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निफ्टी की दशा-दिशा: 15 अक्टूबर 2026 गुरुवार, सुबह 8.15 बजे शुरुआती रुख↑

पिछला बंद कल का उच्चतम कल का न्यूनतम कल का बंद संभावित दायरा
22721.95 22757.95 22558.95 22622.70 22545-22765

 

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sanvaad

संवाद से ही राष्ट्र

2023-07-09
By: अनिल रघुराज
On: July 9, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

saahsi samaj

साहस से ही परवाह व सेवा

2023-07-08
By: अनिल रघुराज
On: July 8, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

fielding against lies

झूठ के खिलाफ फील्डिंग

2023-07-07
By: अनिल रघुराज
On: July 7, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

jo sabal banaye

नेता वही जो सबल बनाए

2023-07-06
By: अनिल रघुराज
On: July 6, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

invisible or not

किसी न किसी का हाथ

2023-07-04
By: अनिल रघुराज
On: July 4, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

doshi ko chodna nahi

दोषी को छोड़ना नहीं

2023-07-03
By: अनिल रघुराज
On: July 3, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

avsar aur avasaad

अवसर नहीं, अवसाद

2023-07-02
By: अनिल रघुराज
On: July 2, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

man ka niyam

मन का नियम-धर्म

2023-07-01
By: अनिल रघुराज
On: July 1, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

kidhar hai dhyan

किधर है ध्यान

2023-06-30
By: अनिल रघुराज
On: June 30, 2023
In: ऋद्धि-सिद्धि

और भीऔर भी

maryada ki sima

मर्यादाओं की सीमा

2022-10-31
By: अनिल रघुराज
On: October 31, 2022
In: ऋद्धि-सिद्धि

 और भीऔर भी

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निवेश – तथास्तु

  • गिरना खेल है प्यारे चढ़ती ब्याज दर का
    11 Oct 2026

    कमाई कम, खर्च ज्यादा। अंतर को पाटने के लिए अमेरिका उधार लेता है। भारत का बाज़ार हिसाब चुकाता है। अमेरिकी सरकार इस साल मेच्योर हो रहे करीब 10 ट्रिलियन डॉलर के बॉन्डों की रिफाइनेंसिंग कर रही है। इनमें से अधिकांश बॉन्ड कोविड के समय तब जारी किए गए थे, जब ब्याज दर काफी कम थी। फेडरल रिजर्व ब्याज दर की रेंज बढ़ाकर 3.75% से 4.00% कर चुका है। अमेरिकी सरकार ज्यादा ब्याज नहीं देगी तो उसके बॉन्डों […]

October 2026
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क्या आप जानते हैं?

  • हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

    इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर जितने भी 69,963 किस्म के रीढ़वाले या कशेरुकी (vertebrates) जीव-जन्तु हैं, उन्होंने देखने की क्षमता वाली अपनी आंखें एक बैक्टीरिया के जीन से हासिल की है। यह सच अप्रैल 2023 में पीएनएएस (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) की …

अपनों से अपनी बात

  • साल में 41-112%, मिले है सिर्फ यहां!

    भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आगे भी बढ़ेगी। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका लाभ आम आदमी को पूरा नहीं मिलता। अमीर-गरीब की खाईं बढ़ रही है। बाज़ार को आंख मूंदकर गालियां दी जा रही हैं। लेकिन बाज़ार सचेत लोगों के लिए आय और दौलत के सृजन ही नहीं, वितरण का काम भी करता है। हमने तथास्तु सेवा इसीलिए शुरू की है ताकि अर्थव्यवस्था, खासकर कंपनियों के बढ़ने का लाभ निपट गरीबी से ऊपर रहनेवाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। वे जिन्हें बैंक बहुत हुआ तो 9 प्रतिशत देता है, जबकि वास्तविक महंगाई की दर 10 प्रतिशत से ऊपर रहती है। वे भागकर जाते हैं सोने और रीयल एस्टेट में चले जाते हैं तो उनकी बचत लॉक हो जाती है। देश के काम नहीं आती। खुद उनके कितने काम आएगी, यह भी पक्का नहीं। जो पिछले साढ़े चार सालों से अर्थकाम से जुड़े हैं, वे हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से भलीभांति वाकिफ हैं। शुरू में हम भी कच्चे थे तो बाज़ार के उस्तादों के जाल में फंस गए। गलतियां कीं। लेकिन जैसे ही समझ में आया, खटाक से उनसे किनारा कस लिया। करीब सवा साल पहले से नए सिरे से शुरू किया तो मजबूत आधार और गहन रिसर्च के साथ। उसी का नतीजा है कि हमारी सलाहें शानदार-जानदार रिटर्न दे रही हैं। पिछली बार हमने अगस्त 2013 से अगस्त 2014 तक का लेखाजोखा रखा था। अब सितंबर 2013 से सितंबर 2014 की बानगी पेश है। सितंबर 2013 में पांच रविवार थे तो पांच कंपनियां। आप नीचे की सारिणी से देख सकते हैं कि पांच में चार ने अपना (तीन से पांच साल का) लक्ष्य साल भर में ही पूरा कर लिया है, जबकि एक कंपनी 84.57 प्रतिशत रिटर्न के साथ लक्ष्य से ज़रा-सा पीछे है। तारीख कंपनी तब का भाव समय लक्ष्य 30/09/14 का भाव रिटर्न (%) 01/09/13 डॉ. रेड्डीज़ लैब 2292.90 3 साल 2815 3229.60 40.85 08/09/13 एचडीएफसी बैंक 616.20 3 साल 850 872.65 41.62 15/09/13 अतुल ऑटो 173.65 5 साल 260 367.90 111.86 22/09/13 कमिन्स इंडिया 409.25 3 साल 474 671.05 63.97 29/09/13 नवनीत एजुकेशन 53.15 3 साल 110 98.10 84.57   यहां यह भी गौर करने की बात है कि हम आमतौर पर हर महीने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप का संतुलन बनाकर चलते हैं। यह भी बताते हैं कि कहां पर एंट्री करें और आपके पास कुल एक लाख रुपए हों तो उस हफ्ते की कंपनी में कितना लगाना चाहिए, उसके कितने शेयर खरीदने चाहिए। मसलन, सितंबर 2013 में हमने तीन लार्जकैप, एक मिडकैप और एक स्मॉल कैप कंपनी आपके निवेश के लिए पेश की थी। इसमें से लार्ज कैप कंपनियों में डॉ. रेड्डीज़ लैब का शेयर लक्ष्य हासिल कर चुका है और यही नहीं, 24 सितंबर 2014 को 3356.60 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर पकड़ चुका है। एचडीएफसी बैंक भी लक्ष्य हासिल करने के साथ ही 30 सितंबर 2014 को 879.80 रुपए का शिखर हासिल कर चुका है। कमिन्स इंडिया भी लक्ष्य हासिल कर लेने के साथ 4 सितंबर 2014 को 720 रुपए पर 52 हफ्ते का शीर्ष छू चुका है। स्मॉल कैप की श्रेणी वाला स्टॉक अतुल ऑटो साल भर में 111.86 प्रतिशत का रिटर्न देकर लक्ष्य के काफी आगे निकल चुका है। यही नहीं, 12 सितंबर 2014 को वो 446.90 रुपए का शिखर भी चूम चुका है। बाकी बची मिडकैप कंपनी नवनीत एजुकेशन में तीन साल का लक्ष्य 110 रुपए था। उसका शेयर 10 सितंबर 2014 को 104.90 रुपए तक जाने के बाद 30 सितंबर को 2014 को 98.10 रुपए पर था, जो साल का 84.97 रिटर्न दिखाता है। आप ऊपर की सारिणी से देख सकते हैं कि 1 सितंबर 2013 से 30 सितंबर 2014 तक की अवधि में तथास्तु में बताई पांच कंपनियों ने न्यूनतम 40.85 प्रतिशत और अधिकतम 111.86 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसी दौरान एनएसई निफ्टी ने 5550.75 से 7964.80 तक जाकर 43.49 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स ने 18,886.13 से 26,567.99 तक पहुंचकर 40.67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दोस्तों! पुरानी बात फिर दोहरा रहा हूं कि मात्र 200 रुपए में अगर कोई सवा आपको बाज़ार से ज्यादा रिटर्न दिला रही है, वो भी आपको आपकी भाषा में अच्छी तरह कंपनी की जानकारी देकर तो क्या इस सेवा को आपका और आपको इस सेवा का लाभ नहीं मिलना चाहिए। बढ़ रही अर्थव्यवस्था का लाभ उठाइए। यकीन मानिए कि मोदी की सरकार बस एक निमित्त मात्र है। वो रहे या कोई और आए, अगले दस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जबरदस्त प्रगति के साल होने जा रहे हैं। इस दौरान एक साल में दोगुना ही नहीं, दस साल में अपनी बचत से दस गुना दौलत बनाने के मौके बहुत सारे आएंगे। दूसरे आपको बस उल्लू बनाएंगे। केवल हम ही हैं जो पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आपके लिए निवेश के हर रविवार को शानदार मौके लेकर आते रहेंगे। तुलसीदास की चौपाई याद कीजिए – सकल पदारथ है जन मांही, कर्महीन नर पावत नाहीं। आपके हिस्से का कुछ कर्म हम कर दे रहे हैं। बाकी तो आपको ही करना पड़ेगा। इसलिए…. सोचिए। समझिए। फैसला कीजिए। तथास्तु!!!

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ट्रेडिंग – बुद्ध

  • न निवेश, न निर्यात तो बढ़ क्या रहा है!
    15 Oct 2026

    ऊपर-ऊपर चमकते-दमकते जीडीपी के नंबरों के झाग के नीचे भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐसी विसंगतियां पनप रही हैं जो अभी तो नहीं, लेकिन भविष्य में कभी भी देश को विकराल संकट में धकेल सकती है। सारे हो-हल्ले के बावजूद भारत में निजी क्षेत्र का पूंजी निवेश नहीं हो रहा। अर्थव्यवस्था में पूंजी निवेश को दिखाता है सकल स्थाई पूंजी निर्माण (ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन) या जीएफसीएफ। यह वित्त वर्ष 2003-04 से 2007-08 के दौरान जीडीपी का 35.8% हुआ करता था। तब बिजली से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े तमाम उद्योगों में जमकर निवेश हुआ। रिटर्न मिला नहीं तो कंपनियों पर ऋण और बैंकों पर एनपीए या डूबत ऋणों का बोझ बढ़ गया। इसे दोहरी बैलेंस शीट का संकट कहा गया। लेकिन 2016 से 2025 तक कंपनियों और बैंकों की बैलेंस शीट का संकट काफी हद तक खत्म हो गया। बीच में कोरोना महामारी का प्रकोप ज़रूर छाया। लेकिन उसके बाद भी पूंजी निवेश नहीं हो रहा। पिछले पांच सालों में औसत जीएफसीएफ जीडीपी के 30% के आसपास है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में इसे 34.5% दिखाया गया है। लेकिन यह भावी निवेश को लेकर आश्वस्त नहीं करता। आर्थिक विकास का एक और इंजिन निर्यात है। यह 2010 से 2014 तक जीडीपी का औसतन 24.4% हुआ करता था जो वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक 21.8% रहा है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…

जानिए

  • ज़ीरो-सम गेम नहीं है यह
  • ईटीएफ: चलो बाजार खरीद लें
  • मायने आईपीओ ग्रेडिंग के
  • जवाब कमोडिटी बाजार के

बूझिए

  • ओपन ऑफर, बायबैक, डीलिस्टिंग
  • इश्यू मूल्य और बुक बिल्डिंग
  • गुत्थी ऋण बाजार की
  • यह कासा बला क्या है?

आज़माइए

  • मोटामोटी दस बातें शेयरों की
  • गोल्ड ईटीएफ एक, दाम अनेक
  • न करें कम एनएवी का लालच
  • फायदे म्यूचुअल फंड निवेश के

क्या आप जानते हैं?

हमारी आंखें बैक्टीरिया के जीन की देन!

इंसान से लेकर हाथी, घोड़ा, गाय-बैल, सांप, छिपकली, मेढक, मगरमच्छ व चिड़ियों तक धरती पर

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