कोई भी अर्थव्यवस्था नई रिसर्च, नए आविष्कार और नई चीजें लाने या नवाचार पर जोर देने से बढ़ती है। लेकिन भारत बिजनेस करने की आसानी में इधर थोड़ा सुधरने के बावजूद वैश्विक नवाचार सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स) में 2007 के 23वें स्थान से खिसककर 2015 में 81वें स्थान पर पहुंच गया है। इसकी खास वजह यह है कि भारत में सरकार के साथ-साथ कॉरपोरेट क्षेत्र भी रिसर्च व अनुसंधान (आर एंड डी) पर खर्च घटाता जा रहाऔरऔर भी

इंसान का बुनियादी स्वभाव है कि वो सोचता है हादसा दूसरों के साथ होगा, उसके साथ नहीं। इसी सोच पर चलनेवाले बहुतेरे ट्रेडर मन ही मन स्टॉप लॉस लगाते हैं, जबकि सौदे के ऑर्डर के साथ ही उसे सिस्टम में डाल देना चाहिए। ऑनलाइन ट्रेडिंग में इसकी व्यवस्था है। साथ ही उसमें ऐसे अलॉर्म की भी व्यवस्था है कि जब भाव आपकी गणना के माफिक पहुंच जाए तो सिस्टम आपको अलर्ट कर दे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

निवेश में नियम है कि पहले कंपनी अच्छी तरह ठोंक-बजाकर चुनो। फिर कई महीने व साल तक निश्चिंत हो जाओ। इसी तरह स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड में भी बाज़ार को दिन में एक ही बार देखने के नियम का पालन करें। ट्रेडिंग करने लायक शेयर चुनें, अपनी पोजिशन चेक करें और अगले दिन शाम तक निश्चिंत हो जाएं। इससे फालतू का तनाव बच जाता है और आप सुसंगत निर्णय ले पाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

टेक्नोलॉज़ी ने बहुत सारी चीजें आसान कर दी हैं। लेकिन ध्यान भटकाने के साधन भी बढ़ा दिए हैं। बाज़ार में हर किसी के पास स्मार्टफोन है। फेसबुक से लेकर ट्विटर तक फैला नेटवर्क है। ऐसे में एक काम पर फोकस करना बहुत मुश्किल है। हमारी इच्छा-शक्ति भी अक्सर जवाब दे देती है। ऐसे में कुछ साधनों को छोड़ना ही उचित है। जैसे, ट्रेडिंग के लिए स्मार्टफोन के बजाय कंप्यूटर को ही तवज्जो दें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

घर का झगड़ा हो या कोई और लफड़ा। अगर आप तनाव में हों तो कड़ा नियम बना लें कि उस दिन ट्रेडिंग को हाथ नहीं लगाना है। असल में ट्रेडिंग अपने-आप में तनावपूर्ण काम है। इसलिए हमें दूसरी चीजों का तनाव न्यूनतम रखना चाहिए। नहीं तो आपके सीधे दांव भी उल्टे पड़ सकते हैं। ध्यान दें, ट्रेडिंग जूडो-कराटे जैसा खेल है जहां जो जितना शांत है, उसके जीतने की संभावना उतनी ज्यादा है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी