सफल ट्रेडर खुद पर भरोसा करते हैं, लेकिन घमंडी कतई नहीं होते। वित्तीय बाजार में वही लोग टिक पाते हैं जो हमेशा सतर्क रहते हैं और लचीलापन बरतते हैं। हमें अपने हुनर और अपनाई गई ट्रेडिंग पद्धति पर ज़रूर भरोसा होना चाहिए। लेकिन जो कुछ नया हो रहा है, उसे जानने-सीखने व स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। ज़रूरत के हिसाब से ढलना ट्रेडर को आना ही चाहिए। अब साल की चलाचली का आखिरी दिन…औरऔर भी

वित्तीय आज़ादी को लेकर लोग गंभीर हैं। वे खुद टेक्निकल एनालिसिस जैसे हुनर सीख रहे हैं। नेट से ढूंढकर किताबें पढ़ रहे हैं। साथ ही उनकी ख्वाहिश को भुनाने के लिए वित्तीय बाज़ारों पर ऑनलाइन व ऑफलाइन क्लासेज़ भी होने लगे हैं। आज का तबका वैसा नहीं है जो 1990 के आसपास हर्षद मेहता की हवा में उड़कर बाज़ार में आ गया था। आज का ट्रेडर भावनाओं में बहने का नुकसान समझता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय आज़ादी का नारा ज़ोर पकड़ता जा रहा है। यह तो ठीकठीक नहीं पता कि देश में कितने लोग फिलहाल शेयर, कमोडिटी या फॉरेक्स बाज़ार में ट्रेड करते हैं। लेकिन एक स्पष्ट रुझान दिख रहा है कि 35-50 साल के बीच के तमाम नौकरीपेशा लोग अपनी बचत के साथ वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के लिए उतरने लगे हैं। उनका मकसद है कि खुद अपना बॉस बनकर वित्तीय आज़ादी हासिल की जाए। अब पकड़ते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस हफ्ते साल 2015 विदा ले रहा है। लेकिन जाते-जाते अपना बैटन नए साल 2016 के हाथों में थमाता जा रहा है। हफ्ता बीतते-बीतते हम नए साल में पहुंच जाएंगे क्योंकि इसका आखिरी ट्रेडिंग दिन नए साल का पहला ट्रेडिंग दिन है। इस साल 1 जनवरी से 24 दिसंबर तक निफ्टी 5.11% और सेंसेक्स 6.07% गिर चुका है। नई सरकार का उन्माद उतर चुका है। अब बाज़ार का दारोमदार सच पर टिका है। देखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर खरीदते वक्त हम अक्सर जांचते-पूछते हैं कि वो आखिर कितना उठ सकता है? मगर, यह सवाल गलत है क्योंकि कोई ठीकठीक नहीं जानता कि वो कहां तक जाएगा। हम भविष्य नहीं जानते। लेकिन हम चाहें तो अतीत की गहरी तहकीकात ज़रूर कर सकते हैं। इसलिए सही सवाल यह है कि क्या वो शेयर पर्याप्त गिर चुका है। लेकिन साथ ही याद रखें कि हर गिरा हुआ शेयर सस्ता नहीं होता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी