एचडीएफसी बैंक धंधे के मामले में देश में निजी क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। आईसीआईसीआई बैंक इससे ऊपर है। लेकिन बाजार पूंजीकरण में यह उससे भी ऊपर है। एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण इस वक्त 1,02,320 करोड़ रुपए है, वहीं आईसीआईसीआई बैंक का 89,762 करोड़ रुपए। दोनों ही बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में शामिल शेयर हैं। लेकिन जिस तरह अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की कुदृष्टि हमारे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ी है, उसमें हो सकता हैऔरऔर भी

जलजला आया हो तो मकान-दुकान छोड़कर कहीं खुले में चले जाना चाहिए और तेज-आंधी तूफान में कोई सुरक्षित कोना पकड़कर बैठ जाना चाहिए। हमारे शेयर बाजार में अभी कोई जलजला तो नहीं आया है। लेकिन सारा कुछ उड़ाकर ले जाती आंधियां जरूर चल रही हैं। तमाम शेयर अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुके हैं या पहुंचते जा रहे हैं। ऐसे में एक सुरक्षित कोना नजर आ रहा है डॉ. रेड्डीज लैब का। धंधा है तो जोखिम तोऔरऔर भी

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई), भारत सरकार की महारत्न कंपनी। साल भर पहले उसका शेयर दहाड़ रहा था। 6 अक्टूबर 2010 को 202.50 रुपए की अट्टालिका पर था। लेकिन बीते हफ्ते शुक्रवार 30 सितंबर से सरकारी खबरों के आधार पर उसे ऐसा धुना जा रहा है कि कल 3 अक्टूबर को वह 74.50 रुपए की घाटी में जा गिरा। पिछले एक महीने में इसे 91.60 रुपए से 18.66 फीसदी तोड़कर 74.50 रुपए तक ले आया गया है।औरऔर भी

एनसीएल इंडस्ट्रीज का नाम पहले नागार्जुन सीमेंट लिमिटेड हुआ करता था। पिछले 25 सालों से आंध्र प्रदेश में नागार्जुन ब्रांड का सीमेंट बेचती है। पिछले साल की जून तिमाही में 2.57 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन इस साल की जून तिमाही में 16.95 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। इस बार उसकी बिक्री भी पूरे 84.08 फीसदी बढ़कर 122.14 करोड़ रुपए हो गई है। लेकिन इन नतीजों का खास असर अभी तक उसके शेयरोंऔरऔर भी

कभी सोचा है आपने कि हर निवेशक वॉरेन बफेट बनना चाहता है और भारत ही नहीं, दुनिया भर में हजारों लोग वॉरेन बफेट की तरह निवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनमें से इक्का-दुक्का ही यह हुनर और कामयाबी हासिल कर पाते हैं। इसका कोई जादुई नहीं, सीधा-सरल कारण है। पहले कुछ उदाहरणों पर नजर। उन्होंने वॉशिंगटन पोस्ट में जो निवेश किया, वह 38 सालों में 73 गुना हो गया। कोकाकोला में अपना निवेश उन्होंनेऔरऔर भी

कहते हैं कि बाजार पीछे नहीं, आगे देखता है। लेकिन 105 साल के लंबे इतिहास वाले अच्छे-खासे जमे-जमाए कॉरपोरेशन बैंक में बाजार को ऐसा क्या दिख रहा है जो इसका शेयर दस महीने में घटकर आधा रह गया। जी हां, कॉरपोरेशन बैंक का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर 3 नवंबर 2010 को 814.85 रुपए तक चला गया था। लेकिन महीने भर पहले 23 अगस्त 2011 को 411 रुपए तक गिर गया। अब भी लगभग उसी स्तरऔरऔर भी

रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी), भारत सरकार की नवरत्न कंपनी। करीब साढ़े तीन साल पहले फरवरी 2008 में 105 रुपए पर आईपीओ आया था। लेकिन उसी साल वैश्विक मंदी का प्रकोप आ गया। लेहमान संकट के समय इसका शेयर नवंबर 2008 में 53 रुपए तक गिर गया। लेकिन फिर उठा तो साल भर पहले 11 अक्टूबर 2010 को 413.80 रुपए की चोटी तक जा पहुंचा। इसके बाद फिर गिरने लगा तो पिछले महीने 26 अगस्त 2011 को 162.51औरऔर भी

अरविंद कुमार आज बहुत खुश होंगे क्योंकि उन्होंने एसबीआई के शेयर 1890 रुपए के भाव से खरीद रखे है, जबकि कल ही यह 2.8 फीसदी बढ़कर 2005.90 रुपए तक चला गया। सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक में शामिल इस स्टॉक में डेरिवेटिव सौदों भी जमकर होते हैं। कल इसके सितंबर फ्यूचर्स के भाव 2000.50 रुपए पर पहुंच गए। हालांकि अक्टूबर फ्यूचर्स का भाव 1999.25 रुपए और नवंबर फ्यूचर्स का 2004.65 रुपए चल रहा है। शेयर का हालऔरऔर भी

इंड-स्विफ्ट लिमिटेड और इंड-स्विफ्ट लैबोरेटरीज दोनों ही एक समूह से वास्ता रखती हैं। चंडीगढ़ इनका मुख्यालय है। दवाएं बनाती हैं। लेकिन अलग-अलग लिस्टेड हैं। इंड-स्विफ्ट 1986 में बनी तो इंड-स्विफ्ट लैब्स 1995 में। धंधा दोनों का दुरुस्त चल रहा है। इंड-स्विफ्ट लिमिटेड ने बीते वित्त वर्ष 2010-11 में 894.16 करोड़ रुपए की आय पर 43.45 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। वहीं इंड-स्विफ्ट लैब्स ने इस दौरान 1031.21 करोड़ रुपए की आय पर 87.62 करोड़ रुपएऔरऔर भी

आपको याद होगा कि जब 30 जून 2010 को हमने जीआईसी हाउसिंग में पहली बार निवेश की सलाह दी थी तब उसका शेयर 104 रुपए के आसपास था। ठीक एक दिन पहले उसने तब तक के पिछले 52 हफ्तो का शिखर 106.45 रुपए पर बनाया था। फिर भी हमने कहा था कि इसे 150 रुपए तक पहुंचना चाहिए। और, वो चार महीने के भीतर 25 अक्टूबर 2010 को 161.55 रुपए के शिखर पर जा पहुंचा। चार महीनेऔरऔर भी