वित्तीय जगत आज ग्लोबल हो गया है। इस जगत का केंद्र है अमेरिका। अमेरिका की हलचल यूरोप से लेकर एशिया तक को लपेट लेती है। उसने ब्याज बढ़ाई तो दूसरे देशों को ब्याज दर बढ़ाना ही पड़ता है। वे अगर ब्याज न बढ़ाएं और अमेरिका में ब्याज दर उनसे ज्यादा हो तो उनका धन निकलकर अमेरिका भागने लगेगा। इस तरह डॉलर निकलते रहे तो उसके मुकाबले उनकी अपनी मुद्रा कमज़ोर पड़ती जाएगी। उनके निर्यात डॉलर में सस्तेऔरऔर भी