नहीं जमी इनफोसिस की ईमानदारी, नतीजे अच्छे, पर शेयर 8.4% टूटा

दुनिया के बहुतेरे सफलतम बिजनेस संगठन मूल्य जोड़ने के लिए जिस कंपनी के 1.45 लाख लोगों पर भरोसा करते हैं, उस कंपनी इनफोसिस का दिसंबर तिमाही में 30.8 फीसदी ज्यादा बिक्री और 33.3 फीसदी ज्यादा शुद्ध लाभ हासिल करना भी शेयर बाजार को रास नहीं आया। तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद देश की इस दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी के शेयर 8.43 फीसदी गिरकर 2588.25 रुपए पर पहुंच गए। यह पिछले नौ महीनों में इनफोसिस के शेयर में आई सबसे बड़ी गिरावट है।

इस गिरावट की वजह कंपनी के वर्तमान नतीजे नहीं, बल्कि भावी अनुमान हैं। कंपनी के सीईओ व प्रबंध निदेशक एस डी शिबुलाल ने नतीजों की घोषणा के साथ बैंगलोर में कहा, “विकसित देशों की घटती विकास दर और यूरोप के संकट के चलते बनी विश्व अर्थव्यवस्था की हालत आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) उद्योग के विकास को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इन अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद हमाका ध्यान दीर्घकालिक विकास के अवसरों पर है। हम अपने निवेश को इस तरह नियोजित कर रहे हैं ताकि ग्राहकों का रिटर्न बढ़े और उन्हें ज्यादा बिजनेस मूल्य मिल सके।”

चालू वित्त वर्ष 2011-12 की दिसंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड या समेकित रूप से इनफोसिस की आमदनी साल भर पहले से 30.8 फीसदी और पिछली तिमाही से 14.8 फीसदी बढ़कर 9298 करोड़ रुपए हो गई, जबकि इसी दौरान शुद्ध लाभ साल भर पहले से 33.3 फीसदी और पिछली तिमाही से 24.4 फीसदी बढ़कर 2372 करोड़ रुपए हो गया। दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 49 नए क्लाएंट हासिल किए और 9655 कर्मचारियों के जुड़ने से उसमें कार्यरत कुल लोगों की संख्या 1,45,088 हो गई।

दिसंबर 2011 के अंत तक कंपनी के पास 19,572 करोड़ रुपए का कैश या समतुल्य निवेश है। यह इस मद में साल भर पहले की रकम 15,897 करोड़ रुपए से 23.12 फीसदी ज्यादा है। लेकिन ये सब अच्छी बातें बाजार को नहीं भाईं। उसे बस यह दिखा कि कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान डॉलर में आय के बढ़ने का अनुमान 16.4 फीसदी कर दिया है, जबकि सितंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा करते वक्त अक्टूबर में उसका अनुमान 19.1 फीसदी का था।

कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) वी बालकृष्णन का कहना है, “यूरोपीय संकट वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर डाल रहा है। अमेरिका में हालांकि ताजा आर्थिक संकेतक सकारात्मक हैं। पर कुल मिलाकर पूरा माहौल अब भी पुख्ता नहीं हुआ है। ग्राहक बड़े चौकन्ने हैं। हमें लगता है कि यह चौकन्नापन अभी कुछ समय तक रहेगा। यूरोप के हालात सुधरने में भी लंबा समय लग सकता है।”

यह ईमानदार स्वीकारोक्ति बाजार को जमी नहीं और कंपनी का शेयर आठ फीसदी से ज्यादा टूट गया। उसके फ्यूचर्स में भी लगभग इतनी गिरावट आई है। वह भी तब, जब दिसंबर तिमाही में हासिल वास्तविक उपलब्धि बाजार के अनुमान से बेहतर रही है। यही नहीं, इनफोसिस के लपेटे में आईटी सेक्टर की दूसरी कंपनियों को भी ले लिया गया और उनके शेयरों को भी तगड़ी मार लगी।

वैसे, रुपए में कंपनी को अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में उसकी कुल आमदनी 24.6 से 24.7 फीसदी बढ़कर 34,273 करोड़ से 34,294 रुपए और प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) 23.2 फीसदी बढ़कर 147.13 रुपए हो जाएगा। डॉलर में सालाना आय के 16.4 फीसदी बढ़कर 702.9 करोड़ से 703.3 करोड़ डॉलर और ईपीएस के 14.5 फीसदी बढ़कर 3 डॉलर हो जाने का अनुमान है। ये अनुमान भी कोई बुरे नहीं हैं। लेकिन बाजार की गति निराली है। वह अपने अनुमान से बेहतर नतीजों को तो तवज्जो नहीं देता। लेकिन भावी परिदृश्य के ईमानदार आकलन पर बखेड़ा खड़ा कर देता है।

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