रिलायंस इंडस्ट्रीज धीरूभाई के जमाने से ही शेयर बाजार की उस्ताद कंपनी है। शेयर बाजार के ऐसे-ऐसे खेल उसकी अंगुलियों के इशारों पर चलते हैं जिनकी हवा बड़े-बड़ों तक को नहीं लग पाती। इधर उसके शेयर 31 अगस्त को 915 तक जाने के बाद फिर से उठना शुरू हुए हैं और अब 1042.90 रुपए तक चले गए हैं। कैश सेगमेंट में बीएसई में रोजाना का औसत कारोबार 10-11 लाख शेयरों का रहता है तो एनएसई में 70-72औरऔर भी

सोमवार 20 सितंबर से शुरू हुआ हफ्ता 1995 के बाद से भारत के प्राइमरी बाजार का सबसे व्यस्ततम हफ्ता है। इस हफ्ते कैंटाबिल रिटेल व वीए टेक समेत आठ नई कंपनियों के आईपीओ खुल रहे हैं। इस हफ्ते पहले से खुले तीन आईपीओ शामिल कर दिए जाएं तो निवेश के लिए कुल 11 आईपीओ उपलब्ध हैं। साल 2007 में जब शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी का आलम था, तब भी एक हफ्ते में ज्यादा से ज्यादा 10औरऔर भी

स्टॉक एक्सचेंजों के स्वामित्व का आधार व्यापक होना चाहिए। उसमें विविधता होनी चाहिए ताकि इन व्यवस्थागत रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों को अच्छी तरह चलाया जा सके। यह राय है वित्तीय क्षेत्र की दो शीर्ष नियामक संस्थाओं – भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) की। स्टॉक एक्सचेंज पूंजी बाजार का हिस्सा हैं और उन पर सीधा नियंत्रण सेबी का है। इसलिए बैंकिंग नियामक का उनके स्वामित्व पर दो-टूक राय रखना काफी मायने रखता है।औरऔर भी

बाजार पर नाहक ही तेजी का सुरूर चढ़ा हुआ है। मेरा सुझाव है कि ट्रेडरों को इस सेटलमेंट में तब तक बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है जब बाजार में करेक्शन नहीं आ जाता। फिलहाल करेक्शन इसलिए नहीं आ रहा क्योंकि ट्रेडर अब भी हर बढ़त पर शॉर्ट हुए जा रहे हैं। इस दौरान अगर शॉर्ट सेल भी होती है तब भी आपको अफरातफरी मचाने की जरूरत नहीं है। बाजार खुद को करेक्शन के बिना सेंसेक्स केऔरऔर भी

जेबीएफ इंडस्ट्रीज (बीएसई कोड – 514034, एनएसई कोड – JBFIND) ने जून 2010 की तिमाही में अकेले दम पर 850.25 करोड़ रुपए की आय पर 31.64 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। अगर उसकी सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात की सब्सिडियरी कंपनियों का भी कारोबार शामिल कर दें तो इस दौरान उसकी समेकित आय 1414.47 रुपए और शुद्ध लाभ 54.86 करोड़ रुपए रहा है। बिक्री की तुलना में उसका लाभ नहीं बढ़ा है। कंपनी का ठीकऔरऔर भी

पुराने के भीतर नया पनपता रहता है। प्रकृति में पुराना हमेशा नए को जगह दे देता है। लेकिन समाज में पुराना अपनी जगह सहजता से छोड़ने को तैयार नहीं होता। इसलिए संघर्ष होता है, खून-खच्चर होता है।और भीऔर भी