छह से 14 साल के बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) को लागू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन अब तक देश के 28 राज्यों व सात संघशासित क्षेत्रों में केवल 18 ने ही इस कानून को अधिसूचित किया है। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे अभी भी कानून नहीं बनाया जा सका है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से प्राप्त ताजा जानकारीऔरऔर भी

अगर कोई व्यक्ति केंद्र से लेकर पंचायत स्तर तक के निकाय द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण में मांगी गई सूचना देने से मना करता है या गलत सूचना देता है तो उसे छह महीने की सामान्य जेल या जुर्माना या दोनों की ही सजा हो सकती है। यह प्रावधान केंद्र सरकार सरकार द्वारा अधिसूचित सांख्‍यिकी संग्रहण अधिनियम, 2008 के अंतर्गत सांख्‍यिकी संग्रहण नियमावली, 2011 में किया गया है। बता दें कि संसद  ने 7 जनवरी, 2009 कोऔरऔर भी

भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हज़ारे और बाबा रामदेव के आंदोलन से बचाव की मुद्रा में आई यूपीए सरकार अब देश के गरीबों को पटाने में लग गई है। गुरुवार को कैबिनेट ने गरीब बुजुर्गों और बीड़ी मजदूरों पर करीब 3081 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने का फैसला किया है। इसमें गरीब बुजुर्गों पर 2770 करोड़ और बीड़ी मजदूरों पर 311 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हालांकि इन दोनों लोकलुभावन कदमों का प्रस्ताव वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसऔरऔर भी

गांधीवादी नेता अण्णा हज़ारे ने घोषणा की है कि अगर सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के मुद्दे पर जनता का साथ नहीं दिया तो वे 16 अगस्त से जंतर मंतर पर ‘देश की आजादी’ की दूसरी लड़ाई शुरू करेंगे। योगगुरू बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बुधवार को अपने सहयोगियों के साथ राजघाट पर अनशन शुरू करने के बाद दोपहर करीब सवा बारह बजे अपने संबोधन में हज़ारे नेऔरऔर भी

सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार गांधीवादी विरोध के तौरतरीकों को पचा नहीं पा रही है। यही वजह है कि उसने गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे को जंतर मंतर पर कल (बुधवार) को एक दिन विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। हज़ारे अब टकराव को टालने के लिए महात्मा गांधी की समाधि, राजघाट पर पर अनशन करेंगे। यह घोषणा हज़ारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी ने की। साथ ही उन्होंने जोर देकरऔरऔर भी

जो बाबा रामदेव शनिवार शाम तक केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के खुलासे के बाद भीगी बिल्ली बने नजर आ रहे थे, वे आधी रात की पुलिस कार्रवाई के बाद अब दहाड़ते शेर बन गए हैं। कांग्रेस और उसके पल्लू में प्रासंगिकता खोजते लालू यादव के अलावा सभी राजनीतिक दल बाबा व उनके समर्थकों पर हुई कार्रवाई को लोकतंत्र पर सांघातिक हमला बता चुके है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को घेरे में ले लिया है।औरऔर भी

बाबा रामदेव का सत्याग्रह अकाल मृत्यु का शिकार हो गया। योगगुरु हरिद्वार में अपने पातंजलि योगपीठ आश्रम वापस पहुंच चुके हैं। दिल्ली राज्य के नई दिल्ली जिले में धारा 144 लगा दी गई है क्योंकि पुलिस को इंडिया गेट, बोट क्लब या जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका थी, जो नई दिल्ली जिले के इलाके आते हैं। कुछ दिनों में यह आशंका खत्म होते ही धारा 144 भी हटा ली जाएगी। हुआ यह किऔरऔर भी

योगगुरु बाबा रामदेव ने दस सालों में जनता-जनार्दन में जो भी प्रतिष्ठा कमाई थी, उनकी एक चूक से वह एकदम मिट्टी में मिल गई। बाबा ने शुक्रवार को ही सरकार के साथ डील कर ली थी कि रामलीला मैदान में शनिवार सुबह को शुरू हुआ अनशन दोपहर तक खत्म कर देंगे, लेकिन 6 जून तक ‘तप’ जारी रहेगा। खुद बाबा रामदेव ने स्वीकार किया कि उनकी तरफ से संगठन के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने सरकार को इसऔरऔर भी

दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां एक ओर बाबा रामदेव नायक की भूमिका में हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार को खलनायक के रूप में पेश किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी के बावजूद बाबा रामदेव के प्रतिबद्ध समर्थकों ने समाज पर भ्रष्टाचार के असर को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न माध्यमों को अपनाया है। आंदोलन स्थल पर युवा समर्थक ‘कैन्वस’ और टीशर्ट पर पेंटिंग कर भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लिख रहे हैं। मैदान के प्रवेशऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 37वीं सालाना आमसभा (एजीएम) में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने उसकी तारीफ के पुल बांध दिए। सब बता डाला कि कितनी बड़ी कंपनी है, बराबर किस शानदार रफ्तार से हर मोर्चे पर बढ़ी है, वर्तमान कितना दमदार है और भविष्य कितना शानदार होगा। मुंबई के न्यू मरीन लाइंस के बिड़ला सभागार में जुटे शेयरधारकों ने तालियां भी बजाईं। लेकिन बाजार को मुकेश अंबानी के वाग्जाल में कुछ दम नहीं नजर आया। कंपनी का शेयर गुरुवारऔरऔर भी