कॉरपोरेट दुनिया में हालात इतनी तेजी से बदल जाते हैं कि बहुत सावधान न रहिए तो चूक हो ही जाती है। हमने 17 जून 2010 को जब बसंत कुमार बिड़ला समूह की नामी कंपनी केसोराम इंडस्ट्रीज के बारे में लिखा था, तब उसका शेयर 328.95 रुपए पर था। शेयर की बुक वैल्यू इससे ज्यादा 335.97 रुपए थी। टीटीएम ईपीएस 51.88 रुपए तो शेयर मात्र 6.3 पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। लगा कि बिड़ला परिवार कीऔरऔर भी

ऐसी कंपनी जिसका नाम हो, लेकिन वह बदनाम न हो, उसके शेयरों में निवेश करना हमेशा सुरक्षित व लाभकारी होता है। आईएफबी इंडस्ट्रीज ने ऐसा ही नाम कमा रखा है, खासकर ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन में। वैसे, वह इसके अलावा भी कई उत्पाद बनाती है। उसकी छवि ऐसी बनी है जैसे वो कोई विदेशी कंपनी हो, जबकि हकीकत में वो एकदम देशी कंपनी है। हालांकि 1974 में उसकी शुरुआत स्विटजरलैंड की कंपनी हीनरिच श्मिड एजी के सहयोग सेऔरऔर भी

व्हर्लपूल ऑफ इंडिया का शेयर पिछले एक महीने में 18.87 फीसदी बढ़ा है। 21 मार्च को यह 243 रुपए था और 21 अप्रैल को 288.85 रुपए पर बंद हुआ है। साल भर पहले 22 अप्रैल 2010 को यह 172.55 रुपए पर था। उससे पहले 8 फरवरी 2010 को यह इससे भी नीचे 128 रुपए था। असल में यह शेयर 9 सितंबर 2010 को 338.50 रुपए का उच्चतम स्तर हासिल करने के बाद 2 फरवरी 2011 तक बराबरऔरऔर भी

सिर्फ बाजार भाव से नहीं पता चलता है कि कोई शेयर सस्ता है या नहीं। भाव बढ़ जाने के बावजूद वह सस्ता हो सकता है या महंगा। इसका पता इससे चलता है कि उसके मूल्यांकन का स्तर क्या है। और, मूल्यांकन का पैमाना है पी/ई अनुपात। यानी, बाजार भाव को उसके सालाना ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) से भाग देने पर निकला अनुपात। आप कहेंगे कि यह तो अलग-अलग कंपनियों की बात हुई। कंपनियों के किसी सेट काऔरऔर भी

कुछ लोगों को यकीनन बुरा लग सकता है कि जिस कंपनी की शुद्ध बिक्री दिसंबर 2010 की तिमाही में 287.49 करोड़ रुपए रही हो, जिसने पिछले वित्त वर्ष 2009-10 में 812.26 करोड़ की शुद्ध बिक्री हासिल की हो, उसके शेयर को चिरकुट क्यों कहा जा रहा है। लेकिन आम निवेशक के नजरिए से मुझे रोहित फेरो-टेक लिमिटेड एक चिरकुट कंपनी लगती है और उसका शेयर भी एकदम चिरकुट। वह भी तब, जब इसका ठीक पिछले बारह महीनोंऔरऔर भी

चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक इंटरनेशनल के बैंक रिसर्च प्रमुख पॉल शुल्टे ने ईटी नाऊ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि भारतीय बैंकों के स्टॉक्स दुनिया में सबसे महंगे हैं। भारतीय बैंक औसतन 15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे है, जबकि इंडोनेशिया के बैंक 13 और चीन के बैंक 9 के पी/ई अनुपात पर। पॉल शुल्टे ने एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई को महंगा बताया और एक्सिस बैंक के बारे में कहा कि जो लोगऔरऔर भी

एवेरॉन एजुकेशन का शेयर पिछले सात महीनों से कमोबेश एक ही स्तर अटका हुआ है। 17 सितंबर 2010 को 692.50 रुपए पर था। कल 18 अप्रैल 2011 को इसका बंद भाव 681.95 रुपए रहा है। हालांकि इस दौरान यह 7 अक्टूबर 2010 को 756.45 रुपए पर 52 हफ्ते का शिखर बना चुका है। लेकिन अब एक बार फिर इस शेयर में उठान का माहौल बन गया है। उसने कल ही भारत सरकार द्वारा गठित संस्थान नेशनल स्किलऔरऔर भी

मुथूत फाइनेंस। दो हाथी सूड़ से सूड़ टकराते हुए। बड़े-बड़े दावे। बड़े-बड़े विज्ञापन। पब्लिक से पैसे जो जुटाने हैं!! आईपीओ इसी सोमवार 18 अप्रैल को खुलेगा। कंपनी कहती है कि वह भारत की सबसे बड़ी गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनी है और हर दिन के उसके औसत कस्टमर 67,953 हैं। महीने, साल गिन लीजिए। अरे, जब इतने ही कस्टमर हैं तो पब्लिक को 5.15 करोड़ शेयर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ गई? एक तरफ कहती है कि वहऔरऔर भी

भविष्य को न देख सिर्फ वर्तमान को देखो तो चूक हो जाती है। खासकर शेयर बाजार में तो ऐसा ही होता है। मुझे 25 मार्च को ही डेवलमेंट क्रेडिट बैंक (डीसीबी) के बारे में लिखना था। इसका आगा-पीछा पता लगा लिया था। तब इसका 10 रुपए अंकित मूल्य का शेयर 44 रुपए पर चल रहा था। लेकिन लगा कि जो बैंक लगातार दो साल से घाटे में हो, जिसका इक्विटी पर रिटर्न ऋणात्मक हो, उसके बारे मेंऔरऔर भी

कल सुबह शुक्रवार, 15 अप्रैल को बाजार खुलने से पहले इनफोसिस टेक्नोलॉजीज के चौथी तिमाही के साथ-साथ वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजे आ चुके होंगे। तीन तिमाहियों के नतीजे सामने हैं तो चौथी तिमाही का रहस्य खुलने का इंतजार पूरे बाजार को है। उम्मीद का जा रही है कि नतीजे सकारात्मक रूप से चौंकानेवाले होंगे। कुछ इसी उम्मीद में पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इनफोसिस का शेयर 2.45 फीसदी बढ़ चुका है। 8 अप्रैल को इसका बंदऔरऔर भी