दुनिया के मशहूर ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का कहना है कि हमें उस रुझान को पकड़ना है जिसका आधार झूठा है और उसके खिलाफ दांव लगाना है। यह वही मौका होता है जब रुख पलटनेवाला होता है। रुझान के साथ चलकर बहुत मामूली मुनाफा कमाया जा सकता है और अक्सर तगड़ा झटका लग जाता है। लेकिन झूठे रुझान के खिलाफ सही दांव लगाने की कला आ जाए तो कोई भी सोरोस बन सकता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में लालच व डर की दो प्रमुख भावनाओं का व्यापार चलता है। भावनाओं में बहने के मामले में हम सभी मूर्ख हैं। हममें से कुछ लोग ज्यादा मूर्ख होते हैं, कुछ लोग कम। इनमें बुद्धिमान इंसान वो जो जानता है कि वो मूर्ख है। दरअसल, यहीं से वो अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाने की क्षमता विकसित करता है और दूसरों की भावनाओं का फायदा उठाकर बाज़ार से कमाने लगता है। अब निकालते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

तैरने का सिद्धांत जानकर अगर तैरना आ जाता तो हर कोई तैराक बन जाता। सिद्धांत अपनी जगह है और व्यवहार अपनी जगह। हर सिद्धांत व्यवहार से निकलता है और बाद में व्यवहार की सेवा कर पुख्ता बनता है। ट्रेडिंग के सारे सिद्धांत और दांवपेंच आपको किताबों में मिल जाएंगे। इंटरनेट ऐसी जानकारियों से पटा पड़ा है। लेकिन कठिन व लंबे अभ्यास के बाद ही हम उसे अपने काम का बना पाते हैं। अब पकड़ें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

दुनिया के सबसे बुरे निवेशकों में बड़े-बड़े विद्वान, अर्थशास्त्री व वैज्ञानिक तक शामिल है। आइजैक न्यूटन का धन जब ब्रिटेन की साउथ सी कंपनी में साल 1720 में डूब गया तो उनका कहना था – मैं नक्षत्रों की गति की गणना कर सकता हूं, लेकिन इंसानों के पागलपन की नहीं। शेयर बाज़ार में अपना और दूसरों का धन डुबाने वालों में नोबेल विजेता माइरॉन शोल्स व रॉबर्ट मेर्टन भी शामिल हैं। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी