बाजार के पंटर भाई लोग सुबह से ही यह मानकर शॉर्ट हो चले थे कि कल की तेजी टिक नहीं पाएगी क्योंकि बाजार में चहक लाने जैसा तो कुछ है नहीं। अब एक एफआईआई ब्रोकिंग हाउस ने रिपोर्ट जारी कर दी है कि राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के पार चला जाएगा। इसलिए कुछ भी संभावनामय नहीं लग रहा। क्या आप मेरे केवल एक सवाल का जवाब दे सकते हैं कि बाजार जब 15,500 पर कमजोर दिख रहाऔरऔर भी

बाजार लोगों की सोच का गुलाम नहीं है। दिसंबर का महीना मंदड़ियों की जकड़ में रहा, जबकि बाजार के लोग अच्छी रैली की उम्मीद कर रहे थे। जनवरी में बाजार के लोग 10 फीसदी गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट की व्यवस्था के चलते बाजार वर्तमान सेटलमेंट के अंतिम दिन 25 जनवरी तक निफ्टी को 5000 तक ले जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे जो चाहते हैं, उन्हेंऔरऔर भी

साल 2012 में बाजार का पहला दिन। हर ब्रोकरेज हाउस व बिजनेस अखबार नए साल के टॉप पिक्स लेकर फिर हाजिर हैं। चुनने के लिए बहुत सारे विकल्प सामने हैं। ऐसे में आपको और क्यों उलझाया जाए! हालांकि अगर साल 2011 के टॉप पिक्स का हश्र आपके सामने होगा तो शायद आपने इस हो-हल्ले को कोई कान ही नहीं दिया होगा। इन पर ध्यान देना भी नहीं चाहिए क्योंकि ढोल, झांझ, मजीरा व करताल लेकर यह मंडलीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति शून्य के करीब पहुंच चुकी है। चीन ब्याज दरों में कटौती के मूड में है। भारत भी ब्याज दरों में कटौती से मुंह नहीं मोड़ सकता। इन सारी बातों से यही लगता है कि बाजार को अब पलटकर बढ़ना चाहिए। सेबी ने माना है कि आईपीओ में धांधली होती है और इनमें निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा नुकसान खुद भारत सरकार को हुआ है क्योंकि आईपीओ मेंऔरऔर भी

बाजार में गिरावट का चक्र जारी है। निफ्टी 4701-80 तक जाने के बाद नीचे उतरा है। सेटलमेंट के आखिरी दिन उम्मीद के अनरूप भारी उथल-पुथल या वोलैटिलिटी का आलम है। लेकिन आगे के सारे संकेत शुभ नजर आ रहे हैं। मेरा मानना है कि दिसबंर सेटलमेंट के साथ 2011 में बद से बदतर जो भी होना था, हो चुका है। कल से एक नया सेटलमेंट शुरू हो रहा है जो 2012 का पहला सेटलमेंट है। यह बाजारऔरऔर भी

महीने के शुरू में एनालिस्ट समुदाय में भारी कयासबाजी चल रही थी कि दिसंबर का महीना ऐतिहासिक रूप से तेजी लेकर आता है और इस बार 4 से 10 फीसदी तेजी आ सकती है। लेकिन महीना खत्म होने को है और अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। आज समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने भी एक कयास भरी रिपोर्ट चलाई है कि जनवरी ऐतिहासिक रूप से बाजार के धसकने का महीना है और इस बार सेंसेक्स 10औरऔर भी

दुनिया के प्रमुख देशों के इक्विटी बाजार छुट्टियों के चलते बंद हैं, जबकि भारत का बाजार रोलओवर में व्यस्त है। चूंकि बाजार ओवरसोल्ड अवस्था में पहुंचा हुआ है, इसलिए रोलओवर इस समय शॉर्ट सौदों के हो रहे है और बाजार नीचे की दिशा पकड़कर उथल-पुथल मचा रहा है। फिर भी रुझान ऊपर की दिशा का है। निफ्टी आज सुबह 11 बजे से पहले 4800 तक पहुंच गया। लेकिन गिरा तो ऊपर-नीचे होता हुआ आखिर में 0.60 फीसदीऔरऔर भी

कल की शानदार रैली के बाद आज कमजोर शुरूआत होनी ही थी। लेकिन अमेरिका में बेरोजगारी के आंकडों का भी असर होना था जो काफी सकारात्मक रहे। अप्रैल 2008 में वहां बेरोजगारी भत्ते का आवेदन करनेवालों की संख्या में अप्रत्याशित कमी आई है। इसके ऊपर से खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़े आ गए तो हर तरफ ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद दौड़ गई। खाद्य मुद्रास्फीति की दर 1.81 फीसदी पर पहुंच गई है जो करीब चार सालोंऔरऔर भी

निफ्टी के 4000 तक पहुंच जाने के अंतहीन अनुमान और भारत के अंतहीन डाउनग्रेड का सिलसिला पूरा घूम चुका है। हालांकि सेंसेक्स कंपनियों के निचले लाभार्जन का अनुमान इस सूचकांक को 11,600 पर पहुंचा देता है। मतलब यह कि सेंसेक्स अगर 11,000 पर पहुंचता है तो बाजार को 9.48 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड होना पड़ेगा। लेकिन ऐसी नौबत तो 1991 में भी नहीं आई थी, जब भारत दीवालियेपन की कगार तक पहुंच गया था। पिछले 15औरऔर भी

बाजार और गिर गया। सेंसेक्स 204.26 अंक गिरकर 15,175.08 पर तो निफ्टी 68.90 अंक गिरकर 4544.20 पर पहुंच गया। सैंकड़ों शेयर और नीचे उतर गए। एनडीटीवी 24.75 रुपए, पुंज लॉयड 37.05 रुपए, सुज़लॉन एनर्जी 17.50 रुपए, 3आई इनफोटेक 12.10 रुपए, केईसी इंटरनेशनल 31.80 रुपए, ज़ी न्यूज़ 8.65 रुपए, फर्स्टसोर्स सोल्यूशंस 6.35 रुपए, क्विटेंग्रा सोल्यूशंस 1.91 रुपए, सूर्यचक्रा पावर 3.43 रुपए, रिलायंस पावर 70.15 रुपए, राज ऑयल 9.35 रुपए, एनएचपीसी 18.40 रुपए, डीबी कॉर्प 180.35 रुपए, श्रीगणेश ज्वेलरीऔरऔर भी