खुद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अब स्वीकार कर लिया है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार माल व सेवा कर (जीएसटी) को 1 अप्रैल 2011 से लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने बुधवार को मुंबई में इनकम टैक्स, कस्टम्स व सेंट्रल एक्साइज के चीफ कमिश्नरों और कमिश्नरों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने अपनी तरफ से जीएसटी के लिए संविधान संशोधन विधेयक को संसद के मानसून सत्र में लाने की हरसंभव कोशिश की। आपऔरऔर भी

जितना बड़ा जोखिम, उतना बड़ा बीमा। दुनिया ने 1 सितंबर की तारीख को अब तक का सबसे बड़ा जोखिम झेला है क्योंकि दूसरा विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 को शुरू हुआ था। लेकिन देश में भी 1 सितंबर की तारीख और बीमा उद्योग के बीच गहरा रिश्ता है। 1 सितंबर 2000 को भारतीय बीमा उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खोला गया। 1 सितंबर 2010 से यूलिप के कायाकल्प के लिए इरडा के नए दिशानिर्देश लागू हुए हैं।औरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने 1 सितंबर 2010 से लागू नए नियमों को पूरा करनेवाले 51 यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) उत्पाद मंजूर कर दिए हैं। इरडा के चेयरमैन जे हरिनारायण ने बुधवार को मुंबई में एसोचैम द्वारा आयोजित ग्लोबल इंश्योरेंस समिट में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके पास कुल 68 यूलिप के प्रस्ताव आए थे, जिनमें से 51 को मंजूरी दे दी गई है। इनमें से दो पेंशन प्लान हैं। एक प्लान एलआईसीऔरऔर भी

देश में व्यावसायिक दुश्मनी के मामलों में इजाफा, कंपनियों को ग्रामीण व अशांत इलाकों में होनेवाली समस्याएं, अपहरण की बढ़ती वारदातों और भारतीय मालवाहक जहाजों को विदेशी समुद्री लुटेरों से पल-पल मंडराते खतरे के मद्देनजर आज के जमाने में अपहरण व फिरौती बीमा की जरूरत बढ़ने लगी है। और इस जरूरत को पूरा करती है किडनैपिंग एंड रैन्सम इंश्योरेंस पॉलिसी या छोटे में के एंड आर इंश्योरेंस पॉलिसी। बड़े काम की पॉलिसी: आज का कॉरपोरेट इंडिया इसऔरऔर भी

बड़े अफसोस की बात है कि छोटे हमेशा छोटा ही रहना चाहते हैं और उनमें बड़ा, समझदार व जानकार बनने की कोई इच्छा नहीं है। वे अपना दायरा तोड़ने को तैयार नहीं हैं। अब भी निवेश करने से पहले रिसर्च की अहमियत नहीं समझते। हमने ओएनजीसी के 800 रुपए रहने पर अपनी रिपोर्ट आपको दी होती तो रिसर्च की लागत आज शायद शून्य हो जाती। हम कोई सूचना सार्वजनिक होने से काफी पहले अपनी रिसर्च रिपोर्ट लेऔरऔर भी

तलहटी पर खरीदने का अपना सुख होता है। हां, इस सुख में थोड़ा दुख तब हो जाता है जब शेयर अगले दिन या उसके अगले-अगले दिन नई तलहटी पकड़ लेता है। ऐसे में रणनीति थोड़ी-थोड़ी खरीद की होनी चाहिए। जितना गिरता जाए शेयर, हम खरीदते जाएं और इस तरह अपनी औसत लागत कम करते जाएं। आप बीएसई या एनएसई में शाम तो देख लीजिए कि कौन-सा शेयर न्यूनतम स्तर पर पहुंचा है। उसके बाद देखिए कि कंपनीऔरऔर भी

हम सभी बचपन से लेकर बड़े होने तक सुरक्षा के आदी हो जाते हैं। बचपन में मां-बाप की सुरक्षा, बड़े होने पर नौकरी की सुरक्षा। लेकिन बहुत सारी अनुभूतियां सुरक्षा का दायरा तोड़े बिना नहीं मिलतीं और हम अधूरे रह जाते हैं।और भीऔर भी