आज बजट का दिन है। तय कार्यक्रम के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली 11 बजे से लोकसभा में भाषण शुरू कर देंगे। बाज़ार की धारणा चूंकि विदेशी पूंजी व विशेषज्ञों की राय से बनने लगी है। इसलिए सबसे अहम होगा कि राजकोषीय घाटे और जीडीपी का वास्तविक अनुपात इस बार कितना रहा और नए वित्त वर्ष के लिए उसका अनुमान क्या है। लेकिन हमारे लिए कहीं ज्यादा अहम है कि टैक्स-जीडीपी का अनुपात। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

हमारे बैंकिंग क्षेत्र पर डूबत ऋणों का साया लहरा रहा है। रिजर्व बैंक ने इनके प्रावधान का जो नियम बनाया है, उससे अगले एक साल में बहुत सारे बैंकों का मुनाफा सफाचट हो जाएगा। सबसे बुरा असर सरकारी बैंकों पर पड़ेगा। इनमें से बहुतों का मुनाफा इसी साल 30-70% घट सकता है। निजी क्षेत्र के बैंक भी अनर्जक ऋणों के लपेटे में हैं। लेकिन इनमें से एक बैंक मजबूती से डटा है। आज तथास्तु में वही बैंक…औरऔर भी

हर तरह की कंपनियों के शेयरों में ट्रेड करनेवाले लोग अलग-अलग होते हैं। जो अल्गोरिदम ट्रेडिंग करते हैं, वे निफ्टी या सेंसेक्स से बाहर की कंपनियों को हाथ नहीं लगाते। मिड कैप या स्मॉल कैप स्टॉक्स में अलग तरह के ट्रेडर काम करते हैं। फार्मा, इंफ्रा या रीयल एस्टेट में अलग किस्म के पेशेवर ट्रेडरों की दिलचस्पी होती है। इसीलिए इन स्टॉक्स की चाल अलग होती है। यह सच हमें समझना ज़रूरी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमें मुख्य रूप से एनएसई में लिस्टेड लगभग 1600 कंपनियां पर ही ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनमें सक्रियता ज्यादा होती है और वे अमूमन बीएसई में भी लिस्टेड होती हैं। आप गौर करें तो पाएंगे कि सूचकांकों की चाल, उसमें शामिल कंपनियों की चाल और सूचकांकों से बाहर की कंपनियों की चाल एक जैसी हो, यह ज़रूरी नहीं। ऐसे में हमें ठोंक-बजाकर ट्रेडिंग के लिए 20 से 25 कंपनियां चुन लेनी चाहिए। अब देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

दुनिया के सामने अपनी आर्थिक चुनौतियां हैं तो भारत की अर्थव्यवस्था के सामने अलग चुनौतियां हैं। सरकार इनसे कैसे निपटती है, इसी पर बाज़ार की अगली चाल निर्भर है। जिस इंफ्रास्ट्रक्चर को चढ़ाने की बात हो रही थी, उसके विकास से जुड़ी प्रमुख सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स के शेयर एक-दो नहीं, दस साल की तलहटी पर आ चुके हैं। अभी इसके 30% और गिरने की बात की जा रही है। अब आजमाते हैं बुध की बुद्धि…औरऔर भी