निफ्टी टूटकर 5225 और सेंसेक्स 17508 तक चला गया। लेकिन मुझे जरा-सा भी गफलत नहीं है। मंदड़िये अपने हमले से बाजार का रुख बदल सकते हैं, मेरी राय नहीं। हालांकि मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं कि अब बाजार की नई तलहटी बनाने का काम मंदड़िये करेंगे क्योंकि इस समय सब कुछ उनके हाथ, उनके शिकंजे में है। इस बीच एलआईसी ने बाजार में खरीद शुरू कर दी है और अगले 30 दिनों में वह 15,000औरऔर भी

जब बाजार मूलभूत या फंडामेंटल स्तर पर मजबूत हो, तब मंदड़ियों की फांस की अंतहीन चर्चा करते रहने का कोई तुक नहीं है। मंदड़िये इस समय उसी तरह शॉर्ट सौदे किए बैठे हैं, जिस तरह उन्होंने लेहमान संकट के बाद कर रखा था। एक मंदड़िये ने उस संकट के दौरान बाजार से 4800 करोड़ रुपए बनाए थे और 450 करोड़ रुपए का एडवांस टैक्स भरा। लेकिन जब बाजार का रुख पलटा तो सब कुछ गंवा बैठा। इतिहासऔरऔर भी

पिछले चार दिनों से बाजार में बराबर यह खबर उड़ रही थी कि सेबी ने रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) में एसएएसटी (सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर) रेगुलेशन के उल्लंघन के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पर 400 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया है। आज एक प्रमुख बिजनेस चैनल ने भी यह ‘खबर’ फ्लैश कर दी। अंदरूनी व भेदिया कारोबार के माहिर खिलाड़ी निफ्टी और आरआईएल में पिछले हफ्ते से ही शॉर्ट चल रहे हैं। यही वजह हैऔरऔर भी

जुआरी इंडस्ट्रीज का शेयर कल बीएसई (कोड – 500780) में 2.50 फीसदी गिरकर 689.05 रुपए और एनएसई (कोड – ZUARIAGRO) में 2.78 फीसदी गिरकर 689.90 रुपए पर बंद हुआ है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 52.48 रुपए है और इस हिसाब से उसका शेयर 13.13 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। शेयर की बुक वैल्यू 400.14 रुपए है। बी ग्रुप का शेयर है। कल बीएसई में इसमें औसत सेऔरऔर भी

नए साल का पहला कारोबारी सत्र। आपके लिए क्या पेश करूं? उलझन में हूं। सोचता हूं निवेश के माध्यमों में सबसे ज्यादा जोखिम शेयरों में है तो क्यों न साल की शुरुआत सुरक्षा के बजाय भरपूर जोखिम से की जाए। पहले ही दिन बहुत बच-बचकर क्यों चला जाए! तो ऐसा शेयर जो 36.53 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इतने पी/ई का कोई भी शेयर महंगा ही कहा जाएगा। लेकिन जब पूरा सेक्टर तेजी सेऔरऔर भी

करीब 30 लाख लोगों को बतौर एजेंट रोजगार देनेवाली जीवन बीमा कंपनियां इस समय अपना कमीशन बचाने और एजेंटों को ग्रेच्युटी व नवीनीकरण प्रीमियम से वंचित करने के लिए नया दांव खेल रही हैं। वे हर साल जितने नए एजेंटों की भरती करती हैं, उससे ज्यादा एजेंटों को निकाल देती हैं। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) की 2009-10 की सालाना रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में वित्त वर्ष 2009-10 में कुलऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 में देश में कुल 123.52 लाख जीवन बीमा पॉलिसियां लैप्स हो गई हैं। यह संख्या साल भर पहले 2008-09 में लैप्स हुई 91.08 लाख पॉलिसियों से 35.61 फीसदी अधिक है। सबसे ज्यादा चौंकाने की बात यह है कि पारदर्शिता की बात करनेवाली बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने हाल ही में जारी अपनी 2009-10 की सालाना रिपोर्ट में इस बाबत स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया है। उसने सभी 22 जीवन बीमा कंपनियों केऔरऔर भी

पुंज लॉयड का शेयर (बीएसई – 532693, एनएसई – PUNJLLOY) दो महीने पहले 15 अक्टूबर को ऊपर में 134.20 रुपए तक गया था। इसके बाद गिरते-गिरते 26 नवंबर को 81 रुपए की तलहटी पर चला गया। अब बीते हफ्ते 16 दिसंबर तक ऊपर की दिशा पकड़कर 106.30 रुपए पर पहुंच गया। उसमें बढ़त का ताजा सिलसिला 10 दिसंबर को शुरू हुआ है। उसी दिन उसने थाईलैंड की कंपनी पीटीटी पब्लिक लिमिटेड से 1292 करोड़ और भारत कीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. दुव्वरी सुब्बाराव के मुताबिक हाल में हाउसिंग लोन घोटाले में रिश्वत लेकर जो भी ऋण दिए गए हैं, उनमें से सभी में स्थापित नियमों का पालन किया गया है। उन्होंने गुरुवार को कोलकाता में रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि इस सिलसिले में 14 ऋण खातों की जांच की गई है और इनमें से 13 खाते एकदम दुरुस्त तरीके से काम कर रहेऔरऔर भी

हम में से बहुत लोग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय खुद बहुत कम सोचते हैं। ज्यादातर वे एजेंट की बातों पर भरोसा करते हैं या उसकी वाकपटुता के जाल में आकर फैसला कर बैठते हैं और एजेंट उन्हें अपने मन मुताबिक (कमीशन-माफिक) लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच देता है। फिर क्या करें: सिर्फ यह कीजिए कि  फैसला खुद लीजिए कि आपको  कौन-सी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी  खरीदनी है? एजेंट द्वारा सुझाई गई कम प्रीमियम वाली पॉलिसी को तभी तवज्जोऔरऔर भी