वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्र सरकार का दावा है कि हमारी अर्थव्यवस्था बमबम कर रही है और आगे भी शानदार गति से बढ़ेगी। लेकिन दरअसल, सब अंधेरे में तीर मार रहे हैं। किसी को कुछ साफ नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 11 दिन पहले देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों, अधिकारियों व विशेषज्ञों के साथ बैठक की। बैठक का विषय था – वैश्विक प्रतिकूलताओं के बीच भारत का विकास और दमखम। उनका कहना था किऔरऔर भी

मुद्रास्फीति या महंगाई ने भले ही आम लोगों का बजट खराब कर दिया हो। लेकिन इसने सरकार का बजट एकदम चकाचक कर दिया है। बढ़ी मुद्रास्फीति की कृपा ने केंद्र सरकार इस बार बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 6.4% तक सीमित रखने का लक्ष्य हासिल कर लेगी और तमाम अर्थाशास्त्रियों से लेकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तक को कहने का मौका नहीं देगी कि वह खर्चशाह हो गई है और ऋणम् कृत्वा, घृतम पीवेत कीऔरऔर भी

हमें शेयर बाज़ार में निवेश करने से पहले भलीभांति समझ लेना चाहिए कि कंपनियां निवेशकों के स्वामित्व वाली सामाजिक इकाई हैं जिनका मकसद है अपने निवेशकों द्वारा लगाई गई पूंजी पर रिटर्न को अधिक से अधिक करते जाना। रिटर्न का यूं बढ़ना कंपनियों के शेयर के भावों में झलकता है, भले ही वे कंपनियां लिस्टेड हों या न हों। हां, लिस्टेड कंपनियों में सहूलियत यह होती है कि उनके शेयर के भाव हर दिन स्टॉक एक्सचेंज मेंऔरऔर भी

देश की घरेलू बचत लगातार घट रही है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक हमारी सकल घरेलू बचत वित्त वर्ष 2018-19 में 60,00,390 करोड़ रुपए हुआ करती थी। यह 2019-20 में 59,95,942 करोड़ रुपए और 2020-21 में 55,92,446 करोड़ रुपए रह गई। बाद का सरकारी आंकड़ा अभी तक नहीं आया है। लेकिन मोतीलाल ओसवाल फाइनेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2022-23 में सितंबर 2022 तक की छमाही में हमारी सकल घरेलू बचत दर जीडीपीऔरऔर भी