गंजे को कंघी का क्या जरूरत और बच्चों को जीवन बीमा की क्या जरूरत? लेकिन जीवन बीमा कंपनियां अभी तक यूलिप के जरिए ऐसा ही करती रही हैं। खरीदनेवाला शुरू में एजेंट के झांसे में रहता है कि कैसे कुछ साल तक दिया गया 25-30 हजार रुपए का सालाना प्रीमियम बच्चे के बड़े होने पर एक-डेढ़ करोड़ में बदल जाएगा। बाद में होश आता है कि अरे, यह तो हमारे बच्चे का जीवन नहीं, मृत्यु बीमा बेचकरऔरऔर भी

देश की आधी से ज्यादा आबादी के दूरसंचार सेवाओं से जुड़ जाने के बावजूद इंटरनेट की पहुंच अभी तक बहुत सीमित है। ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या महज 92.4 लाख है। लेकिन ऑनलाइन सेवाओं का चलन बढ़ रहा है। 10 फीसदी टैक्स-रिटर्न ऑनलाइन भरे जा रहे हैं। रेलवे से लेकर प्लेन तक के 40 फीसदी टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। महानगरों में लोग सालोंसाल अपनी बैंक शाखा का मुंह तक नहीं देखते। शेयरों के बाद अबऔरऔर भी

एनएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) का बड़ा सीधा-सा हिसाब-किताब है। देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी है। 90 फीसदी पूंजी सरकार की लगी है। एलआईसी ने 5 फीसदी लगा रखा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने केवल 0.15 फीसदी लगा रखा है। बाकी अन्य निवेश संस्थाओं और जनता-जनार्दन के पास है। लेकिन इस जनता-जनार्दन के पास इसके केवल 1.18 फीसदी शेयर हैं। यानी, पब्लिक की कंपनी में पब्लिक ही नदारद है! आपको याद होगा कि इस सालऔरऔर भी

दिमाग भी क्या स्वामिभक्त और जिद्दी किस्म का जीव है! जिस ढर्रे पर चला दो, चलता ही रहता है। जिस काम में लगा दो, बिना पूरा किए मानता ही नहीं। आप सो जाते हो, लेकिन इस बेचैन आत्मा को चैन नहीं पड़ता।और भीऔर भी

देश में औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियों में सुधार के साथ कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरियां भी बढ़ने लगी हैं। जॉब पोर्टल नौकरी डॉट काम के अनुसार इस साल जून में कंपनियों ने पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 21 फीसदी ज्यादा नौकरियां दी हैं। नौकरी डॉट काम का मासिक जॉब इंडेक्स जून 2010 में 947 अंक पर पहुंच गया जबकि एक साल पहले यह 784 अंक पर था। जून के मासिक रोजगार सूचकांक में एक महीनेऔरऔर भी

विदेशी बाजार से अच्छी हवाएं आईं तो हमारा बाजार भी बढ़ गया। लेकिन यह बहुत तात्कालिक नजरिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के अपने फंडामेंटल इतने मजबूत हैं कि हमारे बाजार को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। अच्छा मानसून, पेट्रोलियम पदार्थों से मूल्य नियंत्रण हटाने जैसे साहसी सरकारी कदम, मुद्रास्फीति के दिसंबर तक 6 फीसदी पर आ जाने का भरोसा और इस साल कंपनियों की आय में 25 फीसदी से ज्यादा वृद्धि के संकेत। यह सारा कुछ कोराऔरऔर भी

वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने 22 जून को देश के बाहर अमेरिका में बयान दिया था कि रिटेल सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को क्रमबद्ध रूप से बढ़ाया जाएगा और इसके ठीक दो हफ्ते बाद ही वाणिज्य मंत्रालय के औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोलने पर 21 पन्नों का बहस-पत्र पेश कर दिया। इस पर 31 जुलाई तक सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया मांगी गई है।औरऔर भी

सरकार ने पेट्रोल का नया दाम निकाला तो कच्चे तेल की लागत 74.84 डॉलर (करीब 3517 रुपए) प्रति बैरल मानी थी। हर बैरल में 42 गैलन या 158.76 लीटर होते हैं। इस हिसाब से कच्चे तेल का प्रति लीटर मूल्य हुआ 22.15 रुपए। इस पर रिफाइनिंग लागत अधिक से अधिक 10% (2.15 रुपए) होती है। रिफाइनरी की पूंजी लागत के अंश व लाभ के लिए 6 रुपए और जोड़ दें तो पेट्रोल का दाम हुआ 30.30 रुपए/लीटर।औरऔर भी

गरवारे-वॉल रोप्स पुणे की कंपनी है। 1976 में बनी अच्छी और बाजार की मांग से जुड़ी टेक्सटाइल कंपनी है। कंपनी औद्योगिक इस्तेमाल वाले तरह-तरह के नेट व रोप्स बनाती है। अमेरिकी की फर्म वॉल इंडस्ट्रीज के साथ उसका गठबंधन है। हालांकि कंपनी की 23.71 करोड़ रुपए की इक्विटी में अमेरिकी फर्म का हिस्सा महज 0.02 फीसदी (3505 शेयर) है। भारतीय प्रवर्तक आर बी गरवारे की इक्विटी हिस्सेदारी 46.49 फीसदी है। कंपनी में एफआईआई का निवेश 4.48 फीसदीऔरऔर भी

थोड़े-थो़ड़े अंश में हम सब कुछ हैं। संत भी, अपराधी भी। बालक भी, वृद्ध भी। सांप भी, बिच्छू भी। बेध्यान न रहें तो अपना अंश बाहर दिखेगा और दूसरों का अंश अपने अंदर। ऐसा देखने से हर उलझन सुलझने लगती है।और भीऔर भी