अमेरिका की एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जिसका प्रमुख स्रोत पाकिस्तान है और इस मुद्रा का इस्तेमाल आतंकवाद व आपराधिक नेटवर्क अपनी गतिविधियां चलाने के लिए करते हैं। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अमेरिकी विदेश विभाग की वर्ष 2011 की अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत बड़े पैमाने पर नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जोऔरऔर भी

भारत और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की रणनीतिक वार्ता नई दिल्ली में 6 अप्रैल को होगी जिसमें विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व करेंगी। यह घोषणा विदेश सचिव निरुपमा राव ने वॉशिंगटन में की। निरुपमा राव ने अपने तीन दिवसीय अमेरिका दौरे के समापन पर मंगलवार की शाम संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस बार बैठक 6 अप्रैल को नई दिल्ली में होगी। विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन इसके लिए भारत यात्रा करेंगी।’’ अमेरिका यात्रा पर आईंऔरऔर भी

हर चीज की अति हमेशा बुरी ही होती है, प्रतिक्रिया की भी। खासकर अति-प्रतिक्रिया निवेशक पर ज्यादा ही चोट करती है। मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और यहां से निकलकर विदेशी पूंजी के विकसित देशों में जाने को लेकर निफ्टी जिस तरह 200 दिनों के मूविंग एवरेज (डीएमए) से नीचे चला गया, वह निश्चित रूप से बाजार की अति-प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ऐसा ही 2008 में लेहमान संकट के बाद हुआ था, जब तमाम ब्रोकर ढोल पीटऔरऔर भी

बाजार में कल 337 अंक के तेज सुधार के बाद मंदड़ियों की तरफ से बिकवाली का आना लाजिमी था। फिर इनफोसिस के नतीजे भी चौंकानेवाले नहीं निकले। 30-32 के पी/ई अनुपात पर अगर आप इनफोसिस द्वारा बाजार को पीछे छोड़ देने की बात सोचते हैं तो यह भारत की दूसरे नबंर की आईटी कंपनी से वाकई कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना हो जाएगा। हालांकि निवेशकों का एक वर्ग इस स्टॉक को तब तक पसंद करता रहेगा जबऔरऔर भी

ऑयल इंडिया सरकार की नवरत्न कंपनी है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के धंधे में है। सितंबर 2009 में इसका आईपीओ 1050 रुपए प्रति शेयर मूल्य पर आया था। शुक्रवार को यह बीएसई (कोड – 533106) में 3.18 फीसदी की गिरावट के साथ 1328.70 रुपए और एनएसई (कोड – OIL) में 2.32 फीसदी गिरकर 1336.30 रुपए पर बंद हुआ है। हो सकता है आज भी गिरावट आए। लेकिन कंपनी के कामकाज और भावी योजनाओं को देखें तोऔरऔर भी

सरकार जल्दी ही विदेश में धन छिपाकर रखनेवाले भारतीयों पर निगाह रखने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और साइप्रस जैसे देशों में आयकर कार्यालय खोलने जा रही है। ये कार्यालय संबंधित देश के कर अधिकारियों के साथ बराबर संपर्क में रहेंगे और किसी भी संदेहास्पद लेन-देन की खोज-खबर रखेंगे। इससे सरकार को कर चोरों के पनाहगार समेत अन्य देशों से गोपनीय वित्तीय सूचनाएं हासिल करने में मदद मिल सकती है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन,औरऔर भी

वक्त की जरूरत है कि देश में वित्तीय सुधार लागू किए जाएं और निवेशकों के हितों की हिफाजत की जाए। इस समय हमारे शेयर बाजार में करीब 1600 कंपनियां सस्पेंड पड़ी हैं। लेकिन उनके खिलाफ सेबी या कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे बेहद गलत संकेत जा रहा है। सच कहें तो यह काफी बड़ा घोटाला है। इन सस्पेंड कंपनियों में रिटेल निवेशकों के करीब 58,000 करोड़ रुपए फंसे हैं।औरऔर भी

मेक्सिको के कानकुन शहर में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत और चीन सहित कई प्रमुख विकासशील देशों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती के संबंध में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते को स्वीकार कर लें। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी समझौते को तत्काल मानने को तैयार नहीं है। इस सम्मेलन में अमेरिका, भारत और चीन कानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौते को स्वीकार करनेऔरऔर भी

एलायड डिजिटल सर्विसेज (बीएसई – 532875, एनएसई – ADSL) इस समय निवेशकों से मुखातिब है। समझाने में लगी है कि उसमें निवेश करना क्यों लाभ का सौदा है। आज ही वह इस सिलसिले में मुंबई में निवेशक दिवस बना रही है। आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन की सेवाएं देने वाली यह ठीकठाक कंपनी है। भारत में 132 जगहों पर मौजूद हैं और अमेरिका में एनप्वाइंटे ग्लोबल सर्विसेज के अधिग्रहण के बाद वहां के 40 से ज्यादा राज्यों में पहुंचऔरऔर भी

डाउ जोंस 11,300 के ऊपर बढ़कर बंद हुआ। यह ब्रेक-आउट का साफ संकेत है और यह अब 15,000 की तरफ बढ़ेगा। पहला पड़ाव 11,800 का है। यह तेजी अमेरिका में दूसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग (क्यूई-2) का असर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दिए जानेवाले इस प्रोत्साहन की तारीख घोषित हो चुकी है। इसका आकार 3.3 लाख करोड़ डॉलर का हो सकता है। हालांकि अमेरिकी सीनेट ने पहले 60 करोड़ डॉलर की राशि ही पारित की थी। आप इसकी अहमियतऔरऔर भी