हमने अपनी सारी लॉन्ग कॉल्स शुक्रवार को ही बंद कर दी थीं क्योंकि हमें पूरा अहसास था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस सितंबर तिमाही के नतीजों से बाजार को निराश करेंगी। इसके ऊपर से दुनिया के बाजारों ने आग में घी डालने का काम कर दिया। कुछ बाजार सूत्रों का कहना है कि आज दो प्रमुख एफआईआई ने निफ्टी में अपनी लांग पोजिशन काटी है। लेकिन मैं पक्की तरह जानता हूं कि यह सब ड्रामा है। गिरावटऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार और यहां के उस्तादों की बलिहारी है। जो कंपनी सिर्फ एक खनिज, कोयला निकालती है, उस कोल इंडिया का शेयर 34.54 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है और जो कंपनी लौह अयस्क ही नहीं, तांबा, रॉक फॉस्फेट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट, जिप्सम, टिन, टंगस्टेन, बेंटानाइट और मैग्नेसाइट से लेकर हीरे तक का खनन करती है, उसका शेयर मात्र 14.66 के पी/ई पर डोल रहा है। वह भी तब, जब कर्नाटक में अवैध खनन परऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की उन सभी कंपनियों को विदेश में कच्चे माल के स्रोत खरीदने की इजाजत दे दी है, जिन्होंने कम से कम पिछले तीन सालो में मुनाफा कमाया हो। अभी तक सरकारी कंपनियां विदेश से कच्चा माल तो खरीद सकती थीं, लेकिन कच्चा माल बनानेवाली कंपनियों को नहीं खरीद सकती थीं, जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों पर ऐसी कोई बंदिश नहीं है। गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कीऔरऔर भी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उस नए खान व खनिज विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें प्रावधान है कि कोयला खनन कंपनियों को हर साल अपने शुद्ध लाभ का 26 फीसदी और अन्य खनिज कंपनियों को रॉयल्टी के बराबर रकम जिलास्तरीय खनिज न्यास में डालनी होगी जिसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों के विकास में किया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद तमाम खनिज व मेटल कंपनियों के शेयर धड़ाधड़ गिर गए। कोल इंडिया 5.2 फीसदी, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 4.1औरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) फिर कोल इंडिया को पीछे छोड़ बाजार पूंजीकरण में देश की पहले नंबर की कंपनी बन गई। आज उसका बाजार पूंजीकरण 2,50,648 करोड़ रुपए रहा, जबकि कोल इंडिया 2,47,538 करोड़ रुपए पर आ गई। ऊपर से कोल इंडिया को आज एक विदेशी ब्रोकिंग हाउस ने डाउनग्रेड भी कर दिया, जबकि यह अभी तक एफआईआई का सबसे चहेता स्टॉक बना हुआ है। मोटी-सी बात है कि अगर सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के लाभार्जन को डाउनग्रेडऔरऔर भी

कोल इंडिया अब बाजार पूंजीकरण के मामले में देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। उसने सालों से इस स्थान पर काबिज रिलायंस इंडस्ट्रीज को पीछे धकेल दिया है। इस समय कोल इडिया का बाजार पूंजीकरण 2,51,296 करोड़ रुपए है, जबकि रिलांयस इंडस्ट्रीज का मौजूदा बाजार पूंजीकरण 2,47,129 करोड़ रुपए ही रह गया है। यह फर्क लगातार बाजार का किंग कहे जानेवाले रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई गिरावट के चलते पैदा हुआ है। रिलायंस काऔरऔर भी

सरकार चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपए जुटाने के लक्ष्य को नीचे ला सकती है। केंद्रीय विनिवेश सचिव मोहम्मद हलीम खान ने सोमवार को मुंबई में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह इशारा किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार शेयर बाजार में चल रही उछल-पुछल के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित विनिवेश लक्ष्य को घटाने पर विचार कर रही है, तब उनका कहना था, “यहऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी के बाजार पूंजीकरण में गिरावट जारी है। कुछ समय पहले तक वह बाजार पूंजीकरण (शेयरों के मूल्य और कुल शेयरों की संख्या का गुणनफल) में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज से पीछे थी। लेकिन इसके बाद अन्य सरकारी कंपनी कोल इंडिया उससे आगे निकल गई। अब टाटा समूह की कंपनी टीसीएस का बाजार पूंजीकरण भी ओएनजीसी से ज्यादा हो गया है। इस तरह बाजार पूंजीकरण के लिहाज से ओएनजीसी देश में ऊपर से चौथेऔरऔर भी

बाजार में सुबह से चर्चा थी कि निफ्टी आज गिरकर 5290 तक चला जाएगा और अगले कुछ दिनों में यह 4800 पर होगा। इसकी वजह यूरोप में ऋण संकट के उभार, ब्याज दरों में वृद्धि, डीजल के दाम बढ़ने के अंदेशे और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (एफसीसीबी) की चिंता को बताया जा रहा है। लेकिन शाम होते-होते ये सारे कयास गलत साबित हुए। निफ्टी नीचे में 5367.45 तक ही गया। लेकिन फिर 5422.60 तक बढ़ने के बादऔरऔर भी

कोल इंडिया (सीआईएल) ने बाजार पूंजीकरण के लिहाज से ओएनजीसी को पीछे छोड़ते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। वैसे, निजी क्षेत्र को मिला दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज अब भी इस लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी है। कोल इंडिया का शेयर सोमवार को एनएसई में 8.70 रुपए बढ़कर 397.60 रुपए पर बंद हुआ है। उसने आज ही 400.90 रुपए पर अब तक का उच्चतम स्तर भी बनाया है। इसी के साथऔरऔर भी