विज्ञान में 60% पीएचडी महिलाएं बेरोजगार

इस समय हम वैज्ञानिक अनुसंधान पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र एक फीसदी खर्च कर रहे हैं। इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में हमें कम से कम दो फीसदी करना होगा। यह कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। वे मंगलवार को भुवनेश्वर के आईआईटी परिसर में 99वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।

उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि चीन इधर विज्ञान के क्षेत्र में भारत से आगे बढ़ गया है। उनका कहना था, “पिछले कुछ दशकों में विज्ञान जगत में भारत की स्थिति अपेक्षतया नीचे चली गई है और चीन जैसे देश ऊपर आ गए हैं। अब स्थिति बदल रही है, लेकिन जो कुछ हमने हासिल किया है, हम उससे संतुष्‍ट नहीं हो सकते। भारतीय विज्ञान की छवि बदलने के लिए हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है।”

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एक गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रकाशित एक अध्‍ययन के मुताबिक विज्ञान में पीएचडी करनेवाली 60 फीसदी महिलाएं बेरोजगार हैं। यह निष्कर्ष सर्वेक्षण में शामिल करीब 2000 महिलाओं से बातचीत के बाद सामने आया। उनकी बेरोजगारी का मुख्‍य कारण रोजगार के अवसरों की कमी है। बहुत कम मामलों में इसके लिए पारिवारिक कारण बताए गए। इससे पता चलता है कि संस्थानों की चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की आवश्‍यकता है और स्त्री-पुरूष को बराबरी का दर्जा देना महत्‍वपूर्ण है।

उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान पर भारतीय कंपनियों का योगदान बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री का कहना था, “यह एक तरफ की विडम्‍बना है कि जनरल इलेक्ट्रिक और मोटोरोला जैसी विदेशी कंपनियों ने भारत में विश्वस्तर के टेक्‍नोलॉजी हब विकसित किए हैं, जबकि संभवतः दवा उद्योग को छोड़कर हमारे अपने अन्‍य उद्योग ऐसा नहीं कर सके हैं।”

प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सरकार सुपर कंप्यूटिंग में राष्ट्रीय क्षमता और सामर्थ्य के विकास के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसे भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु द्वारा तकरीबन 5000 करोड़ रुपए की लागत से कार्यान्वित किया जाएगा। साथ ही तमिलनाडु के थेनी ज़िले में 1350 करोड़ रुपए की लागत से एक न्यूट्रिनो वेधशाला स्थापित करने का प्रस्ताव है ताकि ब्रहमांड की रचना करने वाले मौलिक तत्वों का अध्ययन किया जा सके। भूविज्ञान विभाग ने भारतीय मानसून से संबंधित भविष्‍यवाणियों में सुधार के लिए एक मानसून मिशन की शुरूआत की है।

1 Comment

  1. Science is a big patriarchal establishment, unbelievably more than others, and more so in India. Even out of 40% who are employed, are on temporary positions like Research Associate, pool officers, or scientist fellows or temporary lecturers. The permanent employment in bigger universities and prestigious institutes is mostly based on family or political connections and due to personal favors of all kinds (including sexual favors).

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