ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन (आइबॉक) के आरोपों का ऐसा जबरदस्त असर हुआ कि मंगलवार को निजी क्षेत्र के धनलक्ष्मी बैंक के शेयर खाक में मिल गए। दोपहर सवा बजे के आसपास उसके शेयर कल के बंद भाव 71.60 रुपए से 24.23 फीसदी गिरकर 54.25 रुपए पर पहुंच गए, जो पिछले 52 हफ्तों का ही नहीं, मई 2009 के बाद का उसका नया न्यूनतम स्तर है। हालांकि बाद में बैंक प्रबंधन की साफ-सफाई के बाद शेयर थोड़ाऔरऔर भी

मारुति सुज़ुकी के मानेसर संयंत्र में कर्मचारियों और प्रबंधन में तनातनी जारी है। प्रबंधन का आरोप है कि कर्मचारियों ने पूरे संयंत्र पर कब्जा कर लिया है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन पहले मान चुकी बातों से पीछे हट रहा है और उनकी एकता को तोड़ने में लगा है। कर्मचारियों का आरोप है कि मारुति प्रबंधन 1500 अस्थायी कर्मचारियों को काम पर वापस नहीं ले रहा है और जब तक ये नहीं होगा, तब तकऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर के अनुमानों पर लगता है, जैसे कोई जंग छिड़ी हुई है। उधर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स की भारतीय सब्सिडियरी क्रिसिल ने इस साल देश के आर्थिक विकास दर का अनुमान 8 फीसदी से घटाकर 7.6 फीसदी कर दिया, इधर सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आश्वस्त करना पड़ा कि दुनिया में आर्थिक सुस्ती के बावजूद हम इस साल करीब आठ फीसदी आर्थिक विकास दर हासिल कर लेंगे। बता दें कि अगस्तऔरऔर भी

दुनिया में कही भी कोई क्रिकेट टेस्ट मैच 7.50 लाख पाउंड (करीब 5.75 करोड़ रुपए) में फिक्स कराया जा सकता है। इस बात का खुलासा लंदन की एक अदालत में सुनवाई के दौरान पेश एक वीडियो में हुआ जिसमें एक खेल एजेंट ने  अंडरकवर पत्रकार से यह बात कही है। खेल एजेंट ने दावा किया है कि वह छह पाकिस्तानी खिलाड़ियों के माध्यम से क्रिकेट मैचों के परिणाम को फिक्स कर सकता है। रूपर्ट मरडोक के बंदऔरऔर भी

कल निफ्टी में 4990 और 5030 के आसपास किए गए शॉर्ट सौदे अभी तक काटे नहीं गए हैं। कारण, बहुत से मंदड़िए मानते हैं कि बाजार गिरकर 4700 तक जाएगा क्योंकि कल आ रहे इनफोसिस के नतीजे, हो सकता है कि अच्छे न रहें। ब्याज दरों के बढ़ने से मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को तगड़ी चपत लगी है। वहीं रुपए का कमजोर होना इनफोसिस की भावी संभावनाओं के लिए सुखद है। इनफोसिस ने जिस तरह से रुपए की विनिमयऔरऔर भी

इस समय केंद्रीय कृषि मंत्रालय देश भर में खेती-किसानी से जुड़ी 19 तरह की 50 से ज्यादा स्कीमें चलाता है। लेकिन अगले साल 2012 से शुरू हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना में इनकी संख्या घटाकर मात्र आठ कर दी जाएगी। ये वैसी स्कीमें हैं जिन्हें केंद्र सरकार प्रायोजित करती है। बाकी स्कीमों का जिम्मा राज्य सरकारों पर छोड़ दिया जाएगा। वे चाहें तो चलाएं और चाहें तो बंद कर दें। यह स्पष्ट किया है कृषि सचिव पीऔरऔर भी

आप से यह साझा करने में मुझे कोई हर्ज नहीं लगता कि मैं भी एक छोटा निवेशक हूं। साल 2005 से निवेश करके सीखने-समझने की कोशिश में लगा हूं। हमेशा समझदारी से, पढ़-लिखकर निवेश करता हूं। खुद के फैसले पर कमाया है। औरों के कहने पर घाटा खाया है। पहले बड़े नामों पर भरोसा करता था। अब नहीं करता क्योंकि दूध का जला छाछ भी फूंककर पीता है। इकनॉमिक्स टाइम्स की इनवेस्टर गाइड में पहले एक इनसाइडरऔरऔर भी

पहले स्वीकार तो करें कि आप सब कुछ नहीं जानते, तभी जाकर नया जानने की प्रक्रिया शुरू होगी। नहीं तो आप हर नए ज्ञान की हामी अपने पुराने ज्ञान से भराते रहेंगे और गाड़ी जहां की तहां ही पड़ी रहेगी।और भीऔर भी