टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज। आईआईटी मुंबई के दो इंजीनियरों द्वारा 1972 में बनाई गई कंपनी। भारत सरकार से मान्यता प्राप्त 3-स्टार एक्सपोर्ट हाउस। 95 फीसदी आय निर्यात से। दुनिया भर में ड्रम क्लोजर की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता। अमेरिका से लेकर जर्मनी व चीन तक विस्तार। शेयर का भाव 52 हफ्तों की तलहटी 45.45 रुपए पर। बंद हुआ 45.95 रुपए पर, जबकि बुक वैल्यू ही है 131.45 रुपए। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ)औरऔर भी

आंध्रा पेट्रोकेमिकल्स ने दो दिन ही पहले जबरदस्त नतीजे घोषित किए हैं। उसने चालू वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 157.22 करोड़ रुपए की बिक्री पर 12.68 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है, जबकि साल भर पहले जून 2010 की तिमाही में उसने 72.96 करोड़ रुपए की बिक्री पर 4.31 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ ही कमाया था। हालांकि दोनों नतीजों की तुलना नहीं हो सकती क्योंकि पिछले साल संयंत्र के क्षमता विस्तार व आधुनिकीकरणऔरऔर भी

हर दिन 52 हफ्तों का पहला या आखिरी दिन होता है और हर दिन कोई कंपनी 52 हफ्ते का शिखर बनाती है तो कोई कंपनी 52 हफ्ते के रसातल पर चली जाती है। तो क्यों न हम रसातल में जानेवाली कंपनियों से कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर उन कंपनियों पर लगाएं तो अपनी संभावनाओं के दम पर इस पस्त बाजार में भी सीना तानकर बढ़ी जा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है कार्बोरनडम यूनिवर्सल। उसकेऔरऔर भी

अजंता फार्मा देश की दवा कंपनियों में धंधे के लिहाज 63वें नंबर पर है। छोटी कंपनी है। कुल बाजार पूंजीकरण 410 करोड़ रुपए का है। लेकिन काम जबरदस्त कर रही है। बीते हफ्ते गुरुवार, 28 जुलाई को उसने जून 2011 की तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक इन तीन महीनों में उसकी बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 29.52 फीसदी बढ़कर 98.29 करोड़ रुपए से 127.31 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 79.51औरऔर भी

शेयर तो हर कोई, जिसके पास भी डीमैट खाता है, आसानी से खरीद सकता है। लेकिन शेयरों से कमाई वही कर पाता है जो सही वक्त पर उन्हें बेच लेता है। ज्यादातर लोग तो हाथ ही मलते रह जाते हैं कि उस समय कितने टॉप पर गया था मेरा शेयर। काश, उस समय बेच लिया होता! मुश्किल यह है कि खरीदने की सलाह तो जगह-जगह से मिल जाती है। ब्रोकरों से लेकर हॉट टिप्स बांटनेवाली वेबसाइट्स औरऔरऔर भी

सीधी रेखा नहीं, लहरों की तरह चलते हैं शेयरों के भाव। 4 अक्टूबर 2010 को हमने पहली बार जब यूं ही चलते-चलते ग्लेनमार्क फार्मा का जिक्र छेड़ा था, तब यह 311.70 रुपए पर था। करीब दो महीने बाद 7 दिसंबर 2010 को 389.75 रुपए के शिखर पर चला गया। लेकिन करीब ढाई महीने बाद ही 28 फरवरी 2011 को 241.60 रुपए की घाटी में जा गिरा। अभी 16 मई 2011 को हमारे चक्री भाई ने जब इसेऔरऔर भी

बाजार में मिथ है कि एफआईआई जिस शेयर को खरीदते हैं, उसके भाव अपने-आप बढ़ जाते हैं। लेकिन सिर्फ यही कारक किसी शेयर को नहीं बढ़ा सकता। जैसे, मार्च 2011 के अंत तक अल्सटॉम प्रोजेक्ट्स इंडिया में एफआईआई की इक्विटी हिस्सेदारी 2.56 फीसदी थी, जबकि जून 2011 के अंत तक यह बढ़कर 4.10 फीसदी हो गई। जाहिर है कि एफआईआई की यह सारी खरीद 1 अप्रैल से 30 जून 2011 के बीच हुई होगी। लेकिन 1 अप्रैलऔरऔर भी

कहने को अलेम्बिक लिमिटेड 104 साल पुरानी 30 जुलाई 1907 को बनी भारतीय दवा कंपनी है। ललित मोदी की जगह आईपीएल के चेयरमैन व कमिश्नर बने चिरायु अमीन इसके सीएमडी हैं। एक संयंत्र वडोदरा (गुजरात) तो दूसरा संयंत्र बड्डी (हिमाचल प्रदेश) में है। दुनिया के लगभग 75 देशों में उसकी पहुंच है। कल उसने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। इनके मुताबिक जून 2011 में खत्म तिमाही में उसने 39.55 करोड़ रुपएऔरऔर भी

नेशनल पेरॉक्साइड 1954 में बनी नुस्ली वाडिया परिवार की कंपनी है। नुस्ली के बेटे नेस वाडिया इसके चेयरमैन हैं। कंपनी कल्याण (महाराष्ट्र) की फैक्टरी में तीन रसायन बनाती है – हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, सोडियम परबोरेट व पैरासेटिक एसिड बनाती है। लेकिन इसमें प्रमुख है हाइड्रोडन पेरॉक्साइड जिसमें देश का 40 फीसदी बाजार उसके हाथ में है। कंसोलिडेट आधार पर कंपनी वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी का ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 101.23 रुपए और स्टैंड-एलोन आधार पर 100.65 रुपएऔरऔर भी

इस बाजार की बलिहारी है। 10 जून को आईएफसीआई ने सूचित किया कि तीन-तीन एजेंसियों – इक्रा, केयर व ब्रिकवर्क रेटिंग ने उसकी रेटिंग बढ़ा दी है। लेकिन इस अच्छी खबर के ठीक तेरह दिन बाद 23 जून को आईएफसीआई का शेयर 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 42.55 रुपए पर पहुंच गया। महीने भर बाद अब भी उसी के आसपास डोल रहा है। शुक्रवार, 22 जुलाई को एनएसई (कोड – IFCI) में 46.85 रुपए और बीएसई (कोडऔरऔर भी