टीवी चैनल पर संपादक बोले – निवेशकों को ग्रोथ वाले सेक्टर की उन कंपनियों में धन लगाना चाहिए जिनका पांच साल का ट्रैक-रिकॉर्ड अच्छा हो। महोदय, हवाबाज़ी के बजाय एक-दो कंपनियां ही बता देते। पिछले ट्रैक-रिकॉर्ड को तो शेयर का भाव सोख चुका है। आगे का क्या? ऐसे ही एक फेसबुकिया मित्र ने लॉन्ग टर्म के लिए 19 कंपनियों के नाम गिना डाले, कर्ज के बोझ से जिनके शेयर डूबे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

रिस्क संभालने के तरीके अलग-अलग होते हैं। कौन-सा तरीका सही है, यह लोगों की अलग-अलग स्थिति पर निर्भर करता है। जैसे, अगर आप इंट्रा-डे ट्रेडर हैं तो रिस्क आप अगले दिन तक खींचकर नहीं ले जा सकते और सौदा आपको उसी दिन काटना होता है। इसलिए तगड़ा स्टॉप लॉस ज़रूरी है। लेकिन आप स्विंग या पोजिशनल ट्रेडर हैं तो बढ़त के लंबे रुझान वाले स्टॉक में गिरने पर खरीद बढ़ाते जा सकते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

रिस्क उतना ही उठाएं जितना आप संभाल सकते हैं। हमेशा मूल ध्येय यह रहे कि पैरों के नीचे से ज़मीन न खिसके। अपनी ट्रेडिंग पूंजी इतनी न घटे कि ट्रेडिंग ही न कर सकें। दूसरे, अपना मनोबल इतना न गिरे कि समझदारी खत्म हो जाए और दिमाग काम करना बंद कर दे। ट्रेडिंग पूंजी और मन-बुद्धि का संतुलन दो ऐसी मूलभूत चीज़ें हैं जिनको सलामत रखना ट्रेडिंग से कमाई के लिए ज़रूरी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में जब भावनाएं उबाल पर हों, वो कब कौन-सी दिशा में कहां तक चला जाएगा, इसका भरोसा न हो तब माना जाता है कि ट्रेडरों के लिए शिकार का बहुत अच्छा दौर है। लेकिन कौन-से ट्रेडरों के लिए? वैसे ट्रेडरों के लिए जिनमें जमकर रिस्क लेने का अनुभव और दमखम होता है। सामान्य या कमज़ोर रिस्क प्रोफाइल वाले ट्रेडरों के तो तंबू-कनात इस दौरान उखड़ जाया करते हैं। इसलिए संभलकर। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी