इसे माल व सेवा कर कहिए या वस्तु एवं सेवा कर, अंततः इसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) के रूप में ही बोला, जाना और कहा जानेवाला है। देश में 1986 से ही इसकी अवधारणा पर काम चल रहा है। लेकिन इसके अमल में बराबर कोई न कोई दिक्कत आ जाती है। यह आज़ादी के बाद देश में परोक्ष या अप्रत्यक्ष करों का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण सुधार है। असल में, इसके लागू होने से देश मेंऔरऔर भी

दीये की लौ को देखिए। अंधेरे के आखिरी छोर तक बढ़ते गए उसके वलय की लहरों को देखिए। देखना चाहेंगे तो आपको दशकों नहीं, सदियों पुराना इतिहास दिख जाएगा। नहीं चाहेंगे तो बस इतना दिखेगा कि पहले घी के दीये जलते थे, खेतों की मेड़ों और घरों की मुंडेरों पर। दीये फिर तेल के हुए और अब बहुत हुआ तो पामोलिन या सस्ते वनस्पति के दीये जलते हैं। नहीं तो मोमबत्ती के बने-बनाए दीयों की भरमार है।औरऔर भी