रिजर्व बैंक ने निजी कंपनियों या उद्योग समूहों को बैंक खोलने की इजाजत देने की तैयारी कर ली है। लेकिन अगर किसी भी कंपनी या समूह की आय या आस्तियों का 10 फीसदी या इससे ज्यादा हिस्सा रीयल एस्टेट या ब्रोकिंग के धंधे से आता है तो उसे बैंक खोलने की इजाजत नहीं होगी। रिजर्व बैंक ने सोमवार को निजी क्षेत्र को नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए जारी प्रारूप दिशानिर्देशों में यह प्रावधान किया है।औरऔर भी

केंद्र की यूपीए सरकार के आला मंत्री किस कदर झूठ बोलते और वादाखिलाफी करते हैं, यह पिछले दिनों अण्णा हज़ारे के अनशन के दौरान कई बार उजागर हुआ। लेकिन कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है कि वे देश के साथ कितने बड़े-बड़े झूठ बोलते रहे हैं। इनमें से एक झूठ का खुलासा हाल में ही किया है देश में किसानों को ऋण देने की निगरानी व देखरेख करनेवाले शीर्ष बैंक नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक)औरऔर भी

रूप तात्कालिक है, गुण स्थाई है। शरीर नश्वर है, आत्मा स्थाई है। आईटी सेक्टर अगस्त महीने का सबसे बुरा सेक्टर रहा जिसकी अहम वजह है डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट का अभाव। यह स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ड्रैकुला या वैम्पायर बना हुआ है। मेरे पास इसके लिए कोई शब्द नहीं है क्योंकि यह स्थिति सचमुच सभी ट्रेडरों व निवेशकों का खून चूसे जा रही है। इसके चलते आज 95 फीसदी निवेशक लगभग अपनी सारी पूंजी गंवा चुकेऔरऔर भी

इस साल सरकार के बाजार ऋण का इंतजाम करना काफी मुश्किल होगा। यह कहा है कि सरकार के मुख्य ऋण प्रबंधन रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में। गुरुवार को जारी इस रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा है कि अभी तरलता की जैसी कसी हुई हालत है और बैंकों ने जिस तरह तय सीमा से ज्यादा निवेश एसएलआर प्रतिभूतियों (सरकारी बांडों) में कर रखा है, वैसे में सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2011-12 के लिए निर्धारित बाजारऔरऔर भी

एक तरफ केंद्र की यूपीए सरकार अण्णा हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को न संभाल पाने से परेशान हैं, दूसरी तरफ शेयर बाजार की गिरावट व पस्तहिम्मती ने सरकार के प्रमुख कर्णधार व संकटमोचक वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को हिलाकर रख दिया है। दिक्कत यह भी है कि हमारे शेयर बाजार की गिरावट की मुख्य वजह चूंकि वैश्विक हालात हैं, इसलिए वित्त मंत्री ढाढस बंधाने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते। शुक्रवार को वि‍त्‍त मंत्री प्रणवऔरऔर भी

जुलाई महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 9.22 फीसदी रही है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों से यह बात उजागर हुई है। मुद्रास्फीति की दर इसके ठीक पिछले महीने जून में 9.44 फीसदी और ठीक साल भर पहले जुलाई 2010 में 9.98 फीसदी थी। ऊपर से मुद्रास्फीति में कमी थोड़ा राहत का सबब दिखती है। लेकिन वित्त मंत्रालय को ऐसी कोई गफलत नहीं है। मंत्रालय के मुख्यऔरऔर भी

देश में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार पिछले डेढ़ साल से रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाते रहने के बावजूद अच्छे स्तर पर बनी हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जून 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) साल भर पहले की तुलना में 8.8 फीसदी बढ़ा है, जबकि उम्मीद की जा रही थी कि यह 5.5 से 5.7 फीसदी ही बढ़ेगा। इसने अर्थव्यवस्था में आ रही किसी भी तरहऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति एक बार दहाई के खतरनाक आंकड़े की तरफ बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 30 जुलाई 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 9.90 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.04 फीसदी और उससे पहले पिछले सप्ताह 7.33 फीसदी ही थी। वैसे तसल्ली की बात यह है कि साल भर पहले इसी दौरान मुदास्फीति की दर 16.45औरऔर भी

बुधवार को सुबह-सुबह प्री-ओपन सत्र में सेंसेक्स के 386.80 अंक और निफ्टी के 123.70 अंक बढ़ जाने से वित्त मंत्री प्रणव मुखजी इतने प्रफुल्लित हो गए कि बोल पड़े कि भारतीय शेयर बाजार बहुत जल्द अगले कुछ दिनों में ही पटरी पर आ जाएगा। मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार मिलकर बाजार में स्थायित्व लाने की कोशिश में लगे हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिस्टम मेंऔरऔर भी

डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव अब 2013 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर बने रहेंगे। उनका तीन साल का मौजूदा कार्यकाल अगले महीने 5 सितंबर को पूरा हो रहा था। कहा जा रहा था कि उनकी जगह किसी और को लाया जा सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को सारी उहापोह को दूर करते हुए डॉ. सुब्बाराव का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया। मजे की बात यह है कि ये फैसला डॉ. सुब्बाराव के जन्मदिन 11औरऔर भी