ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं तो गांठ बांध लें कि शेयरों के भाव या बाज़ार का कोई भी पूर्वानुमान 100% सही नहीं हो सकता। यहां प्रायिकता चलती है। सिक्का उछालने पर हेड/टेल आने की प्रायिकता 50% रहती है। वैसे ही बाज़ार में प्रायिकता चलती है। हम ज्यादा प्रायिकता वाले सौदे चुनते हैं और चूकने पर चोट न खाएं, इसके लिए स्टॉप लॉस या पोजिशन साइजिंग का सहारा लेते हैं। अब करते हैं नए संवत का पहला अभ्यास…औरऔर भी

इसे माल व सेवा कर कहिए या वस्तु एवं सेवा कर, अंततः इसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) के रूप में ही बोला, जाना और कहा जानेवाला है। देश में 1986 से ही इसकी अवधारणा पर काम चल रहा है। लेकिन इसके अमल में बराबर कोई न कोई दिक्कत आ जाती है। यह आज़ादी के बाद देश में परोक्ष या अप्रत्यक्ष करों का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण सुधार है। असल में, इसके लागू होने से देश मेंऔरऔर भी

दीये की लौ को देखिए। अंधेरे के आखिरी छोर तक बढ़ते गए उसके वलय की लहरों को देखिए। देखना चाहेंगे तो आपको दशकों नहीं, सदियों पुराना इतिहास दिख जाएगा। नहीं चाहेंगे तो बस इतना दिखेगा कि पहले घी के दीये जलते थे, खेतों की मेड़ों और घरों की मुंडेरों पर। दीये फिर तेल के हुए और अब बहुत हुआ तो पामोलिन या सस्ते वनस्पति के दीये जलते हैं। नहीं तो मोमबत्ती के बने-बनाए दीयों की भरमार है।औरऔर भी

ट्रेडर, निवेशक, विश्लेषक सभी जानना चाहते हैं कि बाज़ार आगे कहां जाएगा, कोई शेयर कहां पहुंचेगा। लेकिन इस बाज़ार की विचित्र हकीकत यह है कि यहां एक ही वक्त एक ही स्टॉक या सूचकांक को लेकर लोगों की राय एक-दूसरे से उलट होती है। ऐसा न हो तो बाज़ार ठप पड़ जाए, कोई ट्रेडिंग ही न हो। बाज़ार एकदम बर्फ की मानिंद जम जाए। धारणा विपरीत तो अनुमान कैसे हों एक! अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी