18 फरवरी, शुक्रवार को यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक यू के सिन्हा पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के नए चेयरमैन बनने जा रहे हैं। लेकिन लगता है कि उनके स्वागत की तैयारियों में सेबी ने अभी से ही म्यूचुअल उद्योग के प्रति अपना नजरिया बदलना शुरू कर दिया है। कम से कम वह यह दिखाने की कोशिश में है कि उसने हमेशा म्यूचुअल फंड उद्योग का भला सोचा है और अब भी उसकेऔरऔर भी

अगस्त 2009 में पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा एंट्री लोड खत्म कर देने से म्यूचुअल फंडों की आस्तियां जरूर घटी हैं, लेकिन उनका शुद्ध लाभ बहुत ज्यादा बढ़ गया है। निवेश संबंधी रिसर्च से जुड़ी फर्म मॉर्निंगस्टार की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में म्यूचुअल फंडों को संचालित करनेवाली एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) का औसत शुद्ध लाभ तीन गुना या 300 फीसदी बढ़ गया है। 2009-10 में देश के सभी म्चूचुअल फंडों काऔरऔर भी

इस साल फरवरी से म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या में शुरू हुआ घटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। यह संख्या म्यूचुअल फंड फोलियो से गिनी जाती है। म्यूचुअल फंडों के साझा मंच एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड एसोसिएशन इन इंडिया) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी से अगस्त 2010 के बीच म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या में 5.84 लाख की कमी आ चुकी है। फरवरी में कुल म्यूचुअल फोलियो 483.09 लाख थे, जबकि अगस्त अंतऔरऔर भी

सुना है कि म्यूचुअल फंड उद्योग में डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को नए सिरे से ढालने की बात चल रही है, लेकिन मुझे लगता है कि आज अहम जरूरत इस बात की है कि हम खुद से पूछें कि म्यूचुअल फंड उद्योग के बने रहने का ही क्या तुक है। हमें बराबर बताया जाता है कि म्यूचुअल फंड में प्रोफेशनल मैनेजर सबसे जुटाई गई बचत का कुशल प्रबंधन करते हैं और वे खुद अपना पैसा संभालनेवाले औसत निवेशक सेऔरऔर भी