हिन्डेनबर्ग की अशुभ छाया का डर बरकरार है। पूरे सितंबर भर रहेगा। दुनिया के बाजार गिरेंगे तो स्वाभाविक रूप से भारत पर भी असर पड़ेगा। वैसे भी हमारे एक बड़े फंड हाउस के प्रमुख कह चुके हैं कि बाजार में 10 फीसदी करेक्शन आना है। लेकिन कौन बेचेगा जिसके चलते यह करेक्शन आएगा? बीते शुक्रवार को बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 1.25 फीसदी गिर गया। इस हिसाब से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सौदों के ओपन इंटरेस्ट में कमी आनी चाहिएऔरऔर भी

क्या सितंबर में बाजार के धराशाई होने का हिन्डेनबर्ग अपशगुन सही साबित होगा या यह लेखक जो कह रहा है कि हमारा बाजार इस दौरान नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा? इसका फैसला तो सितंबर 2010 के अंत ही हो पाएगा। आज वो मौका नहीं है कि मैं बताऊं कि आपको क्या करना चाहिए। बस, थोड़ा इंतजार कीजिए। हकीकत आपके सामने होगी। अभी तो आप वाकई अवांछित बातों और विचारों को सुन-सुनकर डरे हुए होंगे। ऐसे में मेराऔरऔर भी

हमारी बाजार नियामक संस्था, सेबी और गरीब रिटेल निवेशक कितने असहाय हैं, इसे इंडिया फॉयल्स के स्टॉक से समझा जा सकता है। हम पहले भी लिख चुके हैं कि किस तरह इंडिया फॉयल्स के नए प्रवर्तक एस डी (Ess Dee) ग्रुप ने इसके शेयर खुले बाजार में 20 रुपए के भाव पर बेचे और इसका भाव 5 रुपए या उससे से भी नीचे ले गए। इसके बाद कुछ शेयरधारक कंपनी प्रबंधन से मिले तो उन्हें समझा दियाऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों में पिछले तीन दिनों से लांग पोजिशन को समेटा जा रहा है और नए शॉर्ट सौदे किए जा रहे हैं। मंदड़ियों को यकीन हो चला है कि सितंबर में हिन्डेनबर्ग अपशगुन घटेगा और उन्होंने बिना किसी भय के सारी शॉर्ट पोजिशन सितंबर तक बढ़ा दी है। अब वे दुनिया के बाजारों पर अपशगुन का कहर गिरने का इंतजार करेंगे ताकि भारतीय बाजार को गिराया जा सके। ज्यादातर फंड बराबर यही कहे जा रहे हैं किऔरऔर भी

बाजार में करेक्शन या गिरावट को लेकर और भी डराने वाली रिपोर्टें जारी की जा रही हैं। ऐसे में पहले से डरे हुए ट्रेडर और निवेशक डिलीवरी आधारित सौदों से बचने लगे हैं और बाजार में शॉर्ट करने के मौके तलाश रहे हैं। लेकिन यह सब रोलओवर की तकलीफ है जिसे हमें झेलना ही पड़ेगा। इसी माहौल में मंदडियों के हमलों के तमाम सिद्धांत फैलाए जा रहे हैं। लेकिन नया सेटलमेंट शुरू होते ही ये सारे सिद्धांतऔरऔर भी

सही स्टॉक, सही वक्त और सही ट्रिगर – ये तीन सही चीजें किसी भी शेयर की चाल के लिए बाजार के तीन तिलंगों से भी बेहतर संयोग का काम करती हैं। आईटीआई आज 10.7 फीसदी बढ़कर 46 रुपए पर पहुंच गया और बंद हुआ 5.42 फीसदी की बढ़त के साथ 43.80 रुपए पर। इस्पात इंडस्ट्रीज में तकरीबन छह महीनों से हम पूरे धैर्य के साथ इंतजार कर रहे थे और अब अंततः इस स्टॉक से सहवाग जैसीऔरऔर भी

इधर बॉम्बे डाईंग से लेकर रेमंड, सेंचुरी टेक्सटाइल, आलोक इंडस्ट्रीज और प्रोवोग जैसी कई टेक्सटाइल कंपनियों की जमीन का हिसाब-किताब निकाला जा रहा है और पंटर भाई लोग मान रहे हैं कि जमीन से इन कंपनियों में छिपा हुआ मूल्य निकलकर सामने आएगा और इनके शेयर नई पेंग भरेंगे। पिछले दिनों इनके शेयर बढ़े भी हैं। इसलिए नहीं कि उनके मूल व्यवसाय में कोई शानदार चीज हो गई है, बल्कि इसलिए कि इनके पास काफी जमीन हैऔरऔर भी

पहले ज्योतिष के आधार पर अफवाह फैलाई गई कि बाजार 13 अगस्त को धराशाई हो जाएगा। फिर 1937 में हादसे का शिकार हुए एक जर्मन जहाज हिन्डेनबर्ग के नाम पर बने टेक्निकल अपशगुन से डराया गया कि सितंबर में दुनिया के बाजार ध्वस्त हो जाएंगे। अब अपने यहां एक पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन चल रहा है जिसमें कहा गया है कि सेंसेक्स 18,600 से आगे नहीं जा सकता और 14,600 अंक तक गिरता चला जाएगा। इस ‘भविष्यवाणी’ कोऔरऔर भी

मैं काफी समय से आपको बता रहा था कि सीमेंट क्षेत्र में कोई सुस्ती नहीं है। हालांकि मानसून के दौरान कम उठाव के चलते पहली तिमाही बुरी रही है। सीमेट के दाम प्रति बोरी 20 रुपए गिर गए और सारे एनालिस्ट आपको इससे बाहर निकलने का रास्ता दिखाने लगे। लेकिन हमने नई हलचल को सबसे पहले पकड़ा और आज सीमेंट कंपनियों ने मुंबई में प्रति बोरी दाम 10 रुपए बढ़ा दिए। आप समझ सकते हैं कि मैंऔरऔर भी

मैं ये तो नहीं कहता कि एफआईआई मूरख हैं। आखिर वे हमारे बाजार की दशा-दिशा तय करते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें बहुत आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है या ऐसा भी हो सकता है कि वे आसानी से मूर्ख बनने का स्वांग करते हों। उन्होंने अपने इर्दगिर्द 200 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण की लक्ष्मण रेखा खींच रखी है। वे वही स्टॉक इतने या इससे ज्यादा बाजार पूंजीकरण पर खरीदते हैं जिन्हें ऑपरेटरऔरऔर भी