बच्चे का जीवन बीमा है गंजे की कंघी

गंजे को कंघी का क्या जरूरत और बच्चों को जीवन बीमा की क्या जरूरत? लेकिन जीवन बीमा कंपनियां अभी तक यूलिप के जरिए ऐसा ही करती रही हैं। खरीदनेवाला शुरू में एजेंट के झांसे में रहता है कि कैसे कुछ साल तक दिया गया 25-30 हजार रुपए का सालाना प्रीमियम बच्चे के बड़े होने पर एक-डेढ़ करोड़ में बदल जाएगा। बाद में होश आता है कि अरे, यह तो हमारे बच्चे का जीवन नहीं, मृत्यु बीमा बेचकर गया है। सोचकर ही मन खराब हो जाता है। अरे, किसी तरह से बच्चा हमें इस दुनिया में रोता-बिलखता छोड़ गया है तो क्या हम उसकी बीमा से मिली रकम से अपनी सुरक्षा करेंगे? इसलिए बच्चे के लिए बीमा लेते समय कायदे से सोच लेना चाहिए कि हमें उसके लिए कौन-सा बीमा चाहिए।

पहली बात कि उसके लिए स्वास्थ्य बीमा जरूरी है जिसे आप पूरे परिवार की फ्लोटर पॉलिसी के साथ ले सकते हैं। अगर आप नौकरी कर रहे होते हैं तो वह दफ्तर से मिली मेडिक्लेम पॉलिसी में शामिल ही रहता है। फिर भी फ्लोटर पॉलिसी अलग से ले ही लेनी चाहिए। लेकिन जहां तक जीवन बीमा की बात है तो हमें बच्चे का नहीं, अपना बीमा कराना चाहिए। हम नहीं रहे तो बच्चे का क्या होगा, यह सोचना चाहिए। इसके लिए अपना टर्म इंश्योरेंस जरूरी है जिसमें कम प्रीमियम पर ज्यादा कवर मिलता है। कवर अपनी सालाना कमाई का पांच से दस गुना तो होना ही चाहिए ताकि हमारे न रहने पर परिवार की देखरेख कुछ सालों तक तो हो ही जाए।

बच्चे पर तो कोई वित्तीय रूप से निर्भर नहीं होता। इसलिए उसके जीवन की बीमा कराने का कोई तुक नहीं है। ध्यान रहे, जीवन बीमा उसी का कराना चाहिए जिस पर दूसरे लोगों की वित्तीय निर्भरता हो। इसलिए कोई भी एजेंट बच्चे के लिए कोई पॉलिसी बेचने आए तो उससे साफ-साफ समझ लेना चाहिए कि इससे बच्चे का क्या और कैसे हित होगा। आपको इस तरह योजना बनानी चाहिए कि जब तक आपकी संतान अपने पैरों पर न खड़ी हो जाए, तब तक उसे पूरा वित्तीय समर्थन मिलता रहे। इसलिए अपने लिए टर्म प्लान लें और बच्चे के लिए किसी म्यूचुअल फंड की दीर्घकालिक ग्रोथ स्कीम में निवेश करें।

बच्चों के लिए कुछ पॉलिसियां ऐसी भी हैं जिनमें आपके न रहने पर उसका प्रीमियम पॉलिसी की बाकी अवधि तक बीमा कंपनी भरती है। साथ ही मैच्योरिटी पर एकमुश्त रकम भी अलग से देती है। लेकिन ध्यान रहें कि ऐसा तभी होता है जब आप नियमित रूप से उसका प्रीमियम देते रहे हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि एजेंट समझा कर गया कि इसमें तो केवल तीन साल (सितंबर से पांच साल) तक प्रीमियम भरिए। बाकी कोई जरूरत नहीं है। अगर आप ऐसा करते हैं तो उस प्लान की बाकी अवधि के लिए बीमा कंपनी कोई प्रीमियम नहीं देगी।

कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि आप जब बच्चे के लिए कोई पॉलिसी अलग से लेते हैं तो उसका एक ही मकसद होना चाहिए कि आपके न रहने पर बच्चा कैसे स्वस्थ रहते हुए अपने करियर तक अच्छी तरह पहुंच सकता है। सेल्समैन का तो काम ही होता है गंजे की कंघी बेचना। लेकिन उसके बहकावे में आप तो मत आइए।

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