पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की बड़ी मुश्किल आसान कर दी है। अब शेयर बाजारों में लिस्टेड कोई भी कंपनी न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक शेयरधारिता हासिल करने के लिए सीधे अपने शेयर बेच सकती है। इसके लिए उसे कोई पब्लिक इश्यू लाने की जरूरत नहीं होगी। वह ऐसा इंस्टीट्यूशन प्लेसमेंट प्रोग्राम (आईपीपी) या स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए ब्रिकी प्रस्ताव लाकर कर सकती है। सेबी के बोर्ड ने मंगलवार को अपनी बैठक मेंऔरऔर भी

सरकार की योजना है कि डाकखानों का इस्तेमाल उन इलाकों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की है, जो अभी तक इससे वंचित हैं। नए साल में इस योजना को अमली जामा पहनाए जाने की उम्मीद है। संचार मंत्रालय ने इस आशय का प्रस्ताव मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया है। इस योजना के तहत 1.55 लाख डाकखानों से बैंकों का काम लेने का भी प्रस्ताव है ताकि ग्रामीण इलाकों में सरकार के वित्तीय समावेशऔरऔर भी

इस समय हम वैज्ञानिक अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र एक फीसदी खर्च कर रहे हैं। इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में हमें कम से कम दो फीसदी करना होगा। यह कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। वे मंगलवार को भुवनेश्वर के आईआईटी परिसर में 99वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि चीन इधर विज्ञान के क्षेत्र में भारत से आगे बढ़ गया है।औरऔर भी

बाजार लोगों की सोच का गुलाम नहीं है। दिसंबर का महीना मंदड़ियों की जकड़ में रहा, जबकि बाजार के लोग अच्छी रैली की उम्मीद कर रहे थे। जनवरी में बाजार के लोग 10 फीसदी गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट की व्यवस्था के चलते बाजार वर्तमान सेटलमेंट के अंतिम दिन 25 जनवरी तक निफ्टी को 5000 तक ले जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे जो चाहते हैं, उन्हेंऔरऔर भी

दिसंबर के दूसरे पखवाड़े (16 दिसंबर से 30 दिसंबर) के दौरान देश में आयातित कच्चे तेल की लागत करीब एक फीसदी बढ़ चुकी है। तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 388 करोड़ रुपए प्रतिदिन हो चुकी है। लेकिन सरकार राजनीतिक वजहों से इन कंपनियों को पेट्रोल के मूल्य तक बढ़ाने की इजाजत नहीं दे रही है। वैसे तो पेट्रोल के मूल्य से सरकारी नियंत्रण जून 2010 से ही हटाया जा चुका है। लेकिन सबसे बड़ी शेयरधारक होने के नातेऔरऔर भी

शेयर बाजार हमेशा कल की सोचकर चलता है। किसी भी स्टॉक के आज के भावों में कल की संभावना निहित होती है। लेकिन कल तो बड़ा अनिश्चित है। उसके बारे में कुछ भी कहना सही निकले, यह कतई जरूरी नहीं। ऐसे में हम जैसे आम निवेशकों के लिए सही यही लगता है कि कल की छोड़कर वर्तमान में जीना सीखें। कंपनी का कल क्या होगा, यह बाद में देखा जाएगा। निवेश करते वक्त यह देख लेना जरूरीऔरऔर भी

विचार किसी लता की तरह हैं जिन्हें अगर बाहर का कोई सहारा न मिले तो उनका बढ़ना रुक जाता है। इसलिए विचारों को बराबर व्यवहार के धरातल पर कसते रहना चाहिए। नहीं तो बे-काम हो जाते हैं।और भीऔर भी