हमारा कॉरपोरेट क्षेत्र और उसके शीर्ष संगठन – सीआईआई, फिक्की व एसोचैम से लेकर अलग-अलग उद्योंगों के संगठन अमूमन हर सरकारी नीति पर टांग अड़ाने में माहिर हैं। नीतियों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए जमीन-आसमान एक कर देते हैं। लेकिन धन के अंबार पर बैठी इन कंपनियों कोई फिक्र नहीं कि कालेधन की विकराल समस्या को कैसे हल किया जाए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने चेयरमैन की अध्यक्षता में इस साल 27 मईऔरऔर भी

2008 से लेकर अब तक के तीन सालों में देश में 1,55,939 कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 35,154 कंपनियां महाराष्ट्र की हैं। इसके बाद 27,972 कंपनियां दिल्ली, 24,055 कंपनियां आंध्र प्रदेश, 19,106 कंपनियां तमिलनाडु और 11,776 कंपनियां गुजरात की हैं। इस तरह 1,18,063 यानी 75% से ज्यादा बंद कंपनियां इन पांच राज्यों की ही हैं। इस दौरान बिहार की 1534, मध्य प्रदेश की 1546, राजस्थान की 2160 और उत्तर प्रदेश की 5593 कंपनियोंऔरऔर भी

जयराम रमेश ने ग्रामीण विकास मंत्रालय का पदभार संभालते ही जमीन के विस्फोटक मुद्दे को हाथ लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक का मसौदा अगले हफ्ते के मध्य तक बहस के लिए पेश कर दिया जाएगा और इसके बाद 1 अगस्त से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इसे संसद के पटल पर रख दिया जाएगा। सारा देश इस बात से वाकिफ है कि जमीन का मसला उड़ीसा से लेकर पश्चिम बंगाल औरऔरऔर भी

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने देश की 1,55,392 कंपनियों को ब्लैक-लिस्ट कर दिया है। इसकी वजह यह है कि इन कंपनियों ने 2006-07 से लेकर अब तक किसी साल की बैलेंस शीट दाखिल नहीं की है। सरकार के इस कदम के बाद ये कंपनियां न तो बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के कोई ऋण ले पाएंगी और न ही किसी के साथ कोई नया अनुबंध कर पाएंगी। यह जानकारी खुद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के सचिव डी के मित्तल नेऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत के लिए मुद्रास्फीति सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि महंगाई दर इस साल 6.5 फीसदी से अधिक रहने का अनुमान है। सोमवार को वॉशिंगटन में ‘भारत-अमेरिका आर्थिक व वित्तीय सहयोग’ पर आयोजित सम्मेलन में मुखर्जी ने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई समस्याएं हैं और सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्फीति है।’’ सम्मेलन का आयोजन सीआईआई ने वॉशिंगटन के शोध संस्थान ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर किया है। भारत-अमेरिकाऔरऔर भी

अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेटनर ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की वही कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं जिन्हें भारत के साथ निर्यात वृद्धि से फायदा पहुंचा है। वॉशिंगटन में ‘अमेरिका-भारत आर्थिक व वित्तीय भागीदारी’ पर आयोजित सम्मेलन में गेटनर ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘अमेरिका में उनऔरऔर भी

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निदेशक बोर्ड के स्तर की भर्तियों के मामले में दिशानिर्देश में संशोधन किया है। इससे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कामकाज में सुधार में मदद मिलेगी। लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) द्वारा जारी नए दिशानिर्देश के अनुसार निदेशक बोर्ड स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पद खाली होने की अनुमानित तिथि से 16 महीने पहले शुरू कर दी जाएगी। पहले यह प्रक्रिया एक साल पहले शुरू होती थी। इसके तहतऔरऔर भी

बाजार में क्या मंदड़िए, क्या तेजड़िए, सभी दुविधा में हैं। किसी को अंदाज नहीं है कि बाजार आगे कौन-सी दिशा पकड़ने जा रहा है। बीएसई में कैश बाजार में रोज का औसत वोल्यूम 2600 करोड़ रुपए और एनएसई में 8800 करोड़ रुपए पर आ चुका है। डेरिवेटिव सौदों में बीएसई में तो कुछ होता है नहीं, एनएसई तक में कारोबार घटकर 70,000 करोड़ रुपए के नीचे जाने लगा है। दिन के दिन यानी इंट्रा-डे कारोबार में होनेवालेऔरऔर भी

हमारे अवध के गांवों में एक कहावत चला करती थी। मालूम नहीं, अब खेल-खलिहान व चरागाहों के उजड़ जाने के बाद क्या हाल है? वो कहावत यूं थी कि पढ़ब-लिखब की ऐसी-तैसी, छोलब घास चराउब भैंसी। मतलब आप समझ ही गए होंगे। लेकिन शेयर बाजार को समझना और निवेश का कौशल सीखना है तो पढ़ाई-लिखाई की ऐसी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यहां इतने कारक काम कर रहे होते हैं कि कुछऔरऔर भी

कृषि कारोबार, सामाजिक क्षेत्र और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों में हर स्तर के कर्मचारियों के वेतन में 25 से 40 फीसदी तक वृद्धि की जा रही है। इसकी खास वजह है कि इन क्षेत्रों में विकास तेजी से हो रहा है और कंपनियां इससे कर्मचारियों के साथ बांटना चाहती हैं। एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म, ग्लोबलहंट के निदेशक सुनील गोयल ने कहा कि कृषि कारोबार, सामाजिक क्षेत्र और ऊर्जा तेजी से बढ़ते क्षेत्र हैं। प्रत्येक क्षेत्र में पिछले सालऔरऔर भी