मैंने आपसे कहा था कि मंदड़ियों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और आप खुद देख रहे हैं कि सेटलमेंट की समाप्ति के ठीक पहले तेजड़ियों ने मंदड़ियों को कैसा धर दबोचा है। बाजार के एक बड़े उस्ताद एसबी (शरद बोबदा) के बारे में सुना गया है कि आज उन्होंने सबसे पहले निफ्टी में शॉर्ट सौदे काटे। दूसरों का अभी उनके पीछे चलना बाकी है। 5530 पर प्रतिरोघ का बहुत तगड़ा स्तर था। लेकिन निफ्टी इसे तोड़कर 5552.65औरऔर भी

दुनिया नाम के पीछे भागती है और दुनिया जिसके पीछे भागती है उसके दाम अपने-आप ही बढ़ जाते हैं, उसकी स्टार-वैल्यू बन जाती है। बेहतर एक्टर होने के बावजूद मनोज बाजपेयी को पान मसाला बेचना पड़ता है और औसत एक्ट्रेस होने के बावजूद प्रियंका चोपड़ा हर तरफ मटकती रहती हैं। आम जीवन का यह सूत्र शेयर बाजार पर भी लागू होता है। लेकिन हमारे बाजार में इसका उल्टा भी चलता है। लोग जिसके पीछे पड़ जाएं, उसेऔरऔर भी

एक तरफ कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य गिरने की भविष्यवाणी हो रही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार आज ही मंत्रियों के समूह की बैठक के बाद डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ा सकती है। ऐसे माहौल में न जाने कौन-सा आशावाद काम कर गया कि करीब 1.90 लाख करोड़ रुपए के वोल्यूम के साथ बाजार आज बल्ले-बल्ले कर उठा। सेंसेक्स 513.19 अंक (2.89 फीसदी) बढ़कर 18,240.68 और निफ्टी 151.25 अंक (2.84 फीसदी) बढ़त लेकर 5471.25 परऔरऔर भी

बाजार अब भी खुद को संभालने की जद्दोजहद में लगा है। सुबह की पस्ती के बाद चीते की तरह बढ़ा। निफ्टी 5330 और सेंसेक्स 17,755 तक जाकर थोड़ा नीचे आया है। इस बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का करीब 3 फीसदी बढ़ जाना थोड़ा सुकून दे रहा है क्योंकि अंततः कंपनी को डी-6 ब्लॉक में कुछ गैस मिल गई है और भारत सरकार की तरफ से सकारात्मक बयान आए हैं। क्या इसके बाद अब आरआईएल में दूसरी बारऔरऔर भी

बाजार पूरे लहरिया अंदाज में चला। सेंसेक्स हल्का-सा गिरा। निफ्टी हल्का-सा बढ़ा। यह फर्क है सेंसेक्स के 30 और निफ्टी के 50 का। इसलिए आवाजें उठ रही हैं कि कम से कम सेंसेक्स का आधार बढ़ा दिया जाए क्योंकि वो बाजार का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। सेंसेक्स में कम से कम 100 कंपनियां तो होनी चाहिए। खैर, फिलहाल बाजार में शोर है कि निफ्टी 4800 की तरफ जा रहा है। जब तक बिकवाली की लहर उतरती नहीं,औरऔर भी

शनिवार को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के नए चेयरमैन प्रकाश चंद्रा ने दिल्ली में बयान दिया कि मॉरीशस भारत के साथ दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएए) में संशोधन पर विचार कर रहा है और दोनों पक्षों में जल्दी ही इसे ठोस रूप देने पर बैठक हो सकती है। रविवार को उनका यह बयान टाइम्स ऑफ इंडिया समेत कई अखबारों में छपा। हालांकि इसमें यह भी जोड़ दिया गया कि भारत अपने यहां लाभ कमानेवाली कंपनियों परऔरऔर भी

सुबह बाजार खुलने पर धीमी गिरावट चल रही थी कि दस बजे के आसपास एक बिजनेस चैनल ने खबर चला दी कि सरकार मॉरीशस से साथ टैक्स-संधि पर पुनर्विचार कर रही है और मॉरीशस से भारत में हुए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगाया जा सकता है। फिर क्या था! बाजार खटाक से 3 फीसदी नीचे गिर गया। खबर आते ही तमाम शेयरों पर हमला शुरू हो गया भले ही उनमें मॉरीशस के जरिए आया धन लगाऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ब्याज दरों को बराबर बढ़ा रहा है, फिर भी मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लग रही। हां, इससे आर्थिक विकास की रफ्तार पर जरूर लगाम लगती दिख रही है। बाजार को यह कतई पसंद नहीं और वो किसी न किसी बहाने लार्सन एंड टुब्रो, इनफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), एसबीआई व मारुति सुजुकी जैसी ऊंची विकास दर वाली कंपनियों को भी लपेटे जा रहा है। रिलायंस का स्टॉक दो साल के न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।औरऔर भी

अच्छी बात है कि निफ्टी अब गिरकर बाजार के उस्तादों के मनोवांछित टेक्निकल स्तर पर आ गया है। फिलहाल बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में है। यह तेजडियों के लिए सुनहरा मौका है कि वे निफ्टी को 200 अंक तक उठाकर जबरदस्त मुनाफा कमाने की सूरत निकाल लें। हमें निफ्टी की इस गति का अहसास था और हमने खुद को खास-खास सूचनाओं वाले चुनिंदा स्टॉक्स पर केंद्रित किया। ये स्टॉक गिरते बाजार में भी निश्चित रूप से बढ़ रहेऔरऔर भी

हमारे नीति-नियामक कितने मतिअंध हैं, इसका प्रमाण पेश कर दिया मंगलवार को जारी मई माह की मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने। तीन दिन पहले ही वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु कह रहे थे कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई में 8.6 फीसदी रह सकती है जो अप्रैल माह के 8.66 फीसदी से कम होगी। लेकिन वास्तव में यह आंकड़ा 9.06 फीसदी का निकला है। सवाल उठता है कि क्या इतने खासऔरऔर भी