देश के अनुसूचित वाणिज्यक बैंकों ने बीते वित्त वर्ष 2009-10 के आखिरी पखवाड़े में 1,15,549 करोड़ रुपए का ज्यादा कर्ज दिया है। यह पूरे वित्त वर्ष में बैंक कर्ज में हुई कुल 4,64,850 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का 24.85 फीसदी है। रिजर्व बैंक की तरफ से बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 26 मार्च 2010 को बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज की मात्रा 32,40,399 करोड़ रुपए है, जबकि 12 मार्च 2010 को खत्म हुए पखवाड़ेऔरऔर भी

सेंसेक्स के 18,000 तक पहुंचने के आसार ने शेयर कारोबारियों के दिमाग में एक रौ जग गई है कि फटाफट-झटपट कुछ कर लेना चाहिए और वे बेचकर मुनाफा कमाने में लग गए हैं। अच्छी बात है। लेकिन बाजार को अभी लंबा चलना है क्योंकि 13 अप्रैल आने में छह दिन बचे हैं। 13 अप्रैल को इनफोसिस के नतीजों में वो कुंजी है जो बाजार की अगली मंजिल का फैसला करेगी। एचडीआईएल और डीएलएफ ऐसा तेज भाग रहेऔरऔर भी

अगले महीने मई की पहली तारीख या उसके बाद पब्लिक इश्यू लानेवाली किसी भी कंपनी को अपने शेयर इश्यू बंद होने के 12 दिन के भीतर स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध या लिस्ट करा देने होंगे। पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। इसमें इश्यू बंद होने और लिस्ट होने की तारीखें शामिल हैं। इसलिए व्यावहारिक रूप से कंपनी के पब्लिक इश्यू और उसके शेयरों की लिस्टिंग के बीच का समय अब घटकर 10औरऔर भी

बाजार ने शुरू में थोड़ी घबराहट दिखाई। लेकिन आखिर में बंद हुआ 18,000 के थोड़ा और करीब पहुंचकर। और, यह कोई असामान्य बात नहीं है। मेरे मुताबिक इसमें कोई दो राय नहीं है कि बाजार अब ज्यादा चुनौतीपूर्ण और जटिल हो चुका है। बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 8000 अंक से 18,000 अंकों तक का लंबा फासला तय कर चुका है। इसलिए अगर आप सोचते हैं कि आप बाजार के धुरंधर हो गए हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकतेऔरऔर भी

शेयर बाजारों में लिस्टेड या सूचीबद्ध कंपनियों को अब हर छह महीने पर बताना होगा कि उनकी आस्तियों और देनदारियों (एसेट व लायबिलिटीज) की स्थिति क्या है। यह जानकारी उन्हें अपने छमाही नतीजों में अलग से एक नोट में देनी होगी। सभी स्टॉक एक्सचेजों के नाम आज जारी किए गए एक सर्कुलर में पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने यह फैसला सुनाया है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि हर छमाही बीतने केऔरऔर भी

बाजार की गति बतानेवाला बीएसई सेंसेक्स आज 17,935 अंक पर बंद हुआ। यह अब 18,000 के स्तर से कुछ ही फासले पर है। आनेवाले हफ्तों में यह 18,300 अंक के पार जा सकता है। टाटा स्टील 680 रुपए पर जा पहुंचा तो स्टरलाइट 865, सैंडुर 760, विंडसर 47, विमप्लास्ट 184, शिवालिक 33, बालासोर 28, आरडीबी 118, एसएनएल 42, जमना ऑटो 89 और एनआरबी 78 रुपए तक चला गया। बढ़त का दौर ऐसे ही चला। फिर भी बहुतऔरऔर भी

यह किसी आम आदमी का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह के बिजनेस अखबार मिंट के डिप्टी एडिटर स्तर के खास आदमी का मामला है। उनका नाम क्या है, इसे जानने का कोई फायदा नहीं। लेकिन उनके साथ घटा वाकया जानने से बीमा उद्योग का ऐसा व्यावहारिक सच हमारे सामने आता है जो साबित करता है कि इस उद्योग में निहित स्वार्थों का ऐसा नेक्सस बना हुआ है जिसका मकसद बीमा उद्योग या कंपनी का विकास नहीं, बल्किऔरऔर भी

देश में अंग्रेजों के जमाने के रिवाजों व कानूनों को बदलने का मन बनने लगा है। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को भोपाल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह में पहनी जानेवाली ड्रेस को बर्बर औपनिवेश रिवाज बताते हुए उतार फेंका तो उसके एक दिन पहले गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के प्लैटिनम जुबली समारोह में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश में वित्तीय क्षेत्र को चलानेवाले ज्यादातर कानून पुराने पड़औरऔर भी

मुझे अपने स्तर पर पता है कि बाजार के एक स्मार्ट ऑपरेटर ने निफ्टी में 5300 के स्तर पर कुछ शॉर्ट सौदे किए हैं। हालांकि वह तमाम शेयरों के साथ ही बाजार में तेजी आने की धारणा रखता है। असल में उसने शॉर्ट कॉल महज इसलिए दी है क्योंकि वह जांचना चाहता है कि निफ्टी में 5350 पर कोई रुकावट बन रही है या नहीं। उसे खुद लगता है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी 7000 तकऔरऔर भी

देश के शेयर बाजारों में सूचीबद्ध 27 फीसदी कंपनियों में पिछले कई महीनों से कोई कारोबार नहीं हो रहा है। इनमें से ज्यादातर कंपनियों के प्रवर्तक अपने शेयर पहले ही बेचकर निकल चुके हैं। लेकिन लाखों आम निवेशक इनमें से ऐसा फंसे हैं कि न उनसे उगलते बन रहा है और न ही निगलते। करोड़ों के इस गड़बड़झाले पर न तो सेबी का कोई ध्यान है और न ही कॉरपोरेट मामलात इसे तवज्जो दे रहा है। बॉम्बेऔरऔर भी