शंस की तीन श्रेणियां होती हैं – इन द मनी (आईटीएम), ऐट द मनी (एटीएम) और आउट ऑफ द मनी (ओटीएम)। इनमें से ऑप्शन धारक को तभी फायदा होता है जब उसका खरीदा ऑप्शन इन द मनी या आईटीएम होता है। बाकी दोनों ही स्थितियों – एटीएम व ओटीएम में उसने ऑप्शंस खरीदते वक्त जो दामं याऔरऔर भी

डेरिवेटिव्स में ऑप्शंस का सौदा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसमें भी सबसे ज्यादा चलनेवाले ऑप्शंस दो तरह के होते हैं। एक कॉल ऑप्शंस और दो पुट ऑप्शन। कॉल ऑप्शन उसके धारक को नियत तिथि पर किसी आस्ति को पूर्व निधारित भाव या स्ट्राइक प्राइस पर खरीदने का हक देता है, लेकिन खरीदना उसकी बाध्यता नहीं होती। वहीं, पुट ऑप्शन उसके धारक को नियत तिथि पर किसी आस्ति को पूर्व निधारित भाव या स्ट्राइक प्राइस पर बेचने काऔरऔर भी

देश पर लगता है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग का जुनून सवार है। आपको यकीन नहीं आएगा कि वित्त वर्ष 2001-02 से 2012-13 के बीच के ग्यारह सालों में इक्विटी फ्यूचर्स व ऑप्शंस (एफ एंड ओ) में रोज़ का औसत टर्नओवर 71.18 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ता हुआ 420 करोड़ से 1,55,048 करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है। अभी कल, 18 अक्टूबर 2013 को एनएसई के एफ एंड ओ सेगमेंट का टर्नओवर 1,67,558 करोड़ रुपए रहाऔरऔर भी

जो बात एक्सिस बैंक अपने विज्ञापन में खुद को अलग दिखाने के लिए कर रहा है, उसी बात का फैसला देश भर के बैंकिंग ओम्बड्समैन ने अपने सालाना सम्मेलन में सभी बैंकों के लिए कर लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव समेत बैंकों के शीर्ष संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बैंकिंग ओम्बड्समैन सम्मलेन ने तय किया है कि बैंकों को फ्लोटिंग रेट लोन पर कतई कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहींऔरऔर भी

आईडीबीआई बैंक ने दुनिया में पहली बार 24 घंटे सातों दिन की लॉकर सुविधा शुरू की है। बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक आर एम मल्ला ने सोमवार को मुंबई की कफ परेड, कोलाबा शाखा में इसकी शुरुआत करते हुए कहा कि देश की बात छोड़िए, पूरी दुनिया में अभी तक कहीं भी एनी टाइम लॉकर (एटीएल) की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ बैंक जरूर रोजमर्रा के बैंकिंग अवधि से कुछ समय ज्यादा तक लॉकरऔरऔर भी

कई सालों की मशक्कत के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन (एनपीसीआई) ने प्रस्तावित विशिष्ट इंडिया कार्ड को अंतिम रूप दे दिया है जो व्यावसायिक रूप से लांच किए जाने के बाद वीजा व मास्टरकार्ड जैसी तुरंत भुगतान फर्मों की जगह लेगा। एनपीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को बताया कि प्रस्तावित कार्ड का नाम Rupay (रूपे) होगा। कंपनी की बोर्ड बैठक में इसके लोगो को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। उल्लेखनीय हैऔरऔर भी

दुनिया में पहला एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन) 1967 में बारक्लेज बैंक की उत्तरी लंदन शाखा के बाहर लगाया था। इसकी खोज भारत में जन्मे और स्कॉटलैंड के नागरिक जॉन शेफर्ड बैरन ने की थी। वे एक प्रिंटिंग फर्म चलाते थे। 1965 में उनके दिमाग में एटीएम बनाने की बात तब आई, जब उन्हें एक दिन बैंक बंद होने के कारण खाली हाथ बैरंग वापस आना पड़ा था। उस दिन बाथरूम में बैठे-बैठे उन्होंने सोचा कि जब डिस्पेंसरऔरऔर भी