जिस तरह गाड़ी का पेट्रोल एक मंजिल तक ही पहुंचाता है, वैसे ही भावना किसी लक्ष्य तक पहुंचाने का आधार भर होती है। लक्ष्य पाने के बाद उसकी जगह नई भावना भरनी पड़ती है, तभी जाकर गाड़ी आगे बढ़ती है।और भीऔर भी

जब हर तरफ देश के अर्थ, व्यापार व वित्त जगत पर अंग्रेजी का आधिपत्य हो तो यह जरूरी हो जाता है कि हम हिंदी या दूसरी भारतीय भाषाओं की संभावनाओं और स्वाभिमान को जगाते रहे। यह जो खबर आप ठीक बगल में नवा जूनी में देख रहे हैं, इसे इकोनॉमिक टाइम्स ने आज अपनी लीड बनाई है। लेकिन हमने यह खबर साल भर पहले ही पेश कर दी थी। इससे मैं यकीकन एक आश्वस्ति का भाव अपनेऔरऔर भी

भावना बोली मैं सही। तर्क बोला मैं सही। भावना तर्क को उलाहना देती है कि तेरे रूखे-सूखे ज्ञान मार्ग से बाहर की दुनिया सधती है, अंदर की कलसती है। तर्क कहता है – तेरा भक्ति मार्ग सरासर मूर्खता है। तकरार जारी है।और भीऔर भी

भावनाओं की दुनिया कितनी निश्छल होती है! लेकिन दुनियावाले इन्हीं भावनाओं की तह में पैठकर हमें छलने का तर्क निकाल लेते हैं। और, ज़िंदगी  का कारोबार तो तर्क से चलता है बंधुवर, भावनाओं से नहीं।और भीऔर भी