इधर कॉरपोरेट क्षेत्र पर ऋण का बोझ खूब घटा है। साथ ही बैंकों के एनपीए कम हो गए हैं क्योंकि उन्होंने पिछले छह सालों में 11.17 लाख करोड़ रुपए के ऋण बट्टेखाते में डाल दिए। मगर, दिक्कत यह कि इन्हीं छह सालों में पहले आर्थिक सुस्ती और फिर कोरोना की मार से किसानों से लेकर आम उपभोक्ता तक ज्यादा कर्जदार हो गया है। यकीनन, बड़े कॉरपोरेट घरानों और उनके आला कर्मचारियों के साथ ही सरकारी कर्मचारियों कीऔरऔर भी