आखिरकार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाती हुई दिख रही है। आदर्श सोसायटी घोटाले से जुड़े लोगों पर छापे मारे जा रहे हैं। पीडीएस में धांधली करनेवालों, कर अपवंचकों और मंत्रालयों को रिश्वत देकर काम करानेवाली कंपनियों के खिलाफ कड़ाई बरती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट और सीएजी भी बहुत सारे मसलों पर साफ-सफाई के लिए आगे बढ़कर पहल कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक सीएजी ने रिलायंस व मुरली देवड़ा तक पर उंगली उठा दीऔरऔर भी

यूं तो मिस्र से भारत का कोई सीधा लेनादेना नहीं है, लेकिन मिस्र में उठे राजनीतिक तूफान ने पहले से हैरान-परेशान हमारे शेयर बाजार की हवा और बिगाड़ दी है। वैसे भी जब बुरा दौर चल रहा हो, तब मामूली-सी बुरी खबर भी बिगड़ी सूरत को बदतर बनाने के लिए काफी होती है। सेंसेक्स आखिरकार आज नीचे में 18,038.48 तक चला गया। हालांकि बाद में सुधरकर 18327.76 पर बंद हुआ। भारतीय बाजार को पसंद करनेवाले किसी भीऔरऔर भी

हर चीज की अति हमेशा बुरी ही होती है, प्रतिक्रिया की भी। खासकर अति-प्रतिक्रिया निवेशक पर ज्यादा ही चोट करती है। मुद्रास्फीति, ब्याज दरों में वृद्धि और यहां से निकलकर विदेशी पूंजी के विकसित देशों में जाने को लेकर निफ्टी जिस तरह 200 दिनों के मूविंग एवरेज (डीएमए) से नीचे चला गया, वह निश्चित रूप से बाजार की अति-प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ऐसा ही 2008 में लेहमान संकट के बाद हुआ था, जब तमाम ब्रोकर ढोल पीटऔरऔर भी

पिछले चार दिनों से बाजार में बराबर यह खबर उड़ रही थी कि सेबी ने रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) में एसएएसटी (सब्सटैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर) रेगुलेशन के उल्लंघन के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) पर 400 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया है। आज एक प्रमुख बिजनेस चैनल ने भी यह ‘खबर’ फ्लैश कर दी। अंदरूनी व भेदिया कारोबार के माहिर खिलाड़ी निफ्टी और आरआईएल में पिछले हफ्ते से ही शॉर्ट चल रहे हैं। यही वजह हैऔरऔर भी

बाजार की मनोदशा खराब चल रही है। फंड मैनेजर अब भी करीब 15 फीसदी करेक्शन या गिरावट की बात कर रहे हैं। इस सेटलमेंट में बहुत ही कम रोलओवर हुआ है। अगले महीने बजट आना है। मुद्रास्फीति की तलवार सिर पर लटकी है। ब्याज दरों का बढ़ना भी बड़ी चिंता है। इन सारी चिंताओं से घिरा निवेशक पास में कैश की गड्डी होने के बावजूद बाजार में नहीं घुसना चाहता। अमेरिकी बाजार इधर काफी बढ़ चुके हैंऔरऔर भी

लगातार खराब खबरों के वार के बाद बाजार रेपो और रिवर्स रेपो की बढ़त भी झेल गया। इससे आगे क्या? कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे भी अच्छे चल रहे हैं। उनके लाभ में औसत वृद्धि 20 फीसदी के ऊपर निकल जाएगी, जबकि बाजार में चर्चा 13 फीसदी के आसपास की चल रही थी। रोलओवर का सिलसिला अभी तक बड़ा दयनीय है। गुरुवार को डेरिवेटिव सेटलमेंट का आखिरी दिन है। इसलिए रोलओवर के लिए केवल एक दिनऔरऔर भी

प्रधानमंत्री ने कह दिया है कि अगर संसद में सामान्य कामकाज की शर्त जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) का गठन है तो वे यह शर्त मानने को तैयार हैं। बाजार के लिए यह अच्छी सूचना है। रिजर्व बैंक ब्याज दरों में वृद्धि का फैसला कल करने जा रहा है। बाजार इसके लिए तैयार है और शेयरों के मूल्य में ब्याज दरों के 0.50 फीसदी बढ़ने का असर गिन लिया गया है। अगर वृद्धि इससे कम होती है तोऔरऔर भी

भयंकर उतार-चढ़ाव से भरे एक और हफ्ते का आखिरी दिन, शुक्रवार। बाजार गिरा जरूर है। लेकिन यह कहीं से भी काला शुक्रवार नहीं है। आज बाजार बंद होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित करनेवाली है। सोमवार को यही नतीजे बाजार की दशा-दिशा तय करेंगे। वैसे, इस बार के डेरिवेटिव सेटलमेंट के खत्म होने या एक्सपाइरी में केवल तीन दिन बचे हैं, जबकि अभी तक महज 9000 करोड़ रुपए के रोलओवर हुए हैं। इससेऔरऔर भी

मंत्रालयों के फेरबदल ने बाजार को कुछ संदेश दिए हैं। यह जानामाना सच है कि उद्योगपति मंत्रालय व मंत्रियों के साथ रिश्ते बना लेते हैं जिनकी बदौलत उन्हें सरकारी नीतियों के बारे में पहले से पता चल जाता है और इसका इस्तेमाल वे अपने धंधे में करते हैं। इसलिए मंत्रालय में मंत्री बदल जाने से कभी-कभी कंपनियों का नसीब भी इधर से उधर हो जाता है। शरद पवार को कृषि मंत्री बनाए रखना सत्तारूढ़ पार्टी की राजनीतिकऔरऔर भी

बाजार के रुख और रवैये का बदलना अब इतना आसान नहीं रह गया है क्योंकि ट्रेडरों का बहुमत मानता है कि हम निफ्टी में 5500 व 4700 की तरफ जा रहे हैं। वे मानते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री को पद छोड़ना पड़ेगा और इससे बाजार की स्थितियां जटिल हो जाएंगी। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। हालांकि उनके तर्क में दम नहीं नजर आता, लेकिन उनकी हरकतें पूरी तरह उनकी सोच के अनुरूप हैं। 100औरऔर भी