अण्णा हजारे के समर्थन में देश भर से भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए उठ रही आवाज का साथ हिंदी के उन साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों ने भी दिया है जो अमूमन गोष्ठियों व सेमिनारों में जुगाली करते रहते हैं। उनका कहना है कि लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनने वाली समिति में जनता के बीच से 50 फीसदी लोग होने चाहिए। जानेमाने आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने कहा, ‘‘अण्णा हजारे की जन लोकपाल संबंधी मांग बहुतऔरऔर भी

भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे के आमरण अनशन को मिल रहा जन-समर्थन तीन दिनों में रंग लाने लगा है। दो दिन पहले तक इस अनशन को अनावश्यक व असामयिक बतानेवाली कांग्रेस के स्वर बदल गए हैं और यूपीए सरकार लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए संयुक्त समिति बनाने को तैयार हो गई है। वह इस पर भी तैयार है कि नया लोकपाल विधेयक संसद के आनेवाले मानसून सत्र में पेश कर दिया जाएगा। लेकिन वहऔरऔर भी

बाजार के लोगों में डर बना हुआ है कि इसमें कभी भी करेक्शन आ सकता है, गिरावट आ सकती है। जब तक लोगों में यह डर कायम है और बहुत सारे शॉर्ट सौदे हुए पड़े हैं, तब तक बड़ा करेक्शन आने की कोई गुंजाइश नहीं है। हां, थोड़ा-बहुत ऊपर नीचे हो ही सकता है। फिर भी सावधानी बरतनी जरूरी है। हेजिंग जरूरी है यानी एक जगह का घाटा दूसरी जगह के भरने का इंतजाम जरूरी है। यकीनऔरऔर भी

भारत फोर्ज एक दशक पहले तक महज एक ऑटो कंपोनेंट कंपनी हुआ करती थी। लेकिन अब वह तेल व गैस, रेलवे, बिजली और एयरोस्पेस तक के साजोसामान व उपकरण बनाने लगी है। उसने हाल ही में बिजली क्षेत्र के अहम उपकरण बनाने की शुरुआत की है। धारे-धीरे वह बड़ी इंजीनियरिंग कंपनी का स्वरूप अख्तियार करती जा रही है। यूं तो अब भी बड़ी कपनी है। कल्याणी समूह की अगुआ कंपनी है। वित्त वर्ष 2009-10 में उसने 1856.40औरऔर भी

व्यक्ति की नैतिकता हो सकती है। लेकिन सरकारों की कोई नैतिकता नहीं होती। सत्ता की चंडाल चौकड़ी को बचाना ही उसका चरित्र है। हां, वह अवाम की निगाह में जरूर नैतिक दिखना चाहती है।और भीऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अण्णा हजारे का खुला पत्र। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन पर कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार की प्रतिकूल टिप्पणियों ने सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे को आहत कर दिया है। इसके बाद उन्होंने बुधवार, 6 अप्रैल को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम दो पन्नों का एक खुला पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री ने गुजारिश की है कि वे आंदोलन में दोष निकालने और इसके पीछे किसी साजिश के संदेह से बचें। उनका कहना है किऔरऔर भी

कृषि मंत्री शरद पवार ने अण्णा हजारे के खुलकर सच बोलने के बाद भ्रष्टाचार पर बने मंत्रियों के समूह (जीओएम) से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन हजारे का कहना है कि पवार को मंत्री पद से भी इस्तीफा दे देना चाहिए। पवार के इस्तीफे की खबर मिलने के बाद हजारे ने कहा, “जब वे मुख्यमंत्री थे, तब मैने पद्मश्री लौटा दिया था। मंत्रियों के समूह से पवार के इस्तीफा दे देने से हमारी समस्या सुलझी नहीं है।औरऔर भी

फसल वर्ष 2010-11 (जुलाई-जून) में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 2358.8 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का अनुमान है कि 2010-11 में गेहूं और दालों का उत्पादन अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाएगा। कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को राजधानी में आयोजित ‘खरीफ कांफ्रेंस’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘तीसरा अग्रिम अनुमान हमारे पास आ चुका है। इससे पता चलता है कि इस साल 2358.8 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होगा, जो कि अबऔरऔर भी

अमेरिका की पूंजी बाजार नियामक संस्था, एसईसी (सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) ने प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की पांच भारतीय सहयोगी फर्मों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बता दें कि सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज में घोटाले के दौरान प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स से जुड़ी फर्में ही उसके लिए स्वतंत्र ऑडिटर का काम कर रही थीं। पीडब्ल्यूसी की इन भारतीय सहयोगी फर्मों पर लगातार सत्यम के वित्तीय खातों में गड़बड़ी वाला ऑडिट करने का आरोप लगता रहा है। इस वजहऔरऔर भी

कहते हैं कि ग्राहक भगवान होता है पर अभी कुछ समय पहले तक भारत की बीमा कंपनियों का सोचना इससे उलट था। उनके लिए पॉलिसीधारक ऐसा निरीह प्राणी होता था जो शायद परेशानी सहने के लिए अभिशप्त है। लेकिन बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीए या इरडा) की पहल से अब माहौल बदल चुका है। कैसी समस्याएं: अमूमन जीवन बीमा पॉलिसीधारकों को जो समस्याएं सताती हैं उनमें खास हैं – पॉलिसी बांड नहीं मिला, गलत पॉलिसी बांडऔरऔर भी