आईबीएम का एक विज्ञापन आपने देखा होगा जिसमें सच तक पहुंचने के लिए डाटा या आंकड़ों की अहमियत समझाई गई है। बाजार के संबंध में सीएनआई रिसर्च भी तमाम ऐसे डाटा उपबल्ध करा रही है। वह डेरिवेटिव सौदों के जिन आंकड़ों के आधार पर निफ्टी में लक्ष्य का निर्धारण करती है, उन्हें उसने अपनी वेबसाइट पर मुफ्त में उपलब्ध करा रखा है। कोई सीएनआई का सदस्य हो या न हो, इन्हें देख-परख सकता है। सीएनआई की वेबसाइटऔरऔर भी

देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) ने मोबाइल पर शेयरों की ट्रेडिंग शुरू करने में सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) से बाजी मार ली है। उसने मंगलवार पर मोबाइल आधारित ट्रेडिंग की शुरुआत कर दी और पहले ही दिन तीस प्रमुख ब्रोकर फर्मों ने उसकी सेवा को अपना लिया है। इसमें शेयरखान, जेएम फाइनेंशियल, एनाम सिक्यूरिटीज, एसटीसीआई कैपिटल, एसएमसी ग्लोबल, एंजेल ब्रोकिंग, मारवाड़ी शेयर्स, मोतीलाल ओसवाल, ज़ेन सिक्यूरिटीज, जेपी कैपिटल,औरऔर भी

डीलर, ट्रेडर और ब्रोकर अपनी स्क्रीन रीडिंग के आधार पर बाजार का रुझान तय करते हैं। स्क्रीन तो दिखा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से एफआईआई की खरीद नदारद है। इसलिए बाजार नीचे फिसल रहा है और करेक्शन के लिए तैयार है। उनकी स्क्रीन रीडिंग से मुझे कोई इनकार नहीं। लेकिन यह अल्पकालिक तरीका है क्योंकि बाजार में अगर दो बजे खरीद शुरू होती है तो यही लोग इस तरह के सिद्धांत गढ़नेवाले अपने गुरुघंटालों काऔरऔर भी

हमारी बाजार नियामक संस्था, सेबी और गरीब रिटेल निवेशक कितने असहाय हैं, इसे इंडिया फॉयल्स के स्टॉक से समझा जा सकता है। हम पहले भी लिख चुके हैं कि किस तरह इंडिया फॉयल्स के नए प्रवर्तक एस डी (Ess Dee) ग्रुप ने इसके शेयर खुले बाजार में 20 रुपए के भाव पर बेचे और इसका भाव 5 रुपए या उससे से भी नीचे ले गए। इसके बाद कुछ शेयरधारक कंपनी प्रबंधन से मिले तो उन्हें समझा दियाऔरऔर भी

मैं काफी समय से आपको बता रहा था कि सीमेंट क्षेत्र में कोई सुस्ती नहीं है। हालांकि मानसून के दौरान कम उठाव के चलते पहली तिमाही बुरी रही है। सीमेट के दाम प्रति बोरी 20 रुपए गिर गए और सारे एनालिस्ट आपको इससे बाहर निकलने का रास्ता दिखाने लगे। लेकिन हमने नई हलचल को सबसे पहले पकड़ा और आज सीमेंट कंपनियों ने मुंबई में प्रति बोरी दाम 10 रुपए बढ़ा दिए। आप समझ सकते हैं कि मैंऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स इधर-उधर होता रहा, फिर भी उसमें ज्यादा गिरावट नहीं आई। एनएसई निफ्टी 5477 अंक को पार नही कर सका तो बाजार में करेक्शन आ गया और जो भी थोड़ी-बहुत बढ़त हुई थी, मिट गई। लेकिन इसके कोई खास फर्क नहीं पड़ता। हकीकत यह है कि एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) यानी अमीर निवेशक अब बाजार में लौट रहे हैं और कैश सेगमेंट का सतहीपन मिट रहा है, गहराई आ रही है। सभी छोटे-मोटे ऑपरेटर सक्रिय होऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) पॉलिसीधारकों के हितों से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी में जुट गया है। इस सिलसिले में उसने नए संशोधित नियमों का प्रारूप पिछले महीने की 18 तारीख को जारी किया था, जिस पर सभी संबंधित पक्षों से 5 जुलाई तक प्रतिक्रिया व सुझाव मांगे गए थे। अब सारे सुझावों के मिल जाने के बाद इरडा की कोशिश है कि नए नियमों को जल्दी से जल्दी कानूनी स्वरूप दे दिया जाए। हालांकिऔरऔर भी

ट्रेडरों से लेकर निवेशक तक सभी यूरो, हंगरी, ग्रीस और पिग्स (पुर्तगाल, आयरलैंड, ग्रीस व स्पेन का संक्षिप्त नाम) का हल्ला मचा रहे थे। लेकिन बाजार ने उन्हें ठेंगा दिखा दिया, गलत साबित कर दिया। लेहमान के समय यही लोग कार्ड घोटाले की बात कर रहे थे। उसके बाद इन पर मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का भूत सवार हो गया। लेकिन क्या आज सचमुच कोई मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की बात कर रहा है? बाजार को डरानेऔरऔर भी

इस समय सब-ब्रोकर भले ही किसी न किसी ब्रोकर के साथ जुड़ कर काम करते हैं। लेकिन उनका स्वतंत्र वजूद होता है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के पास उन्हें पंजीकरण कराना पड़ता है। लेकिन अगर सेबी की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश मान ली गई तो पूंजी बाजार के मध्यवर्ती के रूप में सब ब्रोकर के नाम को ही खत्म कर दिया जाएगा और वे ब्रोकरों के एजेंट या कर्मचारी बन कर रह जाएंगे। सेबी ने पूंजीऔरऔर भी

शेयर ब्रोकर इस कोशिश में लगे हैं कि सरकार शेयर सौदों पर लगनेवाले सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को कम कर दे। एसटीटी को 2004-05 से लागू किया गया है और इनकी मौजूदा दर 0.125 फीसदी है। यह खरीद-बिक्री दोनों ही तरह के शेयर सौदों पर लगता है। अपनी मांग लेकर ब्रोकरों का प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी मिलने वाला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक रवि नारायण ने एक समारोह के दौरान मीडिया सेऔरऔर भी