ज़ेनसार टेक्नोलॉजीज आरपीजी समूह की आईटी सलाह व सॉफ्टवेयर और बीपीओ सेवाओं से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के चेयरमैन हर्ष गोयनका हैं। लेकिन उसका प्रबंधन वाइस चेयरमैन व सीईओ गणेश नटराजन के नेतृत्व में बनी बारह सदस्यों की टीम देखती है। इसके नीचे ग्यारह सदस्यों की प्रबंधन परिषद है। कंपनी ने अलग-अलग उद्योगों को दी जा रही सेवाओं के मुताबिक अपने कामकाज को पांच वर्टिकल सेगमेंट में बांटा है। नए वर्टिकल अप्रैल 2011 से काम करना शुरूऔरऔर भी

मित्रों! मैं जीवन में जबरदस्त जोखिम उठाने का आदी हो चुका हूं। लेकिन शेयर बाजार में जोखिम उठाने से ज़रा घबराता हूं, वह भी तब दूसरों का पैसा दांव पर लगा हो। इसलिए शुक्रवार 28 जनवरी को जब मैंने देखा कि टीसीआई फाइनेंस सुबह 111.85 रुपए पर ऊपरी सर्किट छूने के बाद दोपहर बारह-एक बजे तक 101.25 रुपए के निचले सर्किट पर पहुंच गया तो मुझे डर लगा कि जिन लोगों ने टीसीआई फाइनेंस में निवेश कियाऔरऔर भी

यूटीवी सॉफ्टवेयर कम्युनिकेशंस में कल अचानक बीएसई (कोड – 532619) में औसत से छह गुना ज्यादा 49,699 शेयरों का कारोबार हुआ। हालांकि इसमें से 16.99 फीसदी ही डिलीवरी के लिए थे। इसी तरह एनएसई (कोड – UTVSOF) में हुआ कारोबार 1,39,994 शेयरों का रहा जिसमें से 21.56 फीसदी डिलीवरी के लिए थे। हालांकि कंपनी ने कल ही दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। लेकिन शेयरों में बढ़े वोल्यूम से एक बात साफ होती है किऔरऔर भी

बायोकॉन लिमिटेड दवा व्यवसाय से ज्यादा अपनी चेयरमैन व प्रबंध निदेशक किरण मजुमदार शॉ के नाम से जानी जाती है। बीते शुक्रवार, 21 जनवरी को उन्होंने बैंगलोर में कंपनी के दिसंबर 2010 तिमाही के नतीजे पेश करते हुए कहा था, “बायोकॉन ने अब तक का सबसे ज्यादा कर-बाद लाभ घोषित किया है और यह 100 करोड़ के पार चला गया है। कंपनी का परिचालन लाभ मार्जिन भी इस तिमाही में 24 फीसदी बढ़ गया है। यह हमारेऔरऔर भी

कोई भी कंपनी आज क्या है, निवेश के लिए इससे ज्यादा अहम होता है कि उसके भावी विकास का ग्राफ कहां जाता दिख रहा है। जब तक आपको कंपनी समझ में नहीं आ जाती, उसकी मजबूती और भावी विकास के बारे में आप आश्वस्त नहीं हो जाते, तब तक कतई निवेश न करे। आखिर आपकी गाढ़ी कमाई कहीं भागी तो नहीं जा रही। बस यह है कि अभी बैंक उसका फायदा उठा रहा है। आप समझदार होऔरऔर भी

एनआईआईटी लिमिटेड मूल कंपनी है और एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज 2004 में उससे अलग निकालकर बनाई गई कंपनी है। आप जानते ही होंगे कि एनआईआईटी 1981 में बनी आईटी शिक्षण की प्रमुख कंपनी है। धीरे-धीरे उसने सॉफ्टवेयर भी बनाना शुरू कर दिया। साल 2002 तक यह स्थिति हो गई कि उसके कारोबार का काफी बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर बिजनेस से आने लगा तो उसने 2004 में सॉफ्टवेयर बिजनेस को अलग कंपनी एनआईआईटी टेक्नोलॉजीज में डाल दिया है। इस समय एनआईआईटीऔरऔर भी

शुरू में ही एक बात साफ कर दूं कि आपके लिए फैसले हम नहीं ले सकते। आपको खुद फैसला करना है कि किस स्टॉक में निवेश करना है या नहीं क्योंकि शेयर बाजार में निवेश ताजिंदगी चलनेवाली लंबी चीज है, दीपावली की फुलझड़ी या अनार नहीं। हम आपको सही स्टॉक चुनने में मदद भर कर सकते हैं। शेयर बाजार की गलियों में निवेश की गाड़ी को ड्राइव करना आपको सीखना ही पड़ेगा। तो, आज चर्चा जुबिलैंट लाइफऔरऔर भी

यूं तो शेयरों के भाव वर्तमान को नहीं, हमेशा भविष्य को पकड़कर चलते हैं। लेकिन किसी कंपनी के भविष्य का आकलन इतना आसान नहीं होता। गहरी रिसर्च और जासूसी का काम होता है यह। फिर भी कभी-कभी कंपनी का अतीत और वर्तमान ही इतना मजबूत होता है कि भविष्य से बेफिक्र होकर उसमें निवेश किया जा सकता है। सीईएससी लिमिटेड का मामला कुछ ऐसा ही है। आरपीजी समूह की कंपनी है। 1899 में गठित हुई। तब सेऔरऔर भी

एचईजी लिमिटेड का शेयर (बीएसई – 509631, एनएसई – HEG) नई से नई तलहटी बनाता जा रहा है। नए साल में 12 जनवरी को वह 233.15 रुपए तक चला गया तो वो उसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर था। कल 18 जनवरी को वह इससे भी नीचे 218.50 तक जाकर नया न्यूनतम स्तर बना गया। हालांकि बंद हुआ है 225.25 रुपए पर। कंपनी में ऐसा क्या हो गया जो उसका स्टॉक इस तरह गोता लगाता जा रहाऔरऔर भी

कोरेक्स, बीकासूल व जेलुसिल बनानेवाली बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर का नाम शायद आप सबको पता ही होगा। इसके कुछ अन्य ब्रांड हैं डोलोनेक्स और मिनीप्रेस-एक्सएल। ये सभी ब्रांड बाजार से ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहे हैं। कंपनी का वित्त वर्ष दिसंबर से नवंबर तक का है। नवंबर 2010 में खत्म वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी की आय 29 फीसदी बढ़कर 203 करोड़ रुपए से 261 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि इस दौरान दवा उद्योगऔरऔर भी